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Blog / 30 Jan 2025

ASER रिपोर्ट 2024

सन्दर्भ : हाल ही में वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ASER) 2024, जिसे एनजीओ प्रथम द्वारा जारी किया गया, भारत के ग्रामीण शिक्षा परिदृश्य को उजागर करती है। यह रिपोर्ट कोविड-19 के कारण हुई शिक्षा की हानि से उबरने की मिश्रित प्रवृत्तियों को प्रदर्शित करती है। सर्वेक्षण में 6.5 लाख बच्चों को शामिल किया गया, जिसमें बुनियादी पढ़ने और गणितीय कौशल में सुधार देखा गया, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं।

मुख्य निष्कर्ष:

पढ़ने की क्षमता

ASER 2024 के नतीजों से पता चलता है कि कोविड-19 महामारी के दौरान देखे गए शिक्षण स्तरों की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी बुनियादी पढ़ने के कौशल में पिछड़े हुए हैं।

  • कक्षा 3 के छात्र: 76% छात्र अपनी स्थानीय भाषा में कक्षा 2 स्तर का पाठ नहीं पढ़ सके। 2018 में, 20.9% छात्र कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम थे, लेकिन यह आंकड़ा 2022 में घटकर 16.3% रह गया था। 2024 में, यह थोड़ा सुधार होकर 23.4% हो गया, फिर भी अधिकांश कक्षा 3 के छात्र बुनियादी पढ़ाई में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
  • कक्षा 5 के छात्र: 55.2% छात्र  कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ने में असमर्थ थे। 2018 में, 44.2% छात्र इसे पढ़ सकते थे, जबकि 2024 में यह मामूली सुधार के साथ 44.8% तक पहुंचा।
  • कक्षा 8 के छात्र: 32.5% छात्र कक्षा 2 स्तर के पाठ को पढ़ने में असमर्थ थे, जो यह दर्शाता है कि उच्च कक्षाओं के छात्रों में भी बुनियादी पढ़ने की क्षमता की कमी बनी हुई है।

गणितीय कौशल :

ASER 2024 सर्वेक्षण में बुनियादी गणितीय कौशल की भी जांच की गई, जिसमें कुछ क्षेत्रों में सुधार देखा गया, लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

  • कक्षा 3 के छात्र: 66% छात्र साधारण घटाव (subtraction) हल करने में असमर्थ थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि बुनियादी अंकगणितीय कौशल में अभी भी कठिनाइयाँ बनी हुई हैं।
  • कक्षा 5 के छात्र: विभाजन (division) हल करने में कुछ सुधार हुआ, लेकिन फिर भी 69.3% छात्र इसे सही ढंग से हल नहीं कर सके। 2018 में, 27.9% छात्र इसे हल कर सकते थे, जो 2024 में बढ़कर 30.7% हुआ।
  • कक्षा 8 के छात्र: बुनियादी अंकगणित में सुधार मामूली रहा, 2018 में 44.1% छात्र बुनियादी गणितीय समस्याएँ हल कर सकते थे, जो 2024 में बढ़कर 45.8% हुआ।

क्षेत्रीय स्तर पर प्रदर्शन में अंतर:

सर्वेक्षण में साक्षरता और गणितीय कौशल में सुधार के स्तर में क्षेत्रीय भिन्नताएँ भी पाई गईं, जहाँ कुछ राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की, जबकि अन्य अभी भी पीछे हैं।

  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य: गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, सिक्किम और मिजोरम ने कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ने की क्षमता में 10% से अधिक सुधार दर्ज किया। यह संकेत देता है कि इन राज्यों ने बुनियादी शिक्षा परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया है।
  • मध्यम सुधार: ओडिशा, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में 6% से 9.9% तक सुधार हुआ, जो प्रगति को दर्शाता है लेकिन शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों की तुलना में कम है।
  • अल्प सुधार: हिमाचल प्रदेश और बिहार में सुधार 4% से 5.9% के बीच रहा, जो अपेक्षाकृत धीमी प्रगति को दर्शाता है।

विद्यालय तत्परता कार्यक्रमों का प्रभाव :

ASER 2024 रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों में चलाए जा रहे स्कूल तत्परता कार्यक्रमों की सफलता को भी उजागर किया गया है। 75% से अधिक सरकारी स्कूलों ने पहली कक्षा में आने वाले बच्चों के लिए तीन महीने का स्कूल तत्परता कार्यक्रम लागू किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छोटे बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करना था, जिससे बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल (FLN - Foundational Literacy and Numeracy) में सुधार हुआ है। ये कार्यक्रम बुनियादी शिक्षण कौशल की पुनःप्राप्ति में एक महत्वपूर्ण कारक माने जा रहे हैं।

किशोरों में डिजिटल साक्षरता:

रिपोर्ट में 14-16 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों की डिजिटल साक्षरता पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें स्मार्टफोन उपयोग और ऑनलाइन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

  • स्मार्टफोन की पहुँच: 89% किशोरों के पास घर में स्मार्टफोन उपलब्ध था, जबकि 31.4% किशोरों के पास उनका व्यक्तिगत फोन था।
  • शैक्षिक उपयोग: स्मार्टफोन उपयोग करने वाले किशोरों में से 57% ने इसे शिक्षा से जुड़े उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया, जिससे डिजिटल उपकरणों की बढ़ती भूमिका का संकेत मिलता है।
  • सोशल मीडिया उपयोग: 76% किशोरों ने सोशल मीडिया ब्राउज़िंग के लिए स्मार्टफोन का उपयोग किया, जिससे शिक्षा और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता उजागर हुई।
  • डिजिटल कौशल: किशोरों में डिजिटल साक्षरता का स्तर उच्च पाया गया
    • 92.1% किशोर व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर वीडियो साझा कर सकते थे।
    • 79.3% इंटरनेट पर जानकारी खोज सकते थे।
    • 76.9% अलार्म सेट करने में सक्षम थे।
    • हालाँकि, लैंगिक भिन्नताएँ स्पष्ट रहींलड़कों को फोन सुरक्षा सुविधाओं, जैसे प्रोफाइल ब्लॉक/रिपोर्ट करने और पासवर्ड बदलने की अधिक समझ थी।