संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने टेपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल युक्त दवाओं के उत्पादन और निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इन दवाओं के अस्वीकृत संयोजन (unapproved combinations) पश्चिम अफ्रीकी देशों में निर्यात किए जा रहे थे। इस संबंध में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मुंबई स्थित एवियो फार्मास्यूटिकल्स का ऑडिट किया, जिसमें विनियामक उल्लंघन पाए गए। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने कंपनी के संचालन को तुरंत रोकने का निर्देश दिया।
टेपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल के विषय में:
- टेपेंटाडोल एक दर्द निवारक (एनाल्जेसिक) दवा है, जिसका उपयोग मध्यम से गंभीर दर्द के इलाज के लिए किया जाता है। यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में दर्द को महसूस करने के तरीके को बदल देता है। यह कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के गुणों से मेल खाता है और दुरुपयोग की संभावना के कारण इसे सख्त नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है।
- कैरीसोप्रोडोल का उपयोग मांसपेशियों की ऐंठन और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है, विशेषकर जब यह किसी मस्कुलोस्केलेटल समस्या (हड्डी-मांसपेशी से जुड़ी स्थिति) के कारण हो। इसे आमतौर पर आराम और शारीरिक उपचार के साथ लिया जाता है ताकि तेजी से सुधार हो सके।
- हालांकि, भारत में इन दोनों दवाओं को अलग-अलग उपयोग के लिए अनुमोदित किया गया है, लेकिन इनका संयोजन (Combination) अधिकृत नहीं है। इसके बावजूद, बिना मंजूरी के बनाए गए फॉर्मूलेशन निर्यात किए जा रहे थे, जिससे सुरक्षा, प्रभावकारिता और नियामक नियंत्रण को लेकर गंभीर चिंताएँ बढ़ गई थीं।
मुख्य चिंताएँ:
1. स्वास्थ्य जोखिम में वृद्धि :
इन दवाओं का निर्यात पश्चिम अफ्रीका क्षेत्र में ओपिओइड संकट (दवाओं का दुरुपयोग) को बढ़ा रहा था। बिना उचित निगरानी के, ये दवाएँ लत और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही थी।
2. विनियामक खामियाँ:
बिना मंजूरी के बनी दवाओं का अवैध निर्यात नियामक प्रणाली की कमजोरियों को दर्शाता है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के कड़े प्रावधानों के बावजूद, अनैतिक उत्पादन और निर्यात जारी था।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO):
● CDSCO भारत का राष्ट्रीय औषधि नियामक प्राधिकरण है, जो दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
● इसकी स्थापना औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत हुई थी।
● यह दवाओं के निर्माण, आयात और बिक्री को नियंत्रित करता है।
● इसके कार्यों में नई दवाओं की मंजूरी, नैदानिक परीक्षण, दवा मानकों की निगरानी और राज्य नियामक एजेंसियों के साथ समन्वय शामिल हैं।
● इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किया जाता हैं।
● यह देशभर में क्षेत्रीय कार्यालय, उप-कार्यालय, बंदरगाह कार्यालय और प्रयोगशालाएँ संचालित करता है।
आगे की राह:
भारत सरकार की कार्रवाई दवा के दुरुपयोग को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। तत्काल कार्रवाई - जिसमें उत्पादन रोकना, निर्यात को निलंबित करना और अस्वीकृत दवाओं को जब्त करना शामिल है - आगे के नुकसान को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
● उद्योग विशेषज्ञों ने प्रतिबंध का समर्थन किया है, इस बात पर जोर देते हुए कि यह संयोजन वैश्विक रूप से अस्वीकृत था और इसके निषेध से संभवतः अनैतिक दवा प्रथाओं पर रोक लगेगी।
● नियामक निगरानी को मजबूत करने के लिए, CDSCO ने निर्यात अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) चेकलिस्ट को अपडेट करने की सिफारिश की है, जिससे निर्यात से पहले भारत और आयात करने वाले दोनोंदेशों से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य हो जाता है।
नियमों को सख्त करके और अनुपालन बढ़ाकर, भारत एक जिम्मेदार वैश्विक दवा निर्यातक के रूप में अपनी भूमिका को सुदृढ़ कर रहा है।