(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 जून 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 जून 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

असम में एक लाख से ज्यादा ये नाम NRC मसौदे से हुए बाहर

  • असम में राष्ट्रीय नागरिक रेजिस्टर (NRC) के मसौदे से एक लाख से अधिक लोगों को बाहर कर दिया गया है। इन्हें NRC की मसौदा सूची से अलग करने का कारण भारतीय नागरिकता के लिए अयोग्य पाया जाना बताया गया है। पिछले साल 30 जुलाई को NRC की जारी सूची से बाहर रह गए 40 लाख लोगों के नामों के साथ ही अब यह नाम भी जुड़ गए हैं।
  • NRC के राज्य संयोजक के बुधवार को जारी बयान के अनुसार 'लोकल रेजिस्ट्रार ऑफ सिटिजन रेजिस्ट्रेशन' (LRCR) की NRC की पड़ताल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद NRC की सूची में शामिल 1,02,462 लोगों को अवैध करार दे दिया गया। चूंकि उनकी दी गई जानकारियां सही नहीं पाई गई थीं।
  • बाहर किए जाने वाले अतिरिक्त लोगों की सूची में वह लोग शामिल हैं जिन्हें विदेशी पाए जाने पर अयोग्य घोषित किया गया है। या फिर उन्हें संदिग्ध मतदाता पाया गया है। इसके अलावा, विदेशी ट्रिब्यूनलों में लंबित मामलों (PFT) वाले लोगों को भी NRC की मसौदा सूची से निकाल दिया गया है। यानी यह सभी भारतीय नागरिक होने के लिए अयोग्य पाए गए हैं।
  • उल्लेखनीय है कि सन 1951 के बाद से पहली बार असम में अवैध आव्रजकों की पहचान की जा रही है। राष्ट्रीय नागरिक रेजिस्टर (NRC) को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अपडेट किया जा रहा है। इसकी अंतिम सूची आगामी 31 जुलाई को जारी की जाएगी।
  • जिन लोगों को इस सूची से बाहर किया गया है उनका ब्योरा NRC की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। उन्हें पत्र भेजकर भी सूचित किया जाएगा। इसके अलावा NRC से बहिष्कृत लोगों की जानकारी NRC सेवा केंद्रों (NSK), उपायुक्तों के दफ्तरों, उप मंडलीय अधिकारी (सिविल) और सर्किल अफसरों को भी उपलब्ध कराई गई है।
  • जिन लोगों को NRC की सूची से बाहर किया गया है, वह अपना दावा कर सकते हैं। इसके लिए सुनवाई आगामी पांच जुलाई से शुरू होगी। जिन लोगों को अयोग्य पाया गया है, वह अपने दावों और आपत्तियों के निस्तारण की सुनवाई के दौरान बतौर गवाह पेश होंगे।
  • NRC की मसौदा सूची से बाहर किए गए लोगों के नामों में उन बहिष्कृत लोगों के दावों के नतीजे नहीं हैं, जिनके लिए 15 फरवरी से 26 जून तक सुनवाई की गई है। गौरतलब है कि करीब 3.29 करोड़ लोगों ने NRC में अपने नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया था। इनमें से 2.9 करोड़ लोगों को NRC के योग्य पाया गया।

सरकार ने आंध्र प्रदेश में पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य की अवधि दो साल बढ़ाई

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने आज अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत आंध्र प्रदेश में पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य की अवधि दो साल बढ़ा दी।
  • पोलावरम परियोजना आंध्र प्रदेश की जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लगभग 3 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, 960 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली पैदा होगी और परियोजना के आसपास के540 गांवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी जिससे विशेषकर विशाखापत्तनम, पूर्वी गोदावरी एवं पश्चिमी गोदावरी और कृष्णा जिलों में रहने वाले 25 लाख लोग कवर होंगे।
  • वर्ष 2011 में तत्कालीन सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार से परियोजना का निर्माण कार्य रोक देने को कहा था, लेकिन वर्ष 2014 में एनडीए सरकार ने पोलावरम परियोजना को एक राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया और मंत्रालय ने निर्माण कार्यों की अनुमति देने के लिए ‘काम रोकने के आदेश’ को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस परियोजना की व्यापक अहमियत को ध्यान में रखते हुए इस बार मंत्रालय जल को अवरुद्ध करने की अनुमति दिये बगैर दो वर्षों के लिए निर्माण कार्यों की इजाजत देने के लिए ‘काम रोकने के आदेश’ को ठंडे बस्ते में डाल रहा है।
  • इस परियोजना के तहत गोदावरी नदी पर मिट्टी एवं पत्थर युक्त बांध बनाने की परिकल्पना की गई है। बांध की अधिकतम ऊंचाई 48 मीटर है।

प्रशासनिक सुधारों और जन-शिकायतों के विभाग की नई पहलों की समीक्षा

  • केन्द्रीय कार्मिक, जन-शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज नई दिल्ली में प्रशासनिक सुधारों और जन-शिकायतों के विभाग की नई पहलों की दूसरी बैठक की।
  • प्रशासनिक सुधार, जन-शिकायत विभाग ने अपनी वेबसाइट पर डैशबोर्ड की शुरूआत की है, इंडिया@75 सुशासन पहल और विज़न 2024 दस्तावेज तैयार किया है जिसका उद्देश्य सरकार के घोषणा पत्र को समय पर लागू करना है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि डीएआरपीजी गहरा असर डालने वाले तीन फैसलों का कार्यान्वित करेगाः

क) राष्ट्रीय ई-शासन सम्मेलन 8-9 अगस्त, 2019 को शिलाँग में होगाख) राष्ट्रीय ई-सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) का प्रकाशन औरग) केन्द्रीय सचिवालय कार्यालय कार्यप्रणाली की नियम पुस्तिका (सीएसएमओपी) 2019 का प्रकाशन।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

एशिया पैसिफिक देश द्वारा भारत का सुरक्षा परिषद में अस्थाइ सदस्यता का समर्थन

  • यूएन की सुरक्षा परिषद (United Nation Security Council) में भारत की अस्थाइ सदस्यता का एशिया पैसिफिक के देशों (Asia Pacific Group) ने समर्थन किया है। इस बात की जानकारी संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने दी है। उन्होंने बताया कि एशिया-पैसिफिक ग्रुप संयुक्त राष्ट्र ने सर्वसम्मति से साल 2021-22 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
  • यूएन सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं। 15 में से पांच देशों अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटंन और चीन इसके स्थाई सदस्य हैं। बाकी बचे 10 देश इसमें अस्थाई तौर पर शामिल है। अस्थाई देशों का हर 2 साल का कार्यकाल होता है, जिसके बाद चुनाव द्वारा फिर सदस्यता तय की जाती है।
  • हाल ही में जर्मनी ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्‍थाई सीट दिए जाने की वकालत की थी। भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे. लिंडनर ने कहा था कि अबतक 1.4 अरब जनसंख्‍या वाला देश भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्‍थाई सदस्‍य नहीं है। यह एक तरह से उसको नहीं सुनने जैसा है। ऐसा नहीं चल सकता क्योंकि इससे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की विश्वसनीयता को चोट पहुंचती है।
  • भारत संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के लंबे समय से लंबित पड़े सुधारों को लेकर दबाव बनाता रहा है। भारत कहता रहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र की महत्त्वपूर्ण संस्था में एक स्थायी सदस्य के तौर पर उचित जगह का हकदार है। इस साल की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने सुरक्षा परिषद की सदस्यता बढ़ाने का समर्थन किया था।

:: आर्थिक समाचार ::

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के तहत गठित मधुमक्‍खी पालन विकास समिति की रिपोर्ट जारी

  • प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के तहत गठित मधुमक्‍खी पालन विकास समिति (बीडीसी) ने आज अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस समिति का गठन प्रो. देबरॉय की अध्‍यक्षता में किया गया है।
  • बीडीसी का गठन भारत में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के नए तौर तरीकों की पहचान करने के उद्देश्य से किया गया है ताकि इसके जरिए कृषि उत्पादकता, रोजगार सृजन और पोषण सुरक्षा बढ़ाने तथा जैव विविधता को संक्षित रखने में मदद मिल सके। इसके अलावा, 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में भी मधुमक्खी पालन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • अंतराष्‍ट्रीय खाद्य एंव कृषि संगठन-FAO के 2017-18 के आंकडों के अनुसार शहद उत्‍पादन के मामले में भारत (64.9 हजार टन शहद उत्‍पादन के साथ) दुनिया में आठवें स्‍थान पर रहा जबकि चीन (551 हजार टन शहद उत्‍पादन ) के साथ पहले स्‍थान पर रहा। बीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार मधुमक्‍खी पालन को केवल शहद और मोम उत्‍पादन तक सीमित रखे जाने की बजाए इसे परागणों,मधुमक्‍खी द्वारा छत्‍ते में इकठ्ठा किए जाने वाले पौध रसायन,रॉयल जेली और मधुमक्‍खी के डंक में युक्‍त विष को उत्‍पाद के रूप में बेचने के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है जिससे भारतीय किसान काफी लाभान्वित हो सकते हैं। खेती और फसलों के क्षेत्र के आधार पर, भारत में लगभग 200 मिलियन मधुमक्खी आवास क्षेत्र की क्षमता है, जबकि इस समय देश में ऐसे 3.4 मिलियन मधुमक्खी आवास क्षेत्र हैं। मधुमक्ख्यिों के आवास क्षेत्र का दायरा बढ़ने से बढ़ने से न केवल मधुमक्खी से संबंधित उत्पादों की संख्‍या बढ़ेगी बल्कि समग्र कृषि और बागवानी उत्पादकता को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • देश में मधुमक्‍खी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा हाल में किये गये प्रयासों के कारण 2014-15 और 2017-18 के दौरान शहद का निर्यात (कृषि और किसान कल्‍याण मंत्रालय के राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी पालन बोर्ड के आंकडों के अनुसार) 29.6 हजार टन से बढ़कर 51.5 हजार टन पर पहुंच गया। हालांकि इस क्षेत्र में अभी भी काफी चुनौतियां मौजूद है पर इसके साथ ही इस उद्योग को प्रोत्‍साहित करने के लिए काफी संभावनाएं भी है।

देश में मधुमक्‍खी पालन के उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बीडीसी की रिपोर्ट में निम्‍नलिखित सुझाव दिये गये हैं :-

  • मधुमक्‍खियों को कृषि उत्‍पाद के रूप में देखना तथा भूमिहीन मधुमक्‍खी पालकों को किसान का दर्जा देना।
  • मधुमक्खियों के पंसद वाले पौधे सही स्‍थानों पर लगाना तथा महिला स्‍व: सहायता समूहों को ऐसे बागानों का प्रबंधन सौंपना।
  • राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी बोर्ड को संसथागत रूप देना तथा कृषि और किसान कल्‍याण मंत्रालय के तहत इसे शहद और परागण बोर्ड का नाम देना। ऐसा निकाय कई तंत्रों के माध्यम से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने में मदद करेगा। इसमें नए एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्रों की स्थापना, उद्योग से जुड़े लोगों को और ज्‍यादा प्रशिक्षित करना , शहद की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए एक कोष का गठन तथा मधुमक्‍खी पालन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर डेटा संग्रह जैसी बातें शामिल होंगी।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में उन्नत अनुसंधान के लिए एक विषय के रूप में मधुमक्‍खी पालन को मान्यता।
  • मधुमक्‍खी पालकों का राज्‍य सरकारों द्वारा प्रशिक्षण और विकास।
  • शहद सहित मधुमक्खियों से जुड़े अन्‍य उत्‍पादों के संग्रहण, प्रसंस्‍करण और विपणन के लिए राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय स्‍तर पर अवसंरचनाओं का विकास।
  • शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना और स्पष्ट मानकों को निर्दिष्ट करना।

बीडीसी की यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी गई है और साथ ही जनसाधारण के लिए सार्वजनिक रूप से (पब्लिक डोमेन) पर भी उपलब्‍ध करायी गई है।

पेमेंट संबंधित सभी डेटा भारत में करना होगा स्टोर, विदेशों में डेटा प्रोसेसिंग पर पाबंदी नहीं

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज स्पष्ट किया कि देश के बाहर भुगतान से संबंधित लेनदेन की प्रोसेसिंग पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन प्रोसेसिंग के बाद डेटा को भारत में ही संग्रहीत करना होगा। केंद्रीय बैंक ने संशोधित एफएक्यू (बार-बार पूछे जाने वाले सवाल) में कहा कि यदि भुगतान की प्रक्रिया विदेश में होती है तो वहां उससे संबंधित डेटा को विदेश में स्थित प्रणालियों से हटा दिया जाए और उसे भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के एक कारोबारी दिन या 24 घंटे के भीतर, जो भी पहले हो, भारत वापस लाया जाए।
  • एक सप्ताह पहले सरकार ने घोषणा की थी कि आरबीआई डेटा को स्थानीय स्तर पर रखने से संबंधित सख्त दिशानिर्देशों से जुड़ी चिंताओं पर विचार करेगा। भुगतान सेवा प्रदाता कंपनियां सीमाओं के आरपार डेटा के मुक्त प्रवाह के लिए विभिन्न स्तरों पर पैरवी कर रही हैं। हाल में आई मीडिया खबरों के मुताबिक अमेरिका उन देशों के लिए एच1बी वीजा सीमित कर सकता है जिन्होंने कंपनियों को स्थानीय स्तर पर डेटा रखने को कहा है।
  • सरकार ने डेटा मिररिंग की अनुमति देकर इन दिशानिर्देशों को नरम बनाने की वकालत की थी लेकिन आरबीआई अपने रुख पर अड़ा रहा और इस बात पर जोर दिया कि भारत में भुगतान से जुड़े डेटा को केवल भारत में ही रखा जा सकता है।
  • आरबीआई ने साथ ही कहा कि जरूरत पडऩे पर उपभोक्ताओं से जुड़े विवादों और प्रोसेसिंग से जुड़ी अन्य गतिविधि के लिए भारत में संग्रहीत डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • जरूरत पडऩे पर इस डेटा को विदेशी नियामक के साथ भी साझा किया जा सकता है। यह लेनदेन की प्रकृति पर निर्भर करेगा और इसके लिए आरबीआई से अनुमति लेनी होगी। सीमा के आरपार लेनदेन के मामले में आरबीआई ने विदेश में भी इसकी एक प्रतिलिपि रखने की अनुमति दी है।
  • विदेशों में डेटा प्रोसेसिंग पर स्पष्टीकरण विदेशी भुगतान कंपनियों के लिए राहत की बात हो सकती है लेकिन भारत में ही डेटा के भंडारण की अनिवार्यता पर आरबीआई का जोर उनके लिए समस्या है। एक दिग्गज अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधि ने पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा था कि कंपनी को अपनी कुछ वैश्विक प्रक्रियाओं को बदलना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय उपभोक्ताओं के लेनदेन का कोई डेटा कहीं और स्टोर न हो। उन्होंने कहा कि अधिकांश बाकी कंपनियों को भी यही करना होगा।
  • आरबीआई ने पिछले साल 6 अप्रैल को स्थानीय स्तर पर डेटा रखने से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए थे और इनका अनुपालन करने के लिए भुगतान प्रदाता कंपनियों को छह महीने का समय दिया था। इन कंपनियों द्वारा बहुत जोर लगाने के बावजूद केंद्रीय बैंक अपने रुख पर अड़ा रहा और लगभग सभी कंपनियों ने उसके दिशानिर्देशों के पालन के लिए अपनी योजना और रिपोर्ट बैंक नियामक को सौंप दी।

भारत में कॉर्पोरेट कर सबसे अधिक

  • भारत दुनिया के उन देशों की फेहरिस्त में शुमार है, जहां कॉर्पोरेट कर (कंपनियों पर लगने वाला कर) की दर सबसे अधिक है। हाल के वर्षों में इन दरों में धीमी गति से ही सही, लेकिन बढ़ोतरी बरकरार है।
  • ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक को-ऑपरेशन ऐंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) में शुमार 94 देशों में भारत में कॉर्पोरेट कर 48.3 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक है। इतना ही नहीं, यह आंकड़ा 2018 के औसत वैश्विक कर दर 24 प्रतिशत का दोगुना पाया गया।
  • जिन घरेलू कंपनियों का राजस्व 250 करोड़ रुपये से अधिक है उन पर कर की दर 30 प्रतिशत है, वहीं 250 करोड़ रुपये से कम राजस्व वाली कंपनियों को 25 प्रतिशत कर चुकाना पड़ता है। विदेशी कंपनियों को 40 प्रतिशत कर देना पड़ता है। 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये कर योग्य आय के दायरे में आने वाली घरेलू कंपनियों को 7 प्रतिशत अधिभार भी देना पड़ता है। 10 करोड़ रुपये से अधिक कर योग्य आय वाली देसी कंपनियों की कर देनदारी 12 प्रतिशत बनती है।
  • विदेशी कंपनियों की बात करें तो यह दर क्रमश: 2 प्रतिशत और 5 प्रतिशत है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर के रूप में 4 प्रतिशत अतिरिक्त कर भुगतान भी करना पड़ता है। विदेशी कंपनियां रॉयल्टी पर 50 प्रतिशत कर भुगतान करती हैं। इसके अलावा 20.56 प्रतिशत लाभांश वितरण कर भी चुकाना होता है। ओईसीडी ने यह मानकर गणना की है कि कंपनियां अपने पूरे सालाना मुनाफे का वितरण शेयरधारकों को इक्विटी लाभांश के तौर पर करती हैं। भारत में कॉर्पोरेट कर जापान (29.7 प्रतिशत) की तुलना में डेढ़ गुना और रूस (20 प्रतिशत) और यूनाइटेड किंगडम (19 प्रतिशत) के मुकाबले दोगुना अधिक है।
  • ओईसीडी दरें मानक दर पर विचार करती है, जो किसी खास उद्योग या आय पर केंद्रित नहीं है। भारत में ऊंचे कॉर्पोरेट कर पर ईवाई इंडिया में नैशनल टैक्स लीडर सुधीर कपाडिय़ा ने कहा, 'भारत में कॉर्पोरेट कर अधिक हैं और सरकार को इन्हें कम कर दूसरी प्रतिस्पद्र्धी अर्थव्यवस्थाओं के अनुसार ही करना चाहिए।' अधिक कर से कंपनियों की प्रतिस्पद्र्धी क्षमता कम होती है। इससे कंपनियों से जुड़े निवेश पर भी असर होता है। डेलॉयट में मैनेजिंग पार्टनर विपुल जवेरी कहते हैं,'कॉपोरेट कर कम किए जाने से कंपनियां अधिक मात्रा में पूंजी व्यय करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।' पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015 के बजट कहा था कि कॉर्पोरेट कर धीरे-धीरे कम करते हुए 25 प्रतिशत पर लाया जाएगा।
  • साथ ही उन्होंने विभिन्न रियायतें समाप्त करने की बात भी कही थी। कपाडिय़ा ने कहा कि हालांकि सरकार ने 250 करोड़ रुपये सालाना कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए कर घटाकर 25 प्रतिशत जरूर किया है, लेकिन भारत में कंपनियों के संयुक्त राजस्व एवं मुनाफे में ऐसी कंपनियों की तादाद महज 5 प्रतिशत ही है।
  • ओईसीडी के अनुसार विभिन्न कटौतियों और भत्तों के समायोजन के बाद 2017 में भारत में प्रभावी कर 44.1 प्रतिशत था। यह आंकड़ा 74 देशों में सर्वाधिक था। तेजी से उभरते दूसरे देशों जैसे रूस, इंडोनेशिया और चीन के मुकाबले यह दोगुना था। हालांकि इसके बाद भी भारत में कर कम नहीं हो रहा है, बल्कि सालों से स्थानीय कर दर में इजाफा हो रहा है। इसके मुकाबले दूसरे देशों में कॉर्पोरेट कर कम हो रहा है। ग्रांट थॉर्नटन में पार्टनर रियाज थिंगना कहते हैं,'पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने कॉर्पोरेट करों में कमी की है, जिससे भारत स्वत: ही अधिक कर लगाने वाला देश बन गया है।
  • सरकार सभी कंपनियों के लिए कर कम करके 25 प्रतिशत करने की बात कह चुकी है। उम्मीद की जा सकती है कि अब वह ऐसा करेगी।' हालांकि सरकार वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए संघर्ष कर रही है और ऐसे में उसके लिए कर की दर कम करना आसान नहीं होगा। भारत जैसे विकासशील देशों में कॉर्पोरेट कर राजस्व का अहम स्रोत होता है। यूबीएस सिक्योरिटीज के गौतम छाछरिया और तन्वी गुप्ता ने कहा कि भारत की वित्तीय स्थिति इस समय नाजुक है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

भारतीय शोधकर्ताओं ने आम की पत्तियों से बनाई ईको- फ्रेंडली जंगरोधी सामग्री

  • भारतीय शोधकर्ताओं ने आम की पत्तियों के अर्क से एक ईको- फ्रेंडली जंगरोधी सामग्री विकसित की है, जो लोहे को जंग से बचा सकती है। यह सामग्री तिरुवनंतपुरम स्थित राष्ट्रीय अंतरविषयी विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित की गई है। नई जंग-रोधी सामग्री का परीक्षण वाणिज्यिक रूप से उपयोग होने वाले लोहे पर विपरीत जलवायु परिस्थितियों में करने पर इसमें प्रभावी जंग-रोधकके गुण पाए गए हैं। आमतौर पर, लोहे के क्षरण को रोकने के लिए उस पर पेंट जैसी सिंथेटिक सामग्री की परत चढ़ाई जाती है, जो विषाक्त और पर्यावरण के प्रतिकूल होती है। लेकिन, आम की पत्तियों के अर्क से बनी कोटिंग सामग्री पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है।
  • पेड़-पौधों में जैविक रूप से सक्रिय यौगिक (फाइटोकेमिकल्स) पाए जाते हैं जो रोगजनक तत्वों और परभक्षियों को दूर रखते हैं और पौधों के सुरक्षा तंत्र के रूप में काम करते हैं। शोधकर्ताओं ने पौधों के इन्हीं गुणों का अध्ययन किया है और आम के पौधे में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स का उपयोग जंग-रोधी पदार्थ बनाने में किया है।

कैसे बनाया अर्क

  • शोधकर्ताओं ने एथेनॉल के उपयोग से आम की सूखी पत्तियों से फाइटोकेमिकल्स प्राप्त किया। सूखी पत्तियों में अधिक मात्रा में में जैविक रूप से सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। इसके बाद पत्तियों के अर्क की अलगअलग मात्रा का विद्युत-रासायनिक विश्लेषण किया। 200 पीपीएम अर्क के नमूनों में सबसे अधिक जंगरोधी गुण पाए गए हैं।
  • इस शोध में हमें पता चला है कि जैविक रूप से सक्रिय तत्व मिलकर एक खास कार्बधात्विक यौगिक बनाते हैं, जिनमें जंगरोधक गुण होते हैं। पत्तियों के अर्क में जंग-रोधी गुणों का परीक्षण जैव-रासायनिक प्रतिबाधा स्पेक्ट्रोस्कोपी और लोहे की सतह पर जंग का मूल्यांकन एक्स-रे फोटो-इलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोस्कोपी से किया गया है। इस तरह, शोधकर्ताओं को जैविक रूप से सक्रिय तत्वों की जंग-रोधी भूमिका के बारे में पता चला है। इस कोटिंग सामग्री को 99 प्रतिशत तक जंग-रोधी पाया गया है जो आम के पत्तों के अर्क के जंग-रोधक गुणों को दर्शाता है।
  • लोहे पर सिर्फ अर्क की परत टिकाऊ नहीं हो सकती। इसीलिए, शोधकर्ताओं ने अर्क को सिलिका के साथ मिलाकर मिश्रण तैयार किया गया है। इस मिश्रण को एक प्रकार की गोंद एपॉक्सी में मिलाकर कोटिंग सामग्री तैयार की गई है।

:: विविध ::

RAW चीफ बने 1984 बैच के आईपीएस सामंत गोयल, अरविंद कुमार बनाए गए IB डायरेक्टर

  • केंद्र सरकार ने आज देश की दो खुफिया विभागों में नए प्रमुखों की नियुक्ति की है। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे सामंत गोयल (Samant Goel) को देश की खुफिया एजेंसी RAW (Research and Analysis Wing) का प्रमुख नियुक्त किया गया है। इसके अलावा आइपीएस अधिकारी अरविंद कुमार (Arvind Kumar) को इंटेलिजेंस ब्यूरो का डायरेक्टर (Intelligence Bureau Head ) बनाया गया है।
  • सामंत गोयल और अरविंद कुमार दोनों ही1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। अनिल धमसाना की जगह सामंत गोयल को खुफिया एजेंसी RAW का प्रमुख बनाया गया है, जबकि अरविंद कुमार को राजीव जैन की जगह इंटेलिजेंस ब्यूरो का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।

अमेरिकी दूत सैम को महात्मा गांधी पुरस्कार से नवाजा गया

  • अमेरिकी विदेश मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मामलों के राजदूत सैम ब्राउनबैक को हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन(एचएएफ) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें विश्व के अनेक देशों में धार्मिक बहुलतावाद को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया। इस दिशा में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार और मलेशिया में अल्पसंख्यक हिंदु समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए ब्राउनबैक द्वारा किए गए कार्यो की सराहना की गई।
  • वाशिंगटन के कैपिटल हिल में आयोजित अपने 16वें वार्षिक समारोह के दौरान एचएएफ ने ब्राउनबैक की सराहना करते हुए कहा कि कई देशों में असुरक्षा का सामना कर रहे हिंदुओं की दशा सुधारने को लेकर उन्होंने अहम प्रयास किए। इससे विश्वभर में मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना को बल मिला। इस मौके पर ब्राउनबैक ने कहा कि हरेक व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना सरकार का दायित्व होता है।
  • समारोह के दौरान एचएएफ ने अमेरिकी सांसद ब्रैड शरमैन को फ्रेंड ऑफ द कम्यूनिटी अवार्ड से सम्मानित किया। अमेरिकी संसद में शरमैन द्वारा आवाज बुलंद किए जाने के बाद ही पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड और जैश-ए-मुहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा सका।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना किस नदी पर बनाई जा रही है? ( गोदावरी नदी)
  • सरकार के द्वारा कौन सी योजना तैयार की गई है जिसका उद्देश्य सरकार के घोषणा पत्र को समय पर लागू करना है? (इंडिया@75 सुशासन पहल और विज़न 2024 दस्तावेज)
  • प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के तहत गठित मधुमक्‍खी पालन विकास समिति (बीडीसी) की अध्यक्षता किसने की? (प्रो. देबरॉय)
  • हाल ही में किसे खुफिया एजेंसीRAW (Research and Analysis Wing) का प्रमुख नियुक्त किया गया है? (सामंत गोयल)
  • हाल ही में किसे इंटेलिजेंस ब्यूरो का डायरेक्टर (Intelligence Bureau Head ) बनाया गया है? (अरविंद कुमार)
  • हाल ही में किसको हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन(एचएएफ) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार से नवाजा गया है? (राजदूत सैम ब्राउनबैक)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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