संदर्भ:
हाल ही में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर के शोधकर्ताओं ने दीर्घकालिक स्थायित्व एवं उच्च प्रतिरोधक क्षमता वाली बहु-प्रधान तत्व मिश्र धातुओं (MPEAs) के विकास में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
बहु-प्रधान तत्व मिश्र धातुओं के विषय में:
· MPEAs एक नई तरह की मिश्र धातु हैं, जो पारंपरिक मिश्र धातुओं से अलग कई प्रमुख तत्वों से मिलकर बनी होती हैं। अब तक यह धारणा थी कि धातुओं की शक्ति बढ़ाने के लिए उनकी संरचना में बदलाव करने या कुछ भंगुर तत्व जोड़ने से उनकी टिकाऊ क्षमता (durability) कम हो जाती है।
· इसके विपरीत शोधकर्ताओं के अध्ययन से अनुसार कुछ खास सूक्ष्म संरचनात्मक बदलावों से मिश्र धातुओं को न केवल अधिक मजबूत बनाया जा सकता है, बल्कि उनकी दीर्घकालिक स्थिरता भी बेहतर हो सकती है। यह खोज एयरोस्पेस, रक्षा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में मजबूत और टिकाऊ सामग्री के विकास के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
अभिनव अनुसंधान पद्धति के बारे में:
· शोध दल ने क्रोमियम-निकल (Cr/Ni) अनुपात में बदलाव करते हुए Cr-Mn-Fe-Co-Ni मिश्र धातु प्रणाली का अध्ययन किया। उन्होंने दो अलग-अलग फेस-सेंटर्ड क्यूबिक (FCC) संरचना वाली एकल-चरण MPEAs विकसित कीं, जिनमें अलग-अलग स्टैकिंग फॉल्ट ऊर्जा (स्टैकिंग फॉल्ट ऊर्जा से तात्पर्य किसी धातु की आंतरिक संरचना में होने वाले बदलाव को संभालने की क्षमता है।) थी। अध्ययन में पाया गया कि कम-SFE (सुपरक्रिटिकल फ्लुइड एक्सट्रैक्शन ) मिश्र धातु ने उच्च-SFE मिश्र धातु की तुलना में 10-20% अधिक चक्रीय शक्ति प्रदर्शित की, जबकि दोनों का स्थायित्व लगभग समान रहा। यह सुधार मुख्य रूप से कम-SFE (सुपरक्रिटिकल फ्लुइड एक्सट्रैक्शन ) मिश्र धातु में अव्यवस्था उप-संरचनाओं के धीमे निर्माण और दरारों के धीमे प्रसार के कारण हुआ। यह निष्कर्ष दर्शाता है कि सूक्ष्म संरचनात्मक नियंत्रण से मिश्र धातुओं की स्थायित्व क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।
· शोधकर्ताओं ने एकल-चरण मिश्र धातुओं के अलावा एक दोहरे-चरण मिश्र धातु भी विकसित किया, जो एकल-चरण कम-SFE मिश्र धातु की तुलना में 50-65% अधिक मजबूत साबित हुआ। इस मजबूती का मुख्य कारण था—सूक्ष्म संरचनात्मक बदलाव, छोटे कणों के कारण बढ़ा हुआ आंतरिक दबाव और ठोस कणों (σ-अवक्षेप) की मौजूदगी, जो दरारों को बढ़ने से रोकते हैं। इसके अतिरिक्त, दरारों के आसपास होने वाला बड़ा आकार परिवर्तन फिसलन (twin-slip) को बढ़ावा देता है, जिससे दरारें धीरे-धीरे फैलती हैं। यह अध्ययन दिखाता है कि यदि मिश्र धातुओं की बनावट को सही तरीके से नियंत्रित किया जाए, तो उनकी ताकत और टिकाऊपन को काफी बढ़ाया जा सकता है।
भविष्य के अनुसंधान और अनुप्रयोगों के लिए निहितार्थ:
· यह शोध MPEAs में होने वाले बदलाव और नुकसान के कारणों को बेहतर समझने में मदद करता है, विशेषतौर पर यह कि स्टैकिंग फॉल्ट ऊर्जा और भंगुर तत्व उनके मजबूती से जुड़े गुणों को कैसे प्रभावित करते हैं। यह अध्ययन जटिल मिश्र धातुओं पर आगे होने वाले शोध के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है, विशेषकर उन उद्योगों के लिए जहां मजबूत और टिकाऊ सामग्रियों की जरूरत होती है।
यह शोध भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) द्वारा समर्थित है, जो सामग्री विज्ञान में सरकारी सहयोग को दर्शाता है। यह खोज उन उद्योगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जो मजबूत और लचीली धातुओं पर निर्भर हैं, जिससे टिकाऊ और अधिक कुशल सामग्रियाँ विकसित की जा सकती हैं।