संदर्भ:
हाल ही में केरल के वायनाड क्षेत्र में यूफेआ वेयानाडेन्सिस नामक एक नई डैम्सलफ्लाई (पतली और रंगीन पंखों वाली उड़ने वाली कीट प्रजाति) की खोज की गई है। इस प्रजाति की खोज से केरल में ओडोनेटा वर्ग के कीटों की कुल संख्या अब 191 हो गई है, जबकि पूरे पश्चिमी घाट में इनकी संख्या बढ़कर 223 हो गई है।
इस प्रजाति का वर्गीकरण:
- परिवार (Family): यह प्रजाति यूफेइडे (Euphaeidae) परिवार से संबंधित है।
- इसे सबसे पहले वर्ष 2013 में केरल के वायनाड जिले के थिरुनेल्ली क्षेत्र में कालिंदी नदी के किनारे देखा गया था।
- प्रारंभ में इसे यूफेआ स्यूडोडिसपर (Euphaea pseudodispar) प्रजाति का सदस्य समझा गया था, लेकिन बाद में आनुवंशिक विश्लेषण और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि यह एक अलग प्रजाति है।
- इस प्रजाति की पहचान यह दर्शाती है कि जैव विविधता से समृद्ध पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्रों में नई प्रजातियों की खोज और उनकी सटीक पहचान करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है।
इस प्रजाति की विशेषताएं:
- पिछला पंख (Hind Wing): इस प्रजातिके पिछले पंख पर अन्य प्रजातियों की तुलना में अपेक्षाकृत बड़ा और गहरा काला धब्बा पाया जाता है।
- रंग-रूप (Colouration): इसके नर प्रजाति के शरीर पर गाढ़ी और स्पष्ट धारियाँ होती हैं, जिन्हें ह्यूमरल और एंटिह्यूमरल स्ट्राइप्स कहा जाता है। ये धारियाँ बिना किसी रूकावट के लगातार फैली होती हैं, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती हैं।
- जनन संरचना (Genital Structure): नर की जनन संरचना में विशिष्ट अंतर पाए गए हैं, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग करते हैं।
इस प्रजाति का आवास और प्रसार:
- आवास: यह प्रजाति तेज बहाव वाली ऐसी नदियों में पाई जाती है जिनका तल चट्टानी होता है और उसमें जलीय पौधे उपस्थित होते हैं। ऐसे जल स्रोत प्रायः सदाबहार एवं अर्ध-सदाबहार वनों के भीतर स्थित होते हैं।
- भौगोलिक प्रसार: यह मुख्य रूप से पश्चिमी घाट की नदियों के किनारे सीमित क्षेत्र में पाई जाती है।
- सक्रियता का समय: यह प्रजाति अधिकांश समय सक्रिय रहती है, परंतु गर्मी और सूखे के मौसम—विशेषतः मार्च और अप्रैल में—यह कम या बिल्कुल दिखाई नहीं देती।
- संवेदनशीलता (Vulnerability): चूंकि यह प्रजाति अत्यंत सीमित क्षेत्र में ही पाई जाती है, इसलिए इसके आवास के नष्ट होने या जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
खोज का महत्व:
- यह खोज इस बात का प्रमाण है कि पश्चिमी घाट जैव विविधता से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है, लेकिन साथ ही इसकी पारिस्थितिकीय संरचना अत्यंत संवेदनशील और नाजुक भी है।
- यूफेआ स्यूडोडिसपर जैसी प्रजातियों की सीमित उपस्थिति और उनके खतरों को देखते हुए, इनके संरक्षण के लिए तत्काल और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।
- इस प्रकार की दुर्लभ प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना न केवल उनके अस्तित्व के लिए आवश्यक है, बल्कि समग्र पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ओडोनेटा प्रजातियों के बारे में:
ओडोनेटा कीटों का एक प्राचीन और रोचक समूह है, जिसकी उत्पत्ति लाखों वर्ष पहले हुई थी। यह समूह मुख्य रूप से तीन उप-समूहों में विभाजित है:
- अनिसोप्टेरा (ड्रैगनफ्लाई): ये आकार में बड़े और अधिक उड़ान भरने वाले कीट होते हैं। इनका शरीर और आँखें मोटी होती हैं।
- ज़ाइगोप्टेरा (डैम्सलफ्लाई): ये छोटे, पतले और अधिक नाज़ुक संरचना वाले होते हैं। इनके पंख भी पतले होते हैं और आराम की स्थिति में ये अपने पंखों को शरीर के साथ बंद करके रखते हैं।
- एनिसोजाइगोप्टेरा: यह एक दुर्लभ उप-समूह है, जिसमें वर्तमान में केवल दो जीवित प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें ड्रैगनफ्लाई और डैम्सलफ्लाई दोनों की विशेषताएँ देखी जाती हैं।
निष्कर्ष:
यूफेआ वेयानाडेन्सिस जैसी दुर्लभ और विशिष्ट प्रजातियाँ यह बताती हैं कि पश्चिमी घाट जैसे जैव विविधता-समृद्ध क्षेत्रों की प्राकृतिक संपदा कितनी मूल्यवान और संवेदनशील है। इन क्षेत्रों को लगातार बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप, जलवायु परिवर्तन और आवास विनाश जैसे विविध खतरों से बचाना तथा इनका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है।