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Blog / 02 Apr 2025

चीन और बांग्लादेश संबंध

संदर्भ:

बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार, मुहम्मद यूनुस, 26-29 मार्च 2025 के बीच आधिकारिक चीन दौरे पर रहे। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति को दक्षिण एशिया के लिए समुद्र तक पहुंचने के एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने बांग्लादेश की क्षमता को एक प्रमुख समुद्री मार्ग  और क्षेत्रीय आर्थिक कनेक्टिविटी के केंद्र के रूप में उजागर किया। उनकी यह टिप्पणी आगामी BIMSTEC शिखर सम्मेलन से पहले आई है, जहां बांग्लादेश संगठन की अध्यक्षता संभालने जा रहा है।

मुहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के प्रमुख बिंदु:

  • रणनीतिक साझेदारी:  मुहम्मद यूनुस ने चीन को बांग्लादेश में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया, ताकि वह इसके रणनीतिक स्थान का लाभ उठाकर क्षेत्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बना सके।
  • आर्थिक सहयोग: दोनों देशों ने नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो आर्थिक और तकनीकी सहयोग, बुनियादी ढांचे, मीडिया, संस्कृति और स्वास्थ्य से जुड़े हैं।
  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA): चीन और बांग्लादेश ने एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत करने पर सहमति जताई, जिससे व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विवादास्पद संदर्भ:

मुहम्मद यूनुस ने भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों (असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश) का उल्लेख किया, जिन्हें अक्सर "सात बहनें" कहा जाता है उन्होंने इन राज्यों को भूमिबद्ध (जमीन से घिरे हुए) क्षेत्र बताते हुए कहा कि उन्हें समुद्र तक सुगम पहुंच की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बांग्लादेश, चीन और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच आर्थिक सहयोग का माध्यम बन सकता है। इस वार्ता ने भारत में चिंता बढ़ा दी, क्योंकि पूर्वोत्तर क्षेत्र केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

 

भारत की चिंताएं:

1. भारत के पूर्वोत्तर की रणनीतिक संवेदनशीलता:

  • पूर्वोत्तर राज्य भारत की सुरक्षा और संपर्क के लिए बेहद अहम हैं।
  • ये राज्य चीन से सटे हुए हैं, इसलिए चीन का कोई भी आर्थिक या बुनियादी ढांचा विकास भारत के लिए सुरक्षा चिंता का विषय बन सकता है।

2. दक्षिण एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव:

  • भारत, चीन की दक्षिण एशिया में बढ़ती उपस्थिति, खासकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर सतर्क है।
  • भारत के लिए चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि बांग्लादेश में चीन की बढ़ती भागीदारी सैन्य प्रभाव में बदल सकती है, जिससे भारत-चीन के सीमा विवाद और जटिल हो सकते हैं।

3. सिलीगुड़ी कॉरिडोर: एक कमजोर कड़ी

  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे "चिकन नेक" भी कहा जाता है) जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एक संपर्क मार्ग है।
  • भारत को चिंता है कि बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी इस मार्ग की सुरक्षा को कमजोर कर सकती है और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर असर डाल सकती है।

4. भारत की सीमाओं के पास चीन की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं

  • चीन, भारत की सीमाओं (खासकर अरुणाचल प्रदेश में) के पास सड़कें, बांध और विकास की परियोजनाएं चला रहा है जिसे भारत अपना क्षेत्र मानता है।
  • ये परियोजनाएं चीन की उस क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
  • अगर चीन बांग्लादेश (खासकर संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के पास) में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाता है तो वह सैन्य और खुफिया गतिविधियों को भी बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष

मुहम्मद यूनुस की चीन यात्रा दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह बांग्लादेश को चीनी निवेश के जरिए आर्थिक विकास के मौके तो देती है, लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों को जटिल भी बना सकती है। खासतौर पर, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की रणनीतिक महत्व के लिए यह दौरा भारत के लिए चिंता का विषय है।