सन्दर्भ-
29 मार्च 2025 को म्यांमार के मध्य क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई और कम से कम 144 लोगों की मौत हो गई। इस भूकंप के झटके न केवल म्यांमार में बल्कि पड़ोसी देश थाईलैंड और भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों में भी महसूस किए गए। म्यांमार में अक्सर भूकंप आते हैं, और इसके पीछे की वजहें पृथ्वी की गहरी संरचना में छिपी हुई हैं।
सगाइंग फॉल्ट एक प्रमुख भ्रंश रेखा (fault line) है, जो म्यांमार के उत्तर से दक्षिण तक फैली हुई है। यह क्षेत्र भूकंप के लिए अत्यधिक संवेदनशील है क्योंकि यह भारतीय प्लेट (Indian Plate) और यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) की सीमा पर स्थित है। इन प्लेटों के लगातार खिसकने और उनके बीच तनाव बनने के कारण यह क्षेत्र बार-बार भूकंप से प्रभावित होता है। 2025 का भूकंप भी इसी भूगर्भीय संरचना का एक उदाहरण था।
भूकंप क्या होता है?
भूकंप तब आता है जब पृथ्वी की ऊपरी सतह (क्रस्ट) या ऊपरी मेंटल में अचानक ऊर्जा मुक्त होती है। यह ऊर्जा सिस्मिक वेव्स (भूकंपीय तरंगों) के रूप में फैलती है, जिससे जमीन हिलने लगती है।
भूकंप आने के कारण
भूकंप मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण आते हैं। 2025 में म्यांमार में आए भूकंप की वजह "स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग" (Strike-slip faulting) थी। इस प्रक्रिया में दो टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर विपरीत दिशाओं में खिसकती हैं। इस घटना में भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपसी टकराव के कारण धरती में कंपन हुआ और भूकंप आया।
भूकंप का फोकस और एपिसेंटर
फोकस (Hypocenter): वह बिंदु जो पृथ्वी के अंदर गहराई में स्थित होता है और जहां से भूकंप की ऊर्जा सबसे पहले निकलती है।
एपिसेंटर (Epicenter): पृथ्वी की सतह पर वह बिंदु जो फोकस के ठीक ऊपर स्थित होता है। यह स्थान भूकंप की तरंगों को सबसे पहले महसूस करता है।
निष्कर्ष-
म्यांमार में बार-बार भूकंप आने का मुख्य कारण इसका सगाइंग फॉल्ट पर स्थित होना है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार आपस में टकराती रहती हैं। यदि इन प्लेटों की गतिविधियों और फॉल्ट लाइनों के बारे में सही जानकारी हो, तो भविष्य में आने वाले भूकंपों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है और उनकी क्षति को कम किया जा सकता है।