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Daily-current-affairs / 24 Mar 2025

भारत के एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाना : विकास, बजटीय सुधार और भविष्य की संभावनाएं

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सन्दर्भ:

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार स्तंभ है, जो रोजगार सृजन, विनिर्माण और निर्यात में अहम भूमिका निभाता है। देश में 5.93 करोड़ पंजीकृत MSME हैं, जो 25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं और भारत के औद्योगिक विकास को गति दे रहे हैं। 2023-24 में, MSME का भारत के कुल निर्यात में 45.73% का योगदान रहा, जिससे यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति की रीढ़ बन गया है। यह क्षेत्र केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने में भी सहायक है।

इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025-26 में ऋण सुविधा बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और क्षेत्र-विशिष्ट उद्योगों को सशक्त बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की गई है। इन उपायों का उद्देश्य MSME को सुलभ वित्तीय साधनों से लैस करना, उद्यमशीलता को बढ़ावा देना और भारत की विनिर्माण एवं निर्यात क्षमताओं को मजबूत करना है।

एमएसएमई और भारत की आर्थिक वृद्धि में उनकी भूमिका:

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र भारत की आर्थिक विकास प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य करता है।

  • रोजगार सृजन: कृषि के बाद, एमएसएमई भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। यह शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लाखों लोगों की आजीविका सुनिश्चित करता है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • विनिर्माण उत्पादन: भारत के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 2020-21 में 27.3% से बढ़कर 2022-23 में 30.1% हो गई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत देता है कि एमएसएमई भारतीय औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक अभिन्न अंग बन चुका है।
  • निर्यात वृद्धि: एमएसएमई निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। 2020-21 में इस क्षेत्र से निर्यात 3.95 लाख करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर 12.39 लाख करोड़ तक पहुंच गया। कुल निर्यात में एमएसएमई का योगदान मई 2024 तक 45.79% तक बढ़ गया है, जो वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।

ये रुझान एमएसएमई की लचीलापन और भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं

केंद्रीय बजट 2025-26 में एमएसएमई के लिए प्रमुख उपाय:

केंद्रीय बजट 2025-26 में एमएसएमई को सशक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक सुधार प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें वित्तीय सहायता, क्षेत्र-विशिष्ट पहल और नीतिगत संवर्द्धन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

1. संशोधित वर्गीकरण मानदंड:

·        एमएसएमई का परिचालन बढ़ाने तथा बेहतर वित्तीय संसाधनों तक पहुंच प्रदान करने के लिए, एमएसएमई वर्गीकरण की निवेश और कारोबार की सीमाएं क्रमशः 2.5 गुना और 2 गुना बढ़ा दी गई हैं।

·        इस समायोजन से अधिक दक्षता, उन्नत प्रौद्योगिकी को अपनाने तथा रोजगार सृजन में वृद्धि होने की उम्मीद है।

2. बढ़ी हुई ऋण उपलब्धता:

बजट में ऋण प्रवाह में सुधार के लिए वित्तीय सहायता उपाय प्रस्तुत किए गए हैं:

·        सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी कवर को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे पांच वर्षों में 1.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध हो सकेगा।

·        स्टार्टअप्स को गारंटी कवर को 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ करने से लाभ होगा और 27 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ऋण ब्याज दर में 1% की कमी की गई है।

·        निर्यातक एमएसएमई को 20 करोड़ रुपये तक के सावधि ऋण की सुविधा मिलेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

3. सूक्ष्म उद्यमों के लिए क्रेडिट कार्ड:

·        उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों को 5 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया जाएगा।

·        पहले वर्ष में 10 लाख क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे छोटे व्यवसायों को कार्यशील पूंजी तक आसान पहुंच मिलेगी।

4. स्टार्टअप और पहली बार उद्यम करने वालों के लिए समर्थन:

·        स्टार्टअप्स को समर्थन और विस्तार देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स स्थापित किया जाएगा।

·        एक नई योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए अगले पांच वर्षों में 5 लाख उद्यमियों को ₹2 करोड़ तक का सावधि ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

इन पहलों का उद्देश्य समावेशी उद्यमशीलता को बढ़ावा देना तथा वंचित समूहों के लिए बेहतर वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करना है।

 

 

केंद्रीय बजट 2025-26 में अपने बजट भाषण के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई के लिए नए वर्गीकरण मानदंडों की घोषणा की थी, जिसमें वर्गीकरण के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमा को क्रमशः 2.5 गुना और दो गुना बढ़ाने का प्रस्ताव था। सरकार ने एमएसएमई को वर्गीकृत करने के लिए टर्नओवर और निवेश मानदंडों में महत्वपूर्ण संशोधनों को अधिसूचित किया है, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे।

  • 2.5 करोड़ रुपये तक के निवेश वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अब 1 करोड़ रुपये की पिछली सीमा से हटाकर सूक्ष्म उद्यमों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। टर्नओवर की सीमा को 5 करोड़ रुपये से संशोधित कर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • 25 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयों को छोटे उद्यमों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, जो पहले 10 करोड़ रुपये थी। ऐसे उद्यमों के लिए टर्नओवर की सीमा को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • 125 करोड़ रुपये तक के निवेश वाले एमएसएमई को अब 50 करोड़ रुपये की पिछली सीमा से बढ़ाकर मध्यम उद्यमों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। मध्यम उद्यमों के लिए टर्नओवर की सीमा दोगुनी कर 500 करोड़ रुपए कर दी गई है।

 

 

एमएसएमई के लिए क्षेत्र-विशिष्ट समर्थन:

श्रम -प्रधान क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना:

श्रम-प्रधान उद्योगों की क्षमता को पहचानते हुए, सरकार निम्नलिखित कार्य कर रही है:

  • फुटवियर और चमड़ा क्षेत्र के लिए फोकस उत्पाद योजना लागू की गई है, जिसका उद्देश्य डिज़ाइन, घटक विनिर्माण और गैर-चमड़े के फुटवियर उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस पहल से

·         4 लाख करोड़ का कारोबार उत्पन्न होने की संभावना है।

·         22 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

  • खिलौना उद्योग के लिए एक नई योजना शुरू की गई है, जिसका लक्ष्य भारत को खिलौना निर्माण में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है। यह योजना क्लस्टर विकास और कौशल निर्माण को प्रोत्साहित करेगी।

 विनिर्माण और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पहल को मजबूत करना:

  • राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के माध्यम से  लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों को समर्थन देने के लिए एक व्यापक नीतिगत रोडमैप प्रदान किया जाएगा।
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकी विनिर्माण पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा , जिसमें निम्नलिखित को लक्षित समर्थन दिया जाएगा:
    • सौर पी.वी. सेल .
    • इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियां .
    • पवन वाली टर्बाइन
    • उच्च वोल्टेज संचरण उपकरण .

इस पहल का उद्देश्य सतत औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू विनिर्माण क्षमताएं मजबूत होंगी।

एमएसएमई के लिए सरकारी पहल:

औपचारिकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई पहल शुरू की हैं:

1. पीएम विश्वकर्मा:

·        इस योजना के माध्यम से कारीगरों और शिल्पकारों की उत्पादकता और बाजार पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया हैं।

·        2023-24 से 2027-28 तक 13,000 करोड़ का आवंटन किए हैं।

·        2.65 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 27.13 लाख सफलतापूर्वक पंजीकृत हुए।

2. उद्यम पंजीकरण पोर्टल:

·        एमएसएमई पंजीकरण को सुव्यवस्थित करने के लिए  इसे 2020 में लॉन्च किया गया।

·        पोर्टल पर 5.93 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत है।

3. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)

  • सूक्ष्म उद्यमों के लिए ऋण-लिंक्ड सब्सिडी प्रदान करता है।
  • 2023-24 में , पीएमईजीपी:
    • 89,118 उद्यमों को सुविधा प्रदान की गई
    • 3,093.87 करोड़ की सब्सिडी वितरित की गई।
    • 7,12,944 नौकरियाँ सृजित हुईं

4. पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए कोष योजना (SFURTI)

·        पारंपरिक  कारीगर समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है।

·        अब तक 513 क्लस्टर स्वीकृत, जिससे 2,20,800 नौकरियां उत्पन्न होने की संभावना है।

5. एमएसई के लिए सार्वजनिक खरीद नीति:

  • यह केंद्र सरकार की कुल खरीद का 25% एमएसएमई से करने का लक्ष्य।
  • 2023-24 में 2,58,413 एमएसएमई से ₹74,717 करोड़ मूल्य की खरीद की गई।

निष्कर्ष::

केंद्रीय बजट 2025-26 एमएसएमई के लिए एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिसमें ऋण सुविधा, उद्यमिता और क्षेत्र-विशिष्ट पहलों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार वित्तीय सहायता में वृद्धि, विनिर्माण को प्रोत्साहन और वैश्विक व्यापार भागीदारी को सुदृढ़ करके यह सुनिश्चित कर रही है कि एमएसएमई भारत के आर्थिक परिवर्तन में प्रमुख भूमिका निभाते रहें।

निरंतर नीतिगत समर्थन और लक्षित पहलों के साथ, एमएसएमई केवल घरेलू उद्योगों को सशक्त बनाएंगे, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने में योगदान मिलेगा।

मुख्य प्रश्न: भारत के आर्थिक विकास में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के महत्व का विश्लेषण करें। उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें और इन चुनौतियों से निपटने में सरकारी पहलों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।