(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (29 जून 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (29 जून 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

MCI की जगह NMC से होगा मेडिकल शिक्षा में सुधार

  • मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) संशोधन विधेयक को नए सिरे से लोकसभा में पेश किये जाने के बाद एमसीआई के पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है। विधेयक के संसद से पारित होने के बाद देश में मेडिकल शिक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए एमसीआई की जगह राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एमएनसी) के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा।
  • यह विधेयक पिछले साल दिसंबर में लोकसभा से पास हो चुका है, लेकिन राज्यसभा से पास नहीं होने के कारण निरस्त हो गया था। सरकार पहले ही एमसीआई को भंग कर चुकी है और उसका कामकाज 12 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) देख रहा है।
  • 1956 से देश में मेडिकल शिक्षा की निगरानी करने वाले एमसीआई में फैले भ्रष्टाचार, उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और अदालत के आदेशों के खुलेआम उल्लंघन को देखते हुए सरकार ने पिछले साल सितंबर में एमसीआई को भंग कर दिया था और उसके कामकाज को देखने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन कर दिया था। इसके साथ ही संसद की स्थायी समिति के सुझाए संशोधनों के अनुरूप एक नया संशोधन विधेयक संसद से पास कराने का फैसला किया था।
  • राज्यसभा में संशोधन विधेयक के अटक जाने के बाद सरकार को इस साल जनवरी में दोबारा बीओजी के लिए अध्यादेश जारी करना पड़ा था। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उम्मीद जताई कि लोकसभा में भारी बहुमत और राज्यसभा में पिछली बार की तुलना में सत्तापक्ष में अधिक सदस्यों को देखते हुए एमसीआई संशोधन विधेयक पास हो जाएगा। उनके अनुसार एमसीआई देश में मेडिकल शिक्षा के विकास और विस्तार के रास्ते में सबसे बड़ा रूकावट बन गया था।
  • एमसीआई की कार्यशैली से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में उसके कामकाज की निगरानी के लिए 6 सदस्यीय कमेटी का गठन का फैसला सुनाया था। लेकिन इसके बाद भी एमसीआई पर कोई फर्क नहीं पड़ा और निगरानी समिति के सुझावों को उसने कोई तवज्जो नहीं दी। आखिरकार निगरानी समिति के सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया था। आखिरकार सरकार को बीओजी का गठन करना पड़ा था।
  • वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एमसीआई के भंग किये जाने के बाद मेडिकल शिक्षा में सुधार का रास्ता साफ हुआ है। पहली बार एक साल में ढाई हजार से ज्यादा एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई जा सकी हैं। यही नहीं, सरकार ने 75 जिलों में नए मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा की है। सरकार की कोशिश देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी को दूर करना है ताकि लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकें।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

G20 summit: भ्रष्टाचार और भगोड़े आर्थिक अपराधी के मुद्दे को ओसाका घोषणापत्र में शामिल कराना चाहता है

  • भारत जापान में आयोजित जी-20 सम्मेलन के घोषणापत्र में भ्रष्टाचार और भगोड़े आर्थिक अपराधी के मुद्दे को ओसाका घोषणापत्र में शामिल कराना चाहता है। इसके साथ ही भारत साल 2022 में जी-20 की अध्यक्षता पर भी नजर बनाए हुए है। ओसाका के बाद भारत उस तिकड़ी का हिस्सा होगा जो जी-20 के अगले चरण की अध्यक्षता करेंगे।
  • इनमें सऊदी अरब 2020, इटली 2021 और भारत 2022 में जी-20 की अध्यक्षता करेंगे। ओसाका सम्मेलन में भ्रष्टाचार को शामिल किए जाने पर के साथ विचार-विमर्श जारी है। भारत के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि हमने भगोड़े आर्थिक अपराधी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। इसके लिए जापान के साथ ही जी-20 के अन्य देशों से बातचीत की जा रही है।
  • भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पहले भी भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठा चुके हैं। भारत ने अर्जेंटीना में पिछली बार आयोजित जी-20 सम्मेलन में नौ-सूत्रीय एजेंडा पेश किया था। इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात शामिल थी। मुंबई स्थित थिंक टैंक गेटवे हाउस के सीईओ और रिसर्च डायरेक्टर एवं सीनियर जियोइकोनोमिक्स फेलो अक्षय माथुर ने कहा, ‘भारत पहले ही काले धन पर अंकुश लगाने के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाने, आतंकवाद को धन मुहैया कराने और भगोड़े आर्थिक अपराधियों को वापिस करने पर अपने मत को घोषित कर चुका है।
  • पश्चिमी मीडिया में इन मुद्दों को ज्यादा तरजीह नहीं दी गई। हालांकि, वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा भारत की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।’ टोक्यो स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर मॉनिटरी अफेयर्स के अध्यक्ष के मुख्य सलाहकार काजुनारी कुडो का कहना है कि यदि आप इस महीने के शुरू में जारी जी20 फाइनेंस ट्रैक क्मयूनिक को देखेंगे तो इसमें साफ तौर पर आतंकवाद को धन मुहैया कराने, मनी लॉन्ड्रिंग से लड़ने और बचाव का विस्तार से जिक्र किया गया है।

भारत अमेरिका ट्रेड वॉर

जी-20 के शिखर सम्मेलन से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी उत्पादों पर भारत के आयात शुल्क वृद्धि पर कड़ा ट्वीट किया। लिखा, ‘अमेरिकी उत्पादों पर भारत की आयात शुल्क में वृद्धि अस्वीकार्य है, भारत इसे वापस ले।’ ट्रंप का यह बयान तब आया, जब भारत ने 28 अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला लिया। गत वर्ष अक्टूबर में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों को दी गई छूट खत्म किए जाने का भारत का यह जबाव था। इस जवाबी कार्रवाई से बौखलाए ट्रंप ने भारत को ‘टैरिफ किंग’ तक की संज्ञा दे दी। हालांकि भारत ने पहले ही कह दिया कि वह किसी दबाव में आने वाला नहीं है। शुल्क वृद्धि पर ट्रंप के हालिया रुख और इसकी हकीकत पर पेश है एक नजर:

जापान-कोरिया से बहुत कम है भारत का शुल्क

  • अमेरिका भले ही भारत पर आरोप लगा रहा है कि भारत शुल्क दरों में ज्यादा वृद्धि कर रहा है जबकि हकीकत कुछ और है। उदाहरण के तौर पर अगर अल्कोहल की ही बात करें तो भारत 150 फीसद आयात शुल्क लेता है जबकि जापान 736 फीसद, दक्षिण कोरिया 850 जबकि खुद अमेरिका 350 फीसद तक शुल्क वसूलता है।
  • भारत ने तो यह स्पष्ट भी किया है कि विश्व व्यापार संगठन के मानकों से भी कम आयात शुल्क वसूला जा रहा है है।

मात्रा के मामले में और कम है शुल्क

  • औसत शुल्क दरों के मामले में अमेरिका और चीन जैसी मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों की तुलना में भारत की दर 13.8 फीसद है, जो कि ज्यादा है। चीन की 9.8 फीसद जबकि अमेरिका की 3.4 फीसद है। लेकिन अगर व्यापार किए गए वस्तुओं की मात्रा को मानक मानकर देखा जाए तो भारत की शुल्क दर 7.6 फीसद तक गिर जाती है जो कि ब्राजील के 10.3 और दक्षिण कोरिया के 9 फीसद से काफी कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार

  • जानकारों का मानना है कि बढ़े हुए आयात शुल्क से अमेरिका को ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है। उनके लिए इससे ज्यादा यह बात मायने रखती है कि भारत अमेरिका से जितना आयात करता है, निर्यात की हिस्सेदारी उससे ज्यादा है। 2018 में दोनों देशों के बीच 142.1 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार था जिसमें भारत की हिस्सेदारी 24.2 अरब डॉलर अधिक की थी। यानी अमेरिका भारत से व्यापारिक रिश्तों में अपने निर्यात की हिस्सेदारी को बढ़ाना चाहता है। हालांकि गत दो वर्षों में अमेरिका का निर्यात 33.5 फीसद जबकि भारत का निर्यात महज 9.4 फीसद ही बढ़ा है।

चीन से ज्यादा नुकसान

भारत की ओर से बढ़ाए गए शुल्क दरों से अमेरिका को 24 करोड़ डॉलर और खर्च करने होंगे लेकिन अगर चीन की बात करें तो उसने लगभग 110 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामानों के व्यापार को प्रभावित किया है। वैसे भी अमेरिकी कंपनियां भारत के बड़े बाजार को देखकर यहां प्रवेश पाना चाहती हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसा कर ट्रंप दबाव बनाकर भारत से व्यापारिक संबंधों को और अधिक अमेरिका के पक्ष में लाने की कोशिश में हैं।

विवाद की जड़

भारत ने गत फरवरी में विदेशी निवेशकों के लिए ई-कॉमर्स की नीति में बदलाव किया है। इसके तहत विदेशी कंपनियों को उनके डाटा को देश के भीतर ही रखने का नियम है। यह बात अमेरिकी कंपनियों को हजम नहीं हो रही है। यह नियम उन्हें प्रभावित कर रहा है। यह भी दोनों देशों के बीच मतभेद का बड़ा कारण बना है।

ट्रंप के बयान के पीछे राजनीति

ट्रंप ने 1987 में एक पुस्तक लिखी थी। यह किताब इस विषय पर आधारित थी कि कोई कैसे विजयी वार्ताकार या सौदागर बन सकता है। ट्रंप के हालिया बयान को उनके इसी स्वभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वह पीएम मोदी से मुलाकात से पहले एक दबाव बनाना चाहते थे। वैसे शुल्क दरों में बदलाव को पिछले जून से आठ बार टालने के बाद भारत सरकार ने इस बार बढ़ाया है।

:: राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019

  • शाह ने निचले सदन में जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 चर्चा एवं पारित होने के लिये पेश किया। इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों के समान आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
  • इस विधेयक के माध्यम से जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में और संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 और उसके अधीन बनाए गए नियम के तहत आरक्षण का फायदा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों को उपलब्ध नहीं था।
  • इसमें कहा गया है कि सीमापार से लगातार तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्ति सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन से पीड़ित होते हैं। यह स्थिति इन निवासियों को अन्य सुरक्षित स्थान पर प्रस्थान करने के लिये प्राय: विवश करती है जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति और शैक्षिक स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों को अधिनियम की परिधि में लाने की और उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों के समान बनाने की सतत मांग थी। ऐसे में अधिनियम में संशोधन आवश्यक हो गया था।
  • जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन अध्यादेश 2019 को प्रतिस्थापित करने के लिये है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों को उनके समग्र सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक विकास के दीर्घकाल से लंबित मांग को पूरा करेगा।
  • इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों को उपलब्ध आरक्षण का लाभ उठाने में समर्थ बनाया जा सकेगा।

:: आर्थिक समाचार ::

फेसबुक की प्रस्तावित ग्लोबल डिजिटल करेंसी लिब्रा

  • वर्षों से वॉल स्ट्रीट सहित अन्य फाइनेंशियल मार्केट्स की चिंता रही है कि सिलिकॉन वैली की दिग्गज टेक कंपनियां फाइनेंस के क्षेत्र में उलटफेर कर सकती हैं। फेसबुक सोचती है, उसने ऐसा करने का रास्ता खोज लिया है। वह 2020 में डिजिटल करेंसी लिब्रा लॉन्च करेगी। लिब्रा की कीमत प्रमुख करेंसी बास्केट से जुड़ी रहेगी। 28 बड़ी कंपनियां करेंसी के कंसोर्टियम में शामिल होंगी। अगर फेसबुक के दो अरब 40 करोड़ यूज़र लिब्रा का उपयोग करते हैं तो यह विश्व की सबसे बड़ी मुद्रा बन जाएगी। इसके साथ कंज्यूमर क्रांति तो शुरू होगी पर फाइनेंशियल सिस्टम की स्थिरता प्रभावित होगी। सरकारों का आर्थिक साम्राज्य सिमट जाएगा।
  • लिब्रा का लेन-देन आसान रहेगा। फेसबुक के मैसेंजर एप या व्हाट्स एप और अगले वर्ष अलग एप के माध्यम से ऐसा हो सकेगा। अन्य एप में यूज़रों का बैंक खाता होना जरूरी है। लिब्रा में किसी बैंक खाते की जरूरत नहीं होगी। यह पैसा ट्रांसफर करने वाली सेवाओं से सस्ती होगी। बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी की तुलना में लिब्रा कुछ सेकंड के भीतर यहां से वहां जाएगी। शुरुआत में प्रति सेकंड एक हजार ट्रांजेक्शन होंगे।
  • सफल होने पर लिब्रा फेसबुक के लिए पैसा कमाने की मशीन बन सकती है। ट्रांजेक्शन फीस से ज्यादा पैसा नहीं आएगा। लेकिन, लिब्रा के कारण फेसबुक ऑनलाइन एड के लिए अधिक पैसा ले सकेगी। वह डेटा का नया स्रोत बन जाएगी। फिर भी सतर्क कंज्यूमर उनके पर्सनल डेटा को लीक करने वाले सोशल नेटवर्क के हाथ में अपना पैसा नहीं सौंपेंगे। यूज़र सामने नहीं आएंगे तो व्यापारी भी करेंसी को सहारा नहीं देंगे।
  • डेटा सुरक्षित रखने का वादा न निभाने वाली फेसबुक ने सोशल और फाइनेंशियल डेटा अलग रखने के लिए सहायक कंपनी केलिब्रा बनाई है। कंसोर्टियम के हर सदस्य को एक करोड़ डॉलर फीस देनी होगी। प्रोजेक्ट के रास्ते में कई अड़चनें आएंगी। हैकर्स कठिनाइयां खड़ी कर सकते हैं। सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक होगी। डिजिटल वालेट सेवाओं को मनी लांडरिंग कानूनों का पालन करना पड़ता है। मैसेंजर, व्हाट्सएप से मिलकर केलिब्रा सबसे बड़ा वालेट हो जाएगा। इससे प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताएं पैदा होंगी। वित्तीय स्थिरता प्रभावित होने का अंदेशा रहेगा।
  • लिब्रा की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता है। हालांकि, फ्लॉप होने पर भी यह उपयोगी साबित होगी। क्योंकि यह फेसबुक को आगे चलाने का खाका सामने रखेगी। लिब्रा कंसोर्टियम में यूज़रों, विज्ञापनदाताओं सहित अन्य प्रतिनिधि होंगे। ये फेसबुक के सभी यूज़रों का ब्योरा रखने वाले एक अन्य डेटाबेस-सोशल ग्राफ की देखरेख करेंगे। वे सुनिश्चित करेंगे कि फेसबुक यूज़र दूसरे सोशल नेटवर्क पर पोस्ट कर सकें। विश्व के महत्वपूर्ण मसलों में सोशल मीडिया नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए फेसबुक के संविधान को इस दिशा में बनाने की मांग बढ़ती जा रही है।
  • क्या लिब्रा फेसबुक के लिए मॉडल हो सकती है? यह पूछे जाने पर प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डेविड मार्कस कहते हैं, यह एक नए दौर की शुरुआत होगी। फिर भी, नियंत्रण और संतुलन के कारण फेसबुक का मुनाफा कम हो जाएगा। यह विडंबना होगी अगर एक नई डिजिटल करेंसी फेसबुक के अपार धन कमाने के दिनों के अंत की शुरुआत करेगी

सीसीआई ने दिए गूगल के खिलाफ जांच के आदेश

  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने से जुड़े एक मामले में टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल के खिलाफ व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। इस दौरान आयोग ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि गूगल ने भारत में अपने दबदबे का दुरुपयोग किया है और एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) के विकल्प का इस्तेमाल करने को लेकर डिवाइस निर्माताओं की क्षमता को घटाया है।
  • सीसीआई के आदेश में कहा गया है कि मैन्यूफैक्चरर्स पर गूगल द्वारा लगाई गई रोक भारत प्रतिस्पर्धा कानून के तहत अनुचित शर्त लगाने का मामला लग रहा है। गौरतलब है कि सीसीआइ ने अप्रैल में गूगल के खिलाफ एक जांच शुरू की थी। यह जांच एंड्रॉयड के दबदबे का दुरुपयोग करने और प्रतिस्पर्धियों को आगे बढ़ने से रोकने को लेकर शुरू की गई थी।
  • गूगल के खिलाफ ऐसा ही एक मामला यूरोप में भी चला था, जिसमें यूरोपीय रेग्यूलेटर ने गूगल पर पांच अरब डॉलर (करीब 34.5 हजार करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया था। यूरोप में गूगल पर आरोप लगा था कि उसने मैन्यूफैक्चरर्स को एंड्रॉयड डिवाइसेज में अपने एप्स को पहले से इंस्टॉल करने के लिए बाध्य किया था।
  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने अपने आदेश में कहा कि गूगल ने अपने एप के प्रीइंस्टॉलेशन की शर्त लगाकर वैकल्पिक ओएस वाले डिवाइस का विकास और बिक्री करने की मैन्यूफैक्चरर्स की क्षमता और प्रेरणा को घटाया है। पहली नजर में यह गूगल द्वारा अपने दबदबे का दुरुपयोग करने का मामला लग रहा है।
  • टिप्पणी की मांग करने पर गूगल ने अपने एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें उसने कहा था कि एंड्रॉयड ने मोबाइल को सस्ता कर लाखों भारतीयों को इंटरनेट से जोड़ा है। एंड्रॉयड ने प्रतिस्पर्धा और इनोवेशन को बढ़ाया है, घटाया नहीं है।

लघु बचत योजनाओं परसरकार ने ब्‍याज दर 0.1 प्रतिशत घटाई

  • राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र (एनएससी) और लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) समेत अन्य छोटी बचत पर सरकार ने शुक्रवार को जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए ब्याज दर 0.1 प्रतिशत कम कर दी। बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों में आ रही कमी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। भारतीय रिजर्व बैंक इस साल तीन बार में अपनी नीतिगत दरों में कुल मिला कर 0.75 कटौती कर चुका है।
  • बचत खाता जमा पर ब्याज दर को छोड़कर सरकार ने अन्य सभी योजनाओं पर ब्याज दर में 0.1 प्रतिशत की कमी की है। बचत जमा खाते पर ब्याज दर चार प्रतिशत वार्षिक ही बनी रहेगी। वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए संशोधित ब्याज दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। ‘सरकार के निर्णय के आधार पर लघु बचत योजनाओं के लिए तिमाही आधार पर ब्याज दरें अधिसूचित की जाती है।
  • कटौती के बाद अब पीपीएफ एवं एनएससी पर वार्षिक ब्याज दर 7.9 प्रतिशत होगी जो अभी आठ प्रतिशत है। वहीं 113 महीने की परपक्वता वाले किसान विकास पत्र (केवीपी) पर 7.6 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा। अभी यह 112 महीने की परिपक्वता पर 7.7 प्रतिशत है। सुकन्या समृद्धि खाते पर अब 8.4 प्रतिशत ब्याज मिलेगा जो फिलहाल 8.5 प्रतिशत है। एक से तीन वर्ष की अवधि वाले सावधि जमा पर अब 6.9 प्रतिशत और पांच वर्ष की अवधि पर 7.7 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा। आवर्ति जमा के लिए यह ब्याज 7.3 प्रतिशत के बजाय 7.2 प्रतिशत होगा। पांच साल की अवधि वाली वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर ब्याज दर अब 8.7 प्रतिशत की बजाय 8.6 प्रतिशत होगी।

कम हुआ भारत का चालू खाते का घाटा

  • भारत का चालू खाते का घाटा (सीएडी) तेजी से कम हुआ है। 31 मार्च को समाप्त चौथी तिमाही में यह घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.7 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो दिसंबर 2018 में समाप्त तीसरी तिमाही में जीडीपी का 2.7 प्रतिशत था। मुख्य रूप से कारोबारी घाटा कम रहने के कारण ऐसा हुआ है, हालांकि विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह में तेजी बनी हुई है।
  • 2017-18 की चौथी तिमाही में सीएडी, जीडीपी का 1.8 प्रतिशत था। बहरहाल पूरे साल की स्थिति देखें तो 2018-19 में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 2.1 प्रतिशत रहा, जो 2017-18 में 1.8 प्रतिशत था। भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। 2018-19 में पोर्टफोलियो फंड का शुद्ध प्रवाह 2.4 अरब डॉलर रहा। पूरे साल के दौरान कारोबारी घाटा 2018-19 में बढ़कर 180.3 अरब रुपये हो गया, जो 2017-18 में 160 अरब डॉलर था।
  • कुल मिलाकर देखें तो इस चौथी तिमाही में सीएडी 4.6 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में 13 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में 17.7 अरब डॉलर था। रिजर्व बैंक ने कहा है, 'सालाना आधार पर सीएडी में कमी की प्राथमिक वजह कम कारोबारी घाटा रहा। यह इस साल 35.2 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले 41.6 अरब डॉलर था।'
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर नजर डालें वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में शुद्ध आवक 9.4 अरब डॉलर जबकि शुद्ध निर्गम 2.1 अरब डॉलर रही। 2017-18 की चौथी तिमाही में शुद्ध आवक 2.3 अरब डॉलर रही। वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 6.4 अरब डॉलर रहा जो वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही के बराबर है।
  • बयान में कहा गया है कि दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं से शुद्ध कमाई में बढ़ोतरी की वजह से सालाना आधार में सेवाओं से शुद्ध प्राप्तियां 5.8 प्रतिशत बढ़ी हैं। इसके अलावा निजी स्थानांतरण प्राप्तियां, खासकर विदेश में नियुक्त भारतीयों की ओर से भेजा गया धन एक साल पहले की तुलना में 0.9 प्रतिशत घटकर 17.9 अरब डॉलर रह गया है। भारत में आई वाह्य वाणिज्यिक उधारी की भारत में आवक 2018-19 की चौथी तिमाही में बढ़कर 7.2 अरब डॉलर हो गई है, जो एक साल पहले एक अरब डॉलर थी।

राजकोषीय घाटा 52 फीसदी पहुंचा

  • केंद्र का राजकोषीय घाटा 2019-20 के पहले दो महीनों में पूरे साल के बजट अनुमान का 52 फीसदी पहुंच गया है। फरवरी में पेश अंतरिम बजट में इसके 7.04 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया था जबकि यह मई अंत तक 3.66 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में राजकोषीय घाटा बजट लक्ष्य का 55.3 प्रतिशत था।
  • नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 5 जुलाई को वित्त वर्ष 2019-20 का आम बजट पेश किए जाने से पहले महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा आज जारी आंकड़ों के मुताबिक कुछ मंत्रालयों और विभागों को भारी आवंटन के बावजूद अप्रैल-मई में राजकोषीय घाटे को काफी हद तक काबू में रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक उर्वरक और पेट्रोलियम मंत्रालयों को अप्रैल-मई में उनके पूरे साल के बजट का क्रमश: 31 फीसदी और 35 फीसदी आवंटन किया गया। इसमें पिछले साल की सब्सिडी का कुछ हिस्सा भी शामिल है। पिछले साल इसी अवधि में इन मंत्रालयों को उनके पूरे साल के बजट का क्रम से 15 फीसदी और 21 फीसदी आवंटन किया गया था।
  • लेकिन कृषि, नागरिक उड्डयन, कोयला, बिजली, सड़क परिवहन, ग्रामीण विकास, इस्पात और कुछ अन्य मंत्रालयों को पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कम आवंटन किया गया है। अप्रैल-मई में कृषि मंत्रालय को उनके पूरे साल के बजट की केवल 13 फीसदी राशि आवंटित की गई जबकि पिछले साल इस अवधि में यह राशि 29 फीसदी थी। इसी तरह नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पिछले साल इस दौरान 60 फीसदी राशि आवंटित कर दी गई थी जबकि इस साल उसे केवल 14 फीसदी राशि मिली। कोयला मंत्रालय को महज एक फीसदी राशि मिली है जबकि पिछले साल उसे 20 फीसदी राशि आवंटित की जा चुकी थी। बिजली मंत्रालय को अप्रैल-मई में 8 फीसदी राशि आवंटित हुई जबकि पिछले साल यह 29 फीसदी थी।

वितरण क्षेत्र का ऑपरेटर होगा एनटीपीसी-पॉवर ग्रिड का उद्यम

  • केंद्र सरकार की हाल की राष्ट्रीय बिजली वितरण कंपनी गठित करने की योजना से वितरण क्षेत्र ऑपरेटर (डीएसओ) मिल सकता है। साथ ही इस क्षेत्र में सुधार व तकनीकी विशेषज्ञता की जिम्मेदारी भी यह कंपनी संभाल सकती है। अधिकारियों ने कहा कि कंपनी सलाहकार की भूमिका में हो सकती है और यह राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के कारोबार में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
  • पिछले सप्ताह भारत की दो प्रमुख सरकारी कंपनियों एनटीपीसी लिमिटेड और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन आफ इंडिया ने एक राष्ट्रीय बिजली वितरण कंपनी गठित करने के लिए संयुक्त उद्यम बनाया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक समिति का गठन किया गया है, जो कंपनी का खाका तैयार करेगी। अधिकारी ने कहा, 'इसके लिए नीति आयोग और निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के अनुमति की जरूरत होगी।'
  • बिजली मंत्रालय के प्रवक्ता ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा, 'पॉवरग्रिड और एनटीपीसी के बीच 21 जून 2019 को एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए एक समझौता हुआ है। दोनों कंपनियों की इसमें बराबर हिस्सेदारी होगी। यह संयुक्त उद्यम राष्ट्रीय बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड (एनईडीसीएल) के गठन के लिए हुआ है। जेवीसी का मुख्य मकसद बिजली के वितरण और विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वितरण का कारोबार व अन्य संबंधित गतिविधियों का काम देखना होगा।'
  • वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात को खारिज किया कि नई कंपनी वैकल्पिक डिस्कॉम का काम संभालेगी। भारत में बिजली समवर्ती सूची में है और बिजली वितरण राज्यों के अधीन है। दिल्ली, मुंबई जैसे कुछ इलाकों को छोड़ दें तो वितरण का काम राज्य के हाथों में है और यह कंपनियां वित्तीय संकट से गुजर रही हैं। सरकारी वितरण कंपनियो का घाटा वित्त वर्ष 19 के अंत में 40 प्रतिशत बढ़कर 21,658 करोड़ रुपये हो गया है। अधिकारी ने कहा, 'कोई एक एजेंसी नहीं है, जो वितरण कंपनियों में सुधार के काम की निगरानी कर सके।'

डिफॉल्टरों को खुले बाजार से बिजली नहीं

  • राज्य सरकारों की घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का अनुशासन बनाए रखने के लिए केंद्र ने सख्त कदम उठाया है। केंद्र ने कहा है कि भुगतान सुरक्षा व्यवस्था के तहत 'लेटर आफ क्रेडिट' अनिवार्य होगा। वहीं इसमें यह भी कहा गया है कि जो वितरण कंपनियां दीर्घकालीन बिजली समझौते के तहत भुगतान करने में चूक कर रही हैं, उन्हें खुले बाजार से कम अवधि की बिजली खरीद की अनुमति नहीं होगी।
  • एक सार्वजनिक बयान में कहा गया है कि बिजली मंत्री आरके सिंह ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें बिजली खरीद समझौते (पीपीए) के तहत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था के रूप में लेटर ऑफ क्रेडिट को बहाल रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था को लागू कराने वाली एजेंसियां- नैशनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनएलडीसी) और उसकी क्षेत्रीय इकाइयां इस व्यवस्था पर नजर रखेंगी।
  • सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में सिंह ने कहा है, 'इससे व्यवस्था में बदलाव आएगा और यह क्षेत्र व्यावहारिक बन जाएगा।' बिजली अधिनियम के तहत डिस्कॉम और बिजली उत्पादकों के बीच हुए दीर्घावधि पीपीए में पर्याप्त भुगतान सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने का प्रावधान है।
  • मंत्रालय ने कहा है कि इसके लिए प्रावधान किया गया है, उसके बावजूद लेटर ऑफ क्रेडिट नहीं दिया गया और बिजली बिल की बड़ी राशि बकाया है। बिजली उत्पादन कंपनियों का बकाया मार्च 2019 में 16,659 करोड़ रुपये था।
  • बयान में कहा गया है, 'अगर ऐसी स्थिति बनी रहती है तो बिजली उत्पादक कोयले व रेलवे रैक/ढुलाई के खर्च का भुगतान नहीं कर पाएंगे और इससे बिजली के उत्पादन में कमी आएगी। बिजली उत्पादन कम होने के कारण बड़े पैमाने पर बिजली की कटौती करनी पड़ेगी। ऐसी स्थिति को देखते हुए यह जरूरी है कि उपरोक्त उल्लिखित सभी प्रावधानों को लोड डिस्पैच केंद्रों द्वारा कड़ाई से लागू किया जाए।' केंद्र सरकार ने डिस्कॉम द्वारा शेड्यूलिंग और डिस्पैच में कोई बदलाव करने की स्थिति में उत्पादन कंपनियो को दिए जाने वाले हर्जाने को भी मंजूरी दे दी है।
  • ज्यादातर डिस्कॉम नकदी के संकट से जूझ रही हैं और उन्होंने दीर्घाïवधि पीपीए नहीं किया है। पिछले 7 साल में किसी वितरण कंपनी ने दीर्घावधि पीपीए नहीं किया। इसकी वजह से कुछ निजी बिजली कंपनियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और करीब 11,000 मेगावॉट क्षमता मांग न होने की वजह से बेकार पड़ गई है। इसमें से ज्यादातर डिस्कॉम कम अवधि की बिजली खरीद पॉवर एक्सचेंजों से करती हैं। केंद्र सरकार ने अब इस पर रोक लगा दी है।
  • मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लोड डिस्पैच केंद्रों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नियमन के दायरे में आने वाली इकाई, नियमन की अवधि के दौरान बिजली एक्सचेंजों से बिजली खरीद न करें और उन्हें कम अवधि की ओपन एक्सेस (एसटीओए) की अनुमति न हो। लोड डिस्पैच केंद्रों को यह व्यवस्था अगस्त 2019 और उसके बाद लागू करने को कहा गया है।

बदलेगा आवश्यक वस्तु अधिनियम

  • मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में निजी निवेश लाने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में बड़े विधायी बदलाव की योजना बना रही है। अधिकारियों ने कहा कि इस योजना के मुताबिक राज्यों के जरिये आवश्यक वस्तु अधिनियम को लागू करने की केंद्र सरकार की विवेकाधीन शक्तियों को पूरी तरह वापस लिया जाएगा। यह अधिनियम केवल तीन विशेष परिस्थितियों में ही लागू होगा।
  • इन तीन विशेष परिस्थितियों में बड़ी प्राकृतिक आपदा, युद्ध या राष्ट्रीय संकट जैसी आपात स्थितियां या किसी जिंस के उत्पादन में एक निर्धारित सीमा से अधिक (10 से 15 फीसदी) गिरावट शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इस समय सरकार के पास आवश्यक वस्तु अधिनियम को लागू करने की अपार शक्तियां हैं। हालांकि इन्हें पिछले कुछ वर्षों के दौरान थोड़ा कम किया गया है। लेकिन यदि वर्तमान संशोधनों को स्वीकार किया जाता है तो ये सभी शक्तियां समाप्त हो जाएंगी।'
  • ऐसा देखने में आया है कि बड़े कारोबारी घराने प्राधिकरणों के आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई के डर से गोदामों जैसे बड़े कृषि बुनियादी ढांचों में निवेश से दूरी बनाए हुए हैं। इसी वजह से आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा, 'इससे निवेशकों को कुछ हद तक राहत मिलेगी।' आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव करना सरकार की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों और गोदामों के निर्माण में निवेश लुभाया जाना है।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में बना था। इसका मकसद अर्थव्यवस्था में जिंसों की किल्लत से निपटना और जमाखोरों को आवश्यक वस्तुओं के भंडारण या कालाबाजारी के जरिये अधिशेष या कमी का फायदा उठाने से रोकना था। इस अधिनियम से सरकार को कुछ चीजों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार मिला।
  • केंद्र ने अधिनियम के तहत राज्यों को चिह्नित खाद्य उत्पादों पर भंडारण सीमा लगाने और उत्पादन, बिक्री एवं वितरण की खातिर लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत किया। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लाइसेंस की जरूरत, भंडारण सीमा और कुछ खाद्य उत्पादों की आवाजाही पर रोक खत्म की थी। इन खाद्य उत्पादों में गेहूं एवं उससे बने उत्पाद, खाद्य तेल, हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति तेल, प्याज एवं आलू आदि शामिल हैं। दालों के लिए प्रतिबंध सितंबर, 2017 तक हटाए गए थे। वहीं अन्य जिंसों के लिए प्रतिबंध अलग-अलग अवधि के लिए हटाए गए थे।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियन के 2016 के संशोधनों में बहुत से आउटलेट वाले निर्यातकों एवं खुदरा विक्रेताओं या बड़े डिपार्टमेंटल स्टोरों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं और आयातकों के लिए भी लाइसेंस की जरूरत, भंडारण सीमा और आवाजाही के प्रतिबंध खत्म किए गए। हालांकि अधिनियम को नरम बनाया गया है, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार के पास आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इतनी शक्तियां हैं कि वह उचित समझने पर विभिन्न प्रावधानों को लागू कर सकती है। अधिकारियों ने कहा कि इस समय जिन बदलावों के बारे में विचार किया जा रहा है, उनसे केंद्र सरकार की विवेकाधीन शक्तियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

:: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ::

शनि के चंद्रमा पर 'ड्रैगनफ्लाइ' मिशन भेजेगा नासा

  • नासा ने मंगल, शुक्र और चांद पर पहुंचने के बाद शनि ग्रह पर मिशन भेजने का फैसला लिया है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने शनि के सबसे बड़े चंद्र टाइटन पर ड्रोन की स्टाइल वाले क्वाडकॉप्टर को भेजने का फैसला लिया है। न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस मिशन को नासा ने 'ड्रैगनफ्लाइ' नाम दिया है। यह मिशन शनि के चंद्रमा टाइटन पर जीवन की संभावनाओं को तलाशेगा। शनि अकेला ऐसा ग्रह है, जिसकी सतह पर पानी की उपलब्धता है।
  • इस मिशन को मैरीलैंड स्थित जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की अप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी की ओर से तैयार किया जा रहा है। यह स्पेसक्राफ्ट 2026 में लॉन्च किया जाएगा। 2034 में टाइटन पर यह पहुंचेगा और ढाई साल तक का वक्त वहां गुजारेगा। ड्रैगनफ्लाई पर लगे कैमरे उड़ान के दौरान तस्वीरें भेजेंगे। इससे धरती पर मौजूद लोगों को शनि के चंद्र की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
  • मिशन का नेतृत्व करने वाले एलिजाबेथ टर्टल ने कहा, 'शुरुआत में हम मिट्टी के ऊपर उड़ान भरेंगे और उसके बाद मैदान का निरीक्षण करेंगे।' उन्होंने अप्रैल में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि टाइटन में वैज्ञानिक मिशन के लिहाज से काफी अच्छे अवसर हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

चंबा सेक्रेड लंगूर

  • विश्व भर में विलुप्त हो चुकी चंबा लंगूर की प्रजाति एक बार फिर सामने आई है। चंबा वैली क्षेत्र में मिली इस प्रजाति को चंबा सेक्रेड लंगूर (चंबा पवित्र लंगूर) के नाम से जाना जाता है। यह प्रजाति लंगूर की सात प्रजातियों में सबसे भिन्न है। इन लंगूरों के कश्मीर और पाकिस्तान की वैली में भी होने की संभावना है।
  • हालांकि, इसको लेकर अभी कोई सुबूत नहीं मिले हैं, क्योंकि लंगूर की विलुप्त हो चुकी प्रजाति के ऊपर अभी तक कोई रिसर्च नहीं हुई है। फिलहाल इस प्रजाति के चंबा में होने के सुबूत मिले हैं। प्रजाति पर रिसर्च कर रहे विशाल आहुजा ने यह दावा किया है।
  • उनका मानना है कि वह चंबा सेक्रेड लंगूर पर पिछले सात साल से रिसर्च कर रहे हैं। उनकी रिसर्च में इस बात का पता चला है कि लंगूर की जो प्रजाति चंबा वैली में पाई गई है, वह विश्व में अन्य किसी भी वन्य प्राणी क्षेत्र में नहीं है। चंबा सेक्रेड लंगूर फल, बीज, फूल, जड़ें, छाल और कलियां खाते हैं।
  • चंबा सेक्रेड लंगूर की विलुप्त प्रजाति के संरक्षण के लिए विभाग की ओर से अब योजना बनाई जा रही है। इस प्रजाति के लंगूर की फोटो के होर्डिंग बनाकर विभाग वन्य प्राणी क्षेत्रों में लगाएगा।
  • विशाल आहुजा का कहना है कि वह इस प्रजाति को चंबा ग्रे लंगूर के नाम से विश्व में प्रसिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। चंबा सेक्रेड लंगूर की प्रजाति चंबा जिले के जसौरगढ़, दियोला, कुगति, काला टोप, खज्जियार, भांदल सहित अन्य क्षेत्रों में पाई गई है। वन्य प्राणी विभाग इनकी शीघ्र ही गणना भी करवा सकता है।
  • चंबा वैली में विलुप्त प्रजाति के लंगूर पाए गए हैं। यह प्रजाति विश्व में मात्र चंबा में ही पाई जाती है। इसलिए इस प्रजाति के संरक्षण को लेकर विभाग प्रभावी कदम उठाने जा रहा है

:: विविध ::

चौथे भारत समुद्री पुरस्कार में जेएनपीटी को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ् पोर्ट (कंटेनर) पुरस्कार प्रदान किया गया

  • जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्‍ट (जेएनपीटी) को चौथे भारत समुद्री पुरस्‍कार 2019 के अंतर्गत वर्ष के सर्वश्रेष्‍ठ पोर्ट (कंटेनर) पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया। देश के सबसे अच्‍छे पोर्टों को इस श्रेणी में नामांकित किया गया था। समुद्री क्षेत्र में 30 वर्षों की अपनी स्‍वर्णिम सेवाओं के लिए जेएनपीटी को एक विशेष सम्‍मान भी दिया गया।
  • सर्वश्रेष्‍ठ पोर्ट श्रेणी के अंतर्गत विभिन्‍न मानकों पर विचार किया जाता है, जैसे- पिछले वर्ष के आधार पर विकास, पिछले वर्ष के आधार पर विकास, माल की कुल मात्रा, विस्‍तार की योजनाएं, नई पहल, उपकरणों का संचालन व रख-रखाव, ई-व्‍यापार और उपभोक्‍ता संतुष्टि। इन सभी मानकों पर जेएनपीटी ने वृद्धि दर्ज की। कंटेनर संचालन में पांच मिलियन टीईयू की सीमा को स्‍तर को प्राप्‍त किया। चौथे टर्मिनल के विकास का कार्य हो रहा है। जेएनपीटी की अन्‍य विकास योजनाएं हैं- सड़क अवसंरचना विकास परियोजना, नेवीगेशन चैनल की ड्रेजिंग, ड्राई पोर्ट का विकास, जेएनपीटी-एसईजेड परियोजना, सेवाओं का डिजिटलीकरण और स्‍वत: संचालन आदि।

भारतीय मूल की प्रिया सेराव बनी ‘मिस यूनिवर्स ऑस्ट्रेलिया 2019’

  • मेलबर्न, 28 जून (भाषा) भारतीय मूल की प्रिया सेराव ने ‘मिस यूनिवर्स ऑस्ट्रेलिया 2019’ का खिताब अपने नाम किया। सेराव के माता-पिता पश्चिम एशिया से ऑस्ट्रेलिया आ गए थे। मेलबर्न में गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में सेराव ने 26 प्रतियोगियों को मात देकर यह खिताब अपने नाम किया।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • हाल ही में संसद में प्रस्तुत विधेयक में मेडिकल शिक्षा हेतु एमसीआई की जगह कौन से आयोग का गठन किया जाएगा? (राष्ट्रीय मेडिकल आयोग-एमएनसी)
  • भारत कौन से वर्ष में जी-20 की अध्यक्षता करेगा ? (2022)
  • डिजिटल करेंसी लिब्रा को किस दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी के द्वारा लांच किया जाएगा? (फेसबुक)
  • हाल ही में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने किस दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी को प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने के संदर्भ में व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं? (गूगल)
  • हाल ही में सरकार के द्वारा लघु बचत योजनाओं पर कितने प्रतिशत ब्याज में कटौती की गई है? (0.1 प्रतिशत)
  • हाल ही में किस अंतरिक्ष कंपनी द्वारा शनि के चंद्रमा टाइटन पर जीवन की संभावनाओं की तलाश हेतु मिशन की घोषणा की गई है? (ड्रैगनफ्लाई- नासा)
  • चौथे भारत समुद्री पुरस्‍कार 2019 के अंतर्गत वर्ष के सर्वश्रेष्‍ठ पोर्ट (कंटेनर) पुरस्‍कार किस पोर्ट को प्रदान किया गया है? (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्‍ट -जेएनपीटी)
  • हाल ही में किस भारतीय मूल की महिला ने मिस यूनिवर्स ऑस्ट्रेलिया 2019 का खिताब जीता है? (भारतीय मूल की प्रिया सेराव)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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