संदर्भ: हाल ही में एआई एक्शन समिट 10-11 फरवरी 2025 को पेरिस में संपन्न हुआ। इसमें भारत, चीन और यूरोपीय आयोग सहित 50 से अधिक देशों ने "समावेशी और सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) लोगों और पर्यावरण के लिए" नामक एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। हालाँकि, अमेरिका और ब्रिटेन ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।
समिट के मुख्य परिणाम:
- पर्यावरण-अनुकूल एआई गठबंधन:
- इसे फ्रांस ने UNEP और ITU के सहयोग से शुरू किया।
- इसका उद्देश्य एआई को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
- भारत इस गठबंधन का संस्थापक सदस्य है।
- मौजूदा एआई पहल:
- यह वैश्विक जनहित साझेदारी है, जो डेटा की पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देती है।
- इसका लक्ष्य अगले 5 वर्षों में $2.5 बिलियन जुटाना है।
- भारत इस पहल का साझेदार है।
- पेरिस चार्टर फॉर जनरल इंटरेस्ट एआई:
- एआई में खुलेपन, पारदर्शिता और भागीदारी के सिद्धांतों को स्थापित करता है।
- भारत ने इस चार्टर को अपनाया है।
- पेरिस घोषणा पत्र (AI-युक्त हथियार प्रणालियों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए):
- इसका उद्देश्य युद्ध में एआई के इस्तेमाल को नियंत्रित करना है।
- भारत ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
पेरिस संयुक्त बयान: समावेशी और सतत एआई
यह बयान सभी के लिए सुलभ, नैतिक और भरोसेमंद एआई को बढ़ावा देने का आह्वान करता है, ताकि यह समाज के लिए लाभकारी हो। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
· विकासशील देशों को एआई तकनीक में आगे बढ़ने में मदद करना।
· बड़े कॉर्पोरेट एकाधिकार को रोकते हुए नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देना।
· नौकरियों और श्रम बाजार पर एआई के प्रभाव को संतुलित करना।
· यह ब्लेचली घोषणा (2023) से अलग है, जो मुख्य रूप से एआई सुरक्षा पर केंद्रित थी।
समिट के प्रमुख विषय:
- जनहित के लिए एआई – एआई को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ के लिए उपयोग करना।
- भविष्य की नौकरियां – नौकरी छूटने की समस्या को कम करना और समावेशी नीतियां बनाना।
- इनोवेशन और संस्कृति – एआई के विकास और रचनात्मक उद्योगों की सुरक्षा में संतुलन बनाना।
- एआई में विश्वास – पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही को बढ़ाना।
- वैश्विक एआई शासन – एआई नियमन के लिए एक समावेशी अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना।
एआई क्या है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मशीनों को सीखने, तर्क करने और इंसानों जैसे कार्य करने में सक्षम बनाती है। इसमें शामिल हैं:
- मशीन लर्निंग (ML): डेटा से सीखकर निर्णय लेने में सुधार करना।
- डीप लर्निंग: मानव मस्तिष्क की तरह काम करने वाले न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करना।
- नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): एआई की इंसानी भाषा को समझने और जवाब देने की क्षमता, जैसे सिरी और एलेक्सा।
एआई की ऊर्जा खपत:
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, एआई को संचालित करने वाले डेटा सेंटर वैश्विक बिजली का 1-2% उपयोग कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह खपत और बढ़ने की संभावना है।
एआई एक्शन समिट का क्रम:
- 2023 – ब्रिटेन: ब्लेचली घोषणा (एआई सुरक्षा पर केंद्रित)।
- 2024 – दक्षिण कोरिया: एआई नीति और शासन।
- 2025 – फ्रांस (भारत सह-अध्यक्ष): एआई सुरक्षा, नवाचार, शासन और भविष्य की नौकरियों पर ध्यान केंद्रित।
निष्कर्ष:
पेरिस समिट ने भारत की वैश्विक एआई नीति में अग्रणी भूमिका को मजबूत किया है और समावेशी, नैतिक और सतत एआई को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।