सन्दर्भ :
हाल ही में राज्यसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य एवं संसदीय कार्य मंत्री, श्री किरण रिजिजू ने भारत सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इन पहलों का उद्देश्य छह मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक समुदायों—मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी—को शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं तक समान पहुंच दिलाना है। सरकार ने 15-सूत्री कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यकों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इस कार्यक्रम के जरिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को आपस में जोड़ा गया है, ताकि हाशिए पर मौजूद समुदायों को अधिक लाभ मिल सके।
15-सूत्री कार्यक्रम का उद्देश्य चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अल्पसंख्यकों के लिए अवसरों को बढ़ाना है :
· शिक्षा
· रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण
· बुनियादी ढांचे का विकास
· सांप्रदायिक वैमनस्य की रोकथाम .
इस ढांचे के तहत, संबंधित मंत्रालयों द्वारा संचालित योजनाओं के परिव्यय (बजट आवंटन) का 15% अधिसूचित अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए निर्धारित किया जाता है। यह पहल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि भारत की कुल जनसंख्या का 19.3% हिस्सा रखने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को समान विकास सुनिश्चित करने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। इसके तहत, सरकार ने 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों, 710 ब्लॉकों और 66 कस्बों की पहचान की है, जहां विकासात्मक असमानताओं को दूर करने के लिए संसाधनों का रणनीतिक रूप से उपयोग किया जा रहा है।
अल्पसंख्यक कल्याण के लिए संस्थागत तंत्र :
अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए, 29 जनवरी 2006 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से अलग करके अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) की स्थापना की गई। इसका प्रमुख दायित्व अल्पसंख्यकों से संबंधित नीतियों का निर्माण, योजनाओं का कार्यान्वयन एवं कार्यक्रमों का मूल्यांकन करना है।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करना है। प्रारंभ में पाँच समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था, बाद में 2014 में जैन समुदाय को भी इसमें शामिल किया गया। NCM के साथ-साथ, राज्य अल्पसंख्यक आयोग भी राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक हितों की रक्षा एवं संवर्धन के लिए कार्यरत हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण संस्थागत निकाय केंद्रीय वक्फ परिषद (CWC) है, जिसकी स्थापना वक्फ अधिनियम, 1995 (2013 में संशोधित) के तहत वक्फ संपत्तियों की निगरानी और उनके प्रभावी प्रशासन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। सरकार CWC के माध्यम से दो प्रमुख योजनाओं का भी क्रियान्वयन करती है :
1. कौमी वक्फ बोर्ड तरक्की योजना (QWBTS): यह योजना राज्य वक्फ बोर्डों के प्रबंधन को सुधारने और उनके आधुनिकीकरण तथा डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इस पहल के अंतर्गत, 2019-20 से 2023-24 तक 23.87 करोड़ की राशि आवंटित की गई है।
2. शहरी वक्फ सम्पत्ति विकास योजना (एसडब्ल्यूएसवीवाई): यह एक पहल है जो वक्फ संपत्तियों के वाणिज्यिक विकास के लिए वक्फ बोर्डों को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करती है। इसी अवधि के दौरान, इस योजना पर 7.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इन प्रयासों के अतिरिक्त, दरगाह ख्वाजा साहेब, अजमेर, एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो ख्वाजा साहेब अधिनियम, 1955 के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा प्रशासित है। दरगाह समिति धर्मार्थ गतिविधियों की सुविधा प्रदान करती है, जिनमें लंगर (मुफ्त सामुदायिक भोजन), चिकित्सा सहायता, विधवाओं और निराश्रित महिलाओं के लिए वजीफा, ज़कात सेवाएँ और शैक्षिक सहायता शामिल हैं। ये पहल सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी उजागर करती हैं।
अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण माध्यम :
2011 की जनगणना के अनुसार , कुछ अल्पसंख्यक समुदायों - ईसाई, जैन, सिख और बौद्ध - की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत 72.98% से अधिक है , जबकि मुसलमानों की साक्षरता दर 68.54% है । शैक्षिक अंतर को पाटने के लिए, सरकार ने कई छात्रवृत्ति योजनाएँ शुरू की हैं :
- प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना: यह योजना कक्षा IX से X तक अल्पसंख्यक छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें 30% छात्रवृत्ति लड़कियों के लिए आरक्षित है। 2008-09 और 2022-23 के बीच, 710.94 लाख छात्रों को 12,250.44 करोड़ आवंटित किए गए।
- पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना: यह योजना कक्षा ग्यारहवीं से पीएचडी तक के छात्रों को सहायता प्रदान करती है, जिसमें लड़कियों के लिए 30% आवंटन है। सरकार ने 2008-09 से 2022-23 तक 92.39 लाख छात्रों के लिए 5,171.52 करोड़ मंजूर किए।
हालाँकि, समग्र सशक्तिकरण के लिए केवल शिक्षा पर्याप्त नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं के साथ कौशल विकास कार्यक्रमों को भी एकीकृत किया है।
अल्पसंख्यकों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और कौशल विकास:
अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तीकरण के लिए आर्थिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। पीएम विकास योजना पांच पूर्व योजनाओं—सीखो और कमाओ, नई मंज़िल, उस्ताद, नई रोशनी और हमारी धरोहर—को एकीकृत करके कौशल विकास और उद्यमिता पर केंद्रित है। कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
- उस्ताद स्किल्स डेवलपमेंट ट्रेनिंग कार्यक्रम (यूएसटीटीएडी) : इसके अंतर्गत 21,604 लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया और 41 हुनर हाटों का आयोजन 288.68 करोड़ रुपये की लागत से किया गया ।
- नई मंज़िल योजना: 98,709 व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया गया तथा इस पहल पर 456.19 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
- सीखो और कमाओ योजना : 1,744.35 करोड़ की लागत से 4.68 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) अल्पसंख्यक उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 30 सितंबर 1994 को अपनी स्थापना के बाद से, एनएमडीएफसी ने माइक्रोक्रेडिट कार्यक्रमों और सावधि ऋणों के माध्यम से 23,85,809 लाभार्थियों को 8,771.88 करोड़ वितरित किए हैं।
बुनियादी ढांचा विकास: प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके)
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके), जिसे मई 2018 में लॉन्च किया गया, एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य 1,300 चिन्हित अल्पसंख्यक-केंद्रित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का सुधार करना है। 15वें वित्त आयोग के तहत, यह योजना शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार तक पहुँच में सुधार के लिए देशभर में विस्तारित की गई है।
अल्पसंख्यक विरासत और संस्कृति का संरक्षण:
विविधता के संरक्षण के लिए सांस्कृतिक पहचान आवश्यक है। सरकार की पहलों में शामिल हैं:
- जियो पारसी योजना (2013-14): घटती पारसी जनसंख्या को रोकने के लिए शुरू की गई इस योजना के तहत, 26.78 करोड़ रुपये के व्यय के साथ चिकित्सा, वित्तीय और आउटरीच सहायता के माध्यम से 414 बच्चों के जन्म में सहायता की गई।
- पाली भाषा की शास्त्रीय स्थिति (2024): पाली को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने का उद्देश्य पाली भाषा के अध्ययन को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से बौद्ध विरासत अनुसंधान में।।
- अंतर्राष्ट्रीय अभिधम्म दिवस (2024): बौद्ध दार्शनिक परंपराओं का सम्मान करने के लिए 17 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।
अल्पसंख्यकों के लिए न्यायिक और संवैधानिक सुरक्षा:
बहुलवाद और सामाजिक न्याय को बनाए रखने के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार भारतीय संविधान में अंतर्निहित हैं। प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं
· अनुच्छेद 29 और 30: सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करना।
· अनुच्छेद 350 ए और बी: मातृभाषा में शिक्षा अनिवार्य करना तथा भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी की स्थापना करना।
टीएमए पाई फाउंडेशन केस (2002) जैसी न्यायिक व्याख्याएँ पुष्टि करती हैं कि अल्पसंख्यक का दर्जा राज्य स्तर पर निर्धारित किया जाना चाहिए, इससे अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित होती है।
सच्चर समिति की रिपोर्ट (2006):
2005 में गठित सच्चर समिति ने भारत में मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की । इसमें निम्नलिखित सिफारिशें शामिल थीं:
- समान अवसर आयोग की स्थापना करना।
- मदरसा शिक्षा को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना ।
- सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक संस्थाओं में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व में सुधार करना।
निष्कर्ष:
सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम शिक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक विकास के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं । संसाधनों और अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित करके, ये पहल भारत के समावेशी विकास और न्यायसंगत विकास के व्यापक लक्ष्य में योगदान करती हैं । 15-सूत्री कार्यक्रम, पीएमजेवीके, पीएम विकास और एनएमडीएफसी योजनाएँ सामूहिक रूप से एक अधिक एकीकृत और आत्मनिर्भर अल्पसंख्यक आबादी को बढ़ावा देती हैं , जिससे भारत का लोकतांत्रिक और बहुसांस्कृतिक ताना-बाना मजबूत होता है।
मुख्य प्रश्न: |