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Blog / 15 Feb 2025

आयकर विधेयक, 2025

प्रसंग:

आयकर विधेयक, 2025 को 15 फरवरी, 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के कर प्रणाली को सरल बनाना है, जिसमें पुराने प्रावधानों को हटाना, कानून को अधिक स्पष्ट बनाना और कानूनी जटिलताओं को कम करना शामिल है। यह 1961 के आयकर अधिनियम को बदलकर 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है।

विधेयक की प्रमुख बातें:

संक्षिप्त और सरल कर कानून: नया विधेयक शब्दों की संख्या को आधा कर देता है, जिससे यह अधिक संक्षिप्त और उपयोगकर्ता के अनुकूल बन जाता है। अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी गई है, और धाराएं 819 से घटकर 536 रह गई हैं

जटिल कानूनी भाषा के बजाय, कटौती, छूट और कर दरों जैसी महत्वपूर्ण जानकारी को तालिकाओं में प्रस्तुत किया गया है, जिससे इसे समझना आसान हो गया है।

"कर वर्ष" की नई अवधारणा:

  • पुराने निर्धारण वर्ष (Assessment Year - AY) को हटाकर अब "कर वर्ष" (Tax Year) की नई प्रणाली लाई गई है, जो वित्तीय वर्ष के अनुरूप होगी
  • इससे कर दाखिल करने की प्रक्रिया सरल होगी और व्यक्तियों व्यवसायों के लिए कर अवधि का रिकॉर्ड रखना आसान होगा।
  • नए व्यवसायों या पेशों के लिए, कर वर्ष उनकी स्थापना की तारीख से शुरू होगा और उसी वित्तीय वर्ष में समाप्त होगा।

डिजिटल लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी पर नए नियम:

  • विधेयक "आभासी डिजिटल क्षेत्र" (Virtual Digital Space) की परिभाषा का विस्तार करता है ताकि इसमें ईमेल सर्वर, सोशल मीडिया, क्लाउड स्टोरेज, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म शामिल हों।
  • इससे कर अधिकारियों को डिजिटल लेनदेन की निगरानी और जांच करने में आसानी होगी
  • क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों को अब आधिकारिक रूप से 'संपत्ति' माना जाएगा और रियल एस्टेट, शेयर बाजार और सोने की तरह इन पर भी पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) लगेगा।

पूंजीगत लाभ कर और कटौतियों में बदलाव:

  • 1992 से पहले की संपत्ति हस्तांतरण पर पूंजीगत लाभ कर छूट जैसी पुरानी व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिया गया है।
  • वेतन से संबंधित कटौतियों जैसे मानक कटौती (Standard Deduction), ग्रेच्युटी (Gratuity) और अर्जित अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) को एक संरचित प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे इन्हें समझना आसान होगा।

तेजी से और स्पष्ट विवाद समाधान:

  • विवाद समाधान पैनल (Dispute Resolution Panel - DRP) में सुधार किया गया है और इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि निर्णय कैसे लिए जाएंगे और सूचित किए जाएंगे।
  • इससे कर विवादों के निपटान की प्रक्रिया तेज होगी और मुकदमों की संख्या में कमी आने की संभावना है।

What's new in the Income Tax Bill, 2025 | Explained News - The Indian  Express

चुनौतियाँ और भविष्य के प्रभाव:

कोई बड़े संरचनात्मक सुधार नहीं:

  • विधेयक प्रावधानों को सरल बनाता है, लेकिन कर दरों, दंड (Penalties) या अनुपालन प्रणाली में बड़े बदलाव नहीं करता
  • विशेषज्ञों का मानना है कि इसे और अधिक करदाता-अनुकूल बनाने के लिए आगे और सुधारों की जरूरत है।

संक्रमण संबंधी चुनौतियाँ:

  • करदाताओं और व्यवसायों को "कर वर्ष" की नई अवधारणा के अनुकूल होने में समय लगेगा
  • वित्तीय पेशेवरों को अपनी कर रणनीतियों और सिस्टम को अपडेट करना होगा।

निष्कर्ष:

भारत की कर प्रणाली लंबे समय से जटिल और कठिन रही है। 2010 और 2018 में इसे सरल बनाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन वे पूरी तरह लागू नहीं हो सके।
आयकर विधेयक, 2025 अनावश्यक प्रावधानों को हटाकर, भाषा को सरल बनाकर और कर नियमों को अधिक स्पष्ट बनाकर एक पारदर्शी, कुशल और सुव्यवस्थित कर प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।