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Blog / 29 Mar 2025

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली

संदर्भ:

हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली शुरू की है, जो एक अभूतपूर्व पहल है जिसका उद्देश्य मोबाइल इंटरफ़ेस के माध्यम से सीधे खेत से वास्तविक समय में फसल बोआई की जानकारी एकत्र करना है। यह अभिनव प्रणाली प्रत्येक कृषि भूखंड के लिए फसल क्षेत्रों की सटीक और अद्यतित जानकारी सुनिश्चित करती है, जो सटीक उत्पादन अनुमानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ:

      वास्तविक समय डेटा संग्रह: DCS प्रणाली कृषि क्षेत्रों से डेटा के प्रत्यक्ष और वास्तविक समय संग्रह को सक्षम बनाती है। यह प्रक्रिया केवल डेटा संग्रह की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि करती है, बल्कि त्रुटियों की संभावना को भी काफी हद तक कम करती है।

      एग्री स्टैक: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुपालन में निर्मित एग्री स्टैक एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यह कड़े डेटा सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए किसानों के डेटा की पूर्ण गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

      किसान-केंद्रित दृष्टिकोण: यह प्रणाली किसानों को उनके डेटा पर नियंत्रण रखने का अधिकार देती है। डेटा केवल अधिकृत संस्थाओं के साथ और स्पष्ट रूप से परिभाषित उद्देश्यों के लिए ही साझा किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास सुनिश्चित होता है।

      संघीय संरचना: DCS प्रणाली की संघीय संरचना राज्यों को उनके डेटा पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने की अनुमति देती है। यह मॉडल केंद्रीय निगरानी को सक्षम बनाते हुए भी राज्य स्तर पर गोपनीयता और प्रभावी शासन को बढ़ावा देता है।

      मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय: डेटा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए DCS प्रणाली में एन्क्रिप्शन, सुरक्षित API और टोकन-आधारित प्रमाणीकरण जैसे उन्नत उपाय अपनाए गए हैं। यह सभी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) के दिशानिर्देशों के अनुरूप होती हैं।

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) सिस्टम के लाभ:

    बेहतर फसल क्षेत्र अनुमान:
यह प्रणाली सीधे खेतों से वास्तविक समय में सटीक डेटा एकत्र करती है, जिससे फसल क्षेत्रों का अनुमान लगाना आसान और भरोसेमंद बनता है। यह कृषि नीतियों और योजनाओं के लिए सही निर्णय लेने में मदद करता है।

    किसानों को अधिक सहायता:
यह प्रणाली न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खरीद, फसल बीमा और फसल ऋण जैसी सेवाओं को आसानी से उपलब्ध कराती है। इससे किसानों को समय पर और सही मदद मिलती है।

    बढ़ी हुई दक्षता:
डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को डिजिटल और स्वचालित करने से गलतियों की संभावना कम होती है और कृषि क्षेत्र में काम करने की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होता है।

चुनौतियाँ और सीमाएँ:

      पहुँच में एकरूपता: डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सभी राज्यों में इसे समान रूप से लागू किया जाए। वर्तमान में, कुछ राज्य पूरी तरह से इस प्रणाली के अंतर्गत कवर किए गए हैं, जबकि अन्य राज्य अपने कार्यान्वयन में पिछड़ रहे हैं।

      तकनीकी मुद्दे: ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी और उपग्रह इमेजिंग की सटीकता में भिन्नता जैसी समस्याएँ डेटा संग्रहण की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।

      डिजिटल साक्षरता की कमी: किसानों और क्षेत्र अधिकारियों में डिजिटल उपकरणों के उपयोग की सीमित समझ एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या के समाधान के लिए, डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली के उपयोग के संबंध में व्यापक क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया जाना चाहिए, ताकि डेटा संग्रह की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

निष्कर्ष:

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली भारतीय कृषि में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है। यह प्रणाली सही डेटा एकत्र कर, किसान सहायता में सुधार कर और डिजिटल तकनीक का लाभ देकर पारदर्शिता और कुशलता को बढ़ावा देती है।