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Blog / 07 Mar 2025

भारतीय वायु सेना की क्षमता में सुधार हेतु रिपोर्ट

सन्दर्भ :

हाल ही में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित अधिकार प्राप्त समिति ने भारतीय वायु सेना (IAF) की क्षमता वृद्धि से जुड़ी अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप दी है।

·        यह रिपोर्ट IAF में लड़ाकू विमानों की मौजूदा कमी को दूर करने, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और भारत की हवाई युद्ध क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत करती है।

लड़ाकू विमानों की कमी और परिचालन संबंधी चुनौतियाँ:

वर्तमान स्थिति और आवश्यकताएँ:

·        IAF वर्तमान में 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन संचालित करता है, जो 42.5 स्क्वाड्रन की स्वीकृत ताकत से काफी कम है।

·        जगुआर, MIG-29UPG और मिराज-2000 सहित कई मौजूदा विमानों को दशक के अंत तक चरणबद्ध तरीके से हटा दिया जाएगा।

·         वायुसेना प्रमुख .पी. सिंह के अनुसार, युद्ध की तैयारी बनाए रखने के लिए भारतीय वायुसेना को हर साल 35-40 लड़ाकू विमान खरीदने चाहिए।

योजनाएं और चुनौतियां :

·        लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk-1A: HAL ने 2025 में 12 विमान देने और 2026 में उत्पादन बढ़ाकर 24 यूनिट करने की प्रतिबद्धता जताई है।

·        LCA-Mk2: यह विमान वर्तमान में विकासाधीन, यह पुराने विमानों का प्रतिस्थापन करेगा।

·        एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA): भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान, जिसे अगले 10 वर्षों में परिचालन में लाने की योजना है।

स्वदेशीकरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी:

रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता:

·        रिपोर्ट में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत घरेलू एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

·        रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSU) और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के प्रयासों का समर्थन करने के लिए निजी क्षेत्र की फर्मों की अधिक भागीदारी की सिफारिश की गई है।

रणनीतिक उद्देश्य:

विमान उत्पादन में दक्षता बढ़ाना।

विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना।

महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की डिलीवरी में तेजी लाना।

अधिकार प्राप्त समिति का गठन:

समिति का गठन रक्षा मंत्री के निर्देश पर भारतीय वायुसेना के सामने आने वाली चुनौतियों का समग्र रूप से आकलन करने और एक व्यापक कार्य योजना विकसित करने के लिए किया गया था। इसमें शामिल हैं:

·        अध्यक्ष: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह

·        सदस्य:

·        वायु सेना के उप प्रमुख

·        सचिव, रक्षा उत्पादन

·        सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग

·        महानिदेशक, अधिग्रहण

·        अध्यक्ष, डीआरडीओ

·        वायु सेना के उप प्रमुख (सदस्य सचिव)

कार्यान्वयन रणनीति:

·        रक्षा मंत्री ने सिफारिशों का समर्थन किया है और निर्देश दिया है कि उनका समयबद्ध तरीके से पालन किया जाए।

·        तत्काल कदम लड़ाकू जेट उत्पादन में तेजी लाने और अल्पकालिक क्षमता अंतराल को दूर करने पर केंद्रित होंगे।

·        दीर्घकालिक उपायों का उद्देश्य उन्नत स्वदेशी विमान विकसित करना और रक्षा विनिर्माण को मजबूत करना होगा।

निष्कर्ष:

अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण, लड़ाकू विमानों की कमी को दूर करने और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करती है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की हवाई श्रेष्ठता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन सिफारिशों का समय पर कार्यान्वयन महत्वपूर्ण होगा।