सन्दर्भ-
स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन, जो यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के सदस्य हैं, भारत के साथ एक द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर बातचीत कर रहे हैं। यह संधि मार्च 2024 में भारत और EFTA के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद चर्चा में आई है, जिसका लक्ष्य अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश करना है।
स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन भारत के साथ यह संधि क्यों चाहते हैं?
1. कर संबंधी समस्याएँ और नेस्ले मामला-
- दिसंबर 2024 में स्विट्जरलैंड ने 1994 के कर समझौते (DTAA) में बदलाव किया, जिससे स्विस कंपनियों को भारत में ज्यादा कर चुकाना पड़ा।
- नेस्ले जैसे स्विस ब्रांडों को भी ज्यादा कर देना पड़ा, जिससे स्विस निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
- इसलिए, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन चाहते हैं कि BIT के जरिए उनके निवेश को सुरक्षा मिले।
2. भारत द्वारा पुराने निवेश समझौतों को रद्द करना-
- भारत ने 1993 के बाद किए गए पुराने निवेश समझौतों को रद्द कर दिया, क्योंकि वह कई अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवादों में फंस गया था।
- पहले के समझौते विदेशी निवेशकों को ज्यादा अधिकार देते थे, जिससे भारत के लिए नुकसान की संभावना बढ़ जाती थी।
- नए निवेशकों की सुरक्षा के लिए स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन अब एक नए BIT की मांग कर रहे हैं।
3. भारत के नए निवेश नियम-
- 2016 में भारत ने एक नया BIT मॉडल बनाया, जिसमें विदेशी निवेशकों को पहले भारत में सभी कानूनी विकल्पों को आजमाने के बाद ही अंतरराष्ट्रीय अदालतों में जाने की अनुमति दी गई।
- पश्चिमी देशों को यह नियम बहुत सख्त लगा और उन्होंने भारत से ज्यादा निवेशक-अनुकूल नीतियाँ अपनाने का आग्रह किया।
भारत का नए BIT की ओर झुकाव-
- बजट में सुधार: सरकार ने अपनी नीतियों में विदेशी निवेशकों की चिंताओं को ध्यान में रखा है।
- नए समझौते: भारत ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ भी इसी तरह की निवेश संधि पर बातचीत कर रहा है।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सीख: भारत ने हाल ही में UAE के साथ BIT किया, जिसमें निवेशकों के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय शामिल थे।
स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ BIT से भारत को क्या लाभ होगा?
1. विदेशी निवेश बढ़ेगा-
- BIT से विदेशी निवेशकों को भरोसा मिलेगा, जिससे वे भारत में लंबी अवधि के लिए निवेश करेंगे।
- इससे फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और वित्तीय सेवाओं जैसे सेक्टर मजबूत होंगे।
2. अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानकों का पालन-
- भारत निवेश नियमों को अपडेट करके वैश्विक स्तर पर खुद को मजबूत बनाएगा।
- इससे भारत निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक स्थान बन जाएगा।
3. आर्थिक और रणनीतिक फायदे-
- एक मजबूत BIT, ‘मेक इन इंडिया’ और बुनियादी ढांचे के विकास को मदद करेगा।
- स्पष्ट और स्थिर नीतियाँ भारत को ज्यादा व्यापारिक सौदे और विदेशी भागीदार आकर्षित करने में मदद करेंगी।
निष्कर्ष-
स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ BIT, भारत की बदलती व्यापार और निवेश नीतियों में एक बड़ा कदम है। यह समझौता विदेशी निवेशकों को सुरक्षा देगा, जिससे वे भारत में ज्यादा निवेश करने के लिए प्रेरित होंगे।
अगर यह संधि सफल रही, तो यह भविष्य में अन्य देशों के साथ होने वाले निवेश समझौतों के लिए एक मॉडल बन सकती है। इससे भारत विदेशी निवेश के लिए ज्यादा विश्वसनीय और आकर्षक देश बन जाएगा, जिससे आर्थिक विकास और वैश्विक व्यापार में बढ़ोतरी होगी।