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Blog / 28 Feb 2025

ऑटोमेटेड केमिकल एजेंट डिटेक्शन और अलार्म (ACADA) सिस्टम

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय सेना ने 223 स्वचालित रासायनिक एजेंट डिटेक्शन और अलार्म (ACADA) सिस्टम की खरीद के लिए मेसर्स एलएंडटी लिमिटेड के साथ 80.43 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अनुबंध इंडियन-आईडीडीएम (Indigenously Designed, Developed and Manufactured - IDDM) के तहत किया गया है, जोकि स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

     उल्लेखनीय है कि इस प्रणाली के 80% से अधिक घटक स्वदेशी रूप से निर्मित या स्रोत किए गए हैं, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

इंडियन-आईडीडीएम :

     यह श्रेणी यह सुनिश्चित करती है कि रक्षा खरीद भारतीय विक्रेताओं  से की जाए, जिसमें न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य रूप से शामिल हो। यह प्रावधान घरेलू रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

 स्वचालित रासायनिक एजेंट डिटेक्शन और अलार्म (ACADA ):

    स्वचालित रासायनिक एजेंट डिटेक्शन और अलार्म (ACADA) प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (DRDE), ग्वालियर द्वारा विकसित किया गया है। यह प्रणाली CBRN (Chemical, Biological, Radiological, and Nuclear) सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    ACADA प्रणाली लगातार वातावरण की हवा का नमूना लेकर रासायनिक युद्ध एजेंटों और विषाक्त औद्योगिक रसायनों  का त्वरित और सटीक पता लगाती है।

    यह प्रणाली आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (IMS) तकनीक पर आधारित है, जिसमें दो उच्च-संवेदनशीलता वाले IMS सेल का उपयोग किया जाता है, जिससे खतरनाक पदार्थों की निरंतर निगरानी और तत्काल पहचान संभव हो पाती है।

    यह अत्याधुनिक तकनीक भारतीय सेना की CBRN खतरों को पहचानने और उनका प्रभावी ढंग से मुकाबला करने की क्षमता को मजबूत करती है। इसका उपयोग केवल युद्धकालीन स्थितियों में बल्कि शांतिकालीन आपदा राहत अभियानों  के दौरान भी किया जा सकता है।

रासायनिक, जैविक,रेडियोलॉजिकल, और परमाणु (सीबीआरएन) हथियारों का खतरा:

गैर-राज्यीय तत्वों जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा सामूहिक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction - WMD) के अधिग्रहण और संभावित उपयोग से वैश्विक सुरक्षा के समक्ष गंभीर चुनौती उत्पन्न हो रही है। तकनीकी प्रगति तथा कानूनी और अवैध दोनों प्रकार के वाणिज्यिक चैनलों तक आसान पहुंच के कारण, CBRN सामग्री , जिनमें रसायन, जैविक विषाक्त पदार्थ और रेडियोधर्मी तत्व शामिल हैं। CBRN सामग्री पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो गई हैं। यह सामग्री साँस लेने , निगलने या त्वचा के संपर्क (Absorption) में आने से गंभीर शारीरिक क्षति, मृत्यु और दीर्घकालिक पर्यावरणीय संकट उत्पन्न कर सकते हैं।

CBRN हथियारों के ऐतिहासिक उदाहरण:

प्रथम विश्व युद्ध - बड़े पैमाने पर रासायनिक युद्ध

ईरान-इराक युद्ध - रासायनिक हथियारों का व्यापक उपयोग।

टोक्यो मेट्रो सरीन गैस हमला (1995) - रासायनिक आतंकवाद का एक घातक उदाहरण।

अमेरिका में एंथ्रेक्स पत्र कांड (2001) - एंथ्रेक्स बीजाणुओं का प्रयोग कर जैव आतंकवाद का प्रयास।

ये घटनाएं CBRN हथियारों के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाती हैं और यह स्पष्ट करती हैं कि प्रभावी पहचान , रोकथाम और प्रतिक्रिया  तंत्र विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

सीबीआरएन खतरों के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय प्रयास:

वैश्विक समुदाय ने CBRN आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए विभिन्न बहुपक्षीय कानूनी तंत्र  स्थापित किए हैं। आतंकवाद विरोधी 19 प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में से 7 समझौते विशेष रूप से CBRN खतरों को संबोधित करते हैं। इन प्रमुख समझौतों में शामिल हैं:

परमाणु सामग्री संरक्षण

आतंकवादी बम विस्फोटों का दमन

परमाणु आतंकवाद के कृत्यों की रोकथाम

इन समझौतों का उद्देश्य राज्य और गैर-राज्य अभिनेताओं द्वारा सीबीआरएन सामग्रियों के प्रसार और दुरुपयोग को सीमित करना है।

निष्कर्ष:

भारतीय सेना द्वारा ACADA प्रणाली का अधिग्रहण रासायनिक युद्ध  और CBRN आतंकवाद के बढ़ते खतरों से निपटने में भारत की रक्षा तैयारियों  को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अत्याधुनिक प्रणाली के माध्यम से उन्नत पहचान क्षमताएं सुनिश्चित की जा सकेंगी, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी।