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Blog / 07 Mar 2025

ग्रीनलैंड का भविष्य

संदर्भ:

हाल ही में ग्रीनलैंड वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस द्वीप को अधिग्रहित (Acquire) करने की इच्छा व्यक्त की। अपने एक संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय (Right to Self-Determination) का समर्थन करता है, लेकिन साथ ही इसे अमेरिकी क्षेत्र में शामिल करने का इरादा भी रखता है।

ग्रीनलैंड की स्वायत्तता और आत्मनिर्णय के बारे में:

·        ग्रीनलैंड को 1979 में डेनमार्क से आंशिक स्वशासन प्राप्त हुआ, जिससे इसे अपने आंतरिक प्रशासन में व्यापक अधिकार मिले। यह स्वायत्तता निरंतर बढ़ती रही है, 2009 में ग्रीनलैंड को और अधिक शक्तियां हस्तांतरित की गईं।

·        डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र होने के बावजूद, ग्रीनलैंड में सरकार और विधायी निकाय है जो इसके आंतरिक मामलों को संभालता है, जबकि डेनमार्क रक्षा, विदेश नीति और मौद्रिक मामलों का प्रबंधन करता है।

·        हालांकि, ग्रीनलैंड के लोगों में डेनमार्क से और भी अधिक आत्मनिर्णय और पूर्ण स्वतंत्रता के लिए भावना बढ़ रही है।

अमेरिका का पक्ष:

·        अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने तर्क में कहा कि ग्रीनलैंड का अधिग्रहण अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसे में अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने साथ एकीकृत करने का समर्थन करेगा।

·        हालांकि, ग्रीनलैंड के नागरिकों और नेतृत्व ने इसे अपनी संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार का उल्लंघन माना ,साथ ही ग्रीनलैंड प्रधानमंत्री म्यूटे बोरुप एगेडे ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के निवासियों द्वारा तय किया जाएगा।

ग्रीनलैंड का भू-राजनीतिक महत्व:

·        ग्रीनलैंड का भू-राजनीतिक महत्व हाल के वर्षों में अपने विशाल आकार, समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों और आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक स्थान के कारण बढ़ गया है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं और तेल, गैस और खनिजों के दुर्गम भंडार मिल रहे हैं, इसलिए यह द्वीप संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों के लिए रुचि का मुख्य बिंदु बन गया है।

·        अमेरिका के लिए, आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति  सुदृढ़ करने की दिशा में ग्रीनलैंड एक महत्वपूर्ण भौगोलिक एवं भू-आर्थिक संपदा के रूप में उभरता है। वैश्विक व्यापार मार्गों, ऊर्जा संसाधनों और सैन्य रणनीति के त्रिकोण में स्थित आर्कटिक क्षेत्र वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। रूस, चीन और अमेरिका जैसे वैश्विक शक्ति केंद्र  इस क्षेत्र में बढ़ते संसाधन दोहन और समुद्री मार्गों पर प्रभाव नियंत्रण स्थापित करने की होड़ में शामिल हैं।

आगे की राह :

ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर जारी विमर्श में, वहां की स्थानीय जनता की भूमिका निर्णायक होगी, क्योंकि आत्मनिर्णय का सिद्धांत उन्हें अपने राजनैतिक भाग्य को निर्धारित करने का प्राथमिक अधिकार देता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रीनलैंड पूर्ण स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाता है या डेनमार्क के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को किसी नए ढांचे में ढालता है। चाहे ग्रीनलैंड पूर्ण स्वतंत्रता की ओर बढ़े या डेनमार्क के साथ अपने संबंधों को जारी रखे, द्वीप के समृद्ध संसाधन और रणनीतिक स्थान निस्संदेह आने वाले वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक गतिशीलता को आकार देना जारी रखेंगे। ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर बहस आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की जटिलताओं और वैश्विक मंच पर आर्कटिक क्षेत्र के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है।