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Blog / 27 Feb 2025

डिजिटल ऑडिटिग के लिए कैग का समझौता

संदर्भ:

हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ऑडिट प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी जटिल चुनौतियों का समाधान करने पर केंद्रित है। विशेष रूप से, यह पहल ऑडिटर्स की डिजिटल साक्षरता और तकनीकी क्षमताओं का समग्र विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एमओयू के उद्देश्य:

·        इस सहयोग का प्राथमिक लक्ष्य अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक को अपनाकर ऑडिटिंग प्रक्रिया को प्रभावी बनाना हैं। यह समझौता विशेष रूप से डिजिटल ऑडिट के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करने और उन संस्थानों की ऑडिट प्रक्रिया विकसित करने पर केंद्रित है, जो बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा का सृजन और प्रबंधन करते हैं तथा जिनका मूल्यांकन दूरस्थ माध्यमों के जरिए किया जाता है।

·        आईआईटी मद्रास की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए, CAG अपने ऑडिटर्स को डिजिटल डेटा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान एवं उपकरण उपलब्ध कराएगा।

·        इस पहल का उद्देश्य सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध लेखापरीक्षा सुनिश्चित करना है, जो वर्तमान में डिजिटल सूचना पर अत्यधिक निर्भर हो चुके हैं।

मुख्य फोकस क्षेत्र:

इस साझेदारी के अंतर्गत CAG और IIT मद्रास ने भारतीय लेखापरीक्षा प्रणाली के भविष्य को सुदृढ़ करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है:

1.  डिजिटल ऑडिट प्रोटोकॉल का विकास: साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य डिजिटल ऑडिट के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल और दिशानिर्देशों का निर्माण करना है। इसमें डिजिटल डेटा के संग्रह, सत्यापन और विश्लेषण की प्रक्रियाएँ शामिल होंगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऑडिट विस्तृत, पारदर्शी और प्रमाणिक हों।

2.  ऑडिटिंग प्रभावशीलता सुनिश्चित करना: डिजिटल सिस्टम के बढ़ते प्रयोग के बीच, यह आवश्यक है कि ऑडिटर्स को उन्नत उपकरणों और तकनीकों से लैस किया जाए, ताकि वे बदलते परिदृश्य में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

3.  साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाना: वर्तमान समय में साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों का खतरा बढ़ रहा है। इस साझेदारी का उद्देश्य संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों को विकसित करना है, जिससे लेखापरीक्षा प्रक्रिया के दौरान डेटा की अखंडता एवं गोपनीयता बनी रहे।

4.  ऑडिटिंग संस्थाओं के लिए मैनुअल अपडेट: CAG और IIT मद्रास मिलकर ऑडिट मैनुअल को इस प्रकार अद्यतन करेंगे, जिससे वे डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप हो सकें। इसमें विशेष रूप से डेटा सुरक्षा मानक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन और साइबर जोखिमों की पहचान जैसी प्रक्रियाओं को शामिल किया जाएगा।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के बारे में:

·        CAG एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण है जोकि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सरकार द्वारा वित्तपोषित अन्य निकायों की प्राप्तियों और व्ययों की लेखा परीक्षा के लिए उत्तरदायी है। यह सरकारी कार्यों में वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

·        CAG की स्थापना भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत की गई है। यह देश के वित्तीय प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

CAG के कार्य:

CAG के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:

संघ, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त की लेखा परीक्षा करना।

वित्तीय प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना।

प्राप्तियों, व्यय और सार्वजनिक उपक्रमों सहित विभिन्न सरकारी खातों की लेखा परीक्षा करना।

निष्कर्ष:

नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और IIT मद्रास के बीच समझौता ज्ञापन डिजिटल युग में लेखा परीक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। जैसे-जैसे डिजिटल डेटा शासन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है, यह सहयोग सुनिश्चित करेगा कि ऑडिट प्रभावी, सुरक्षित और आधुनिक तकनीकी प्रगति के साथ संरेखित रहें। इससे भविष्य में अधिक पारदर्शी और कुशल ऑडिटिंग प्रक्रिया प्राप्त  होगी, जो अंततः जनता को लाभान्वित करेगी और सरकारी कार्यों में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।