(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 जून 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 जून 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

नीति आयोग हेल्थ इंडेक्स (NITI Aayog Health index)

  • देश के बड़े प्रदेशों में सबसे खराब स्वास्थ्य व्यवस्था उत्तर प्रदेश और बिहार में है। खास बात यह है कि इन दोनों राज्यों की स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती जा रही है। नीति आयोग के हैल्थ इंडेक्स 2019 पर ये दोनों राज्य देशभर में 21 बड़े प्रदेशों की रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर हैं जबकि केरल पहले नंबर पर, आंध्र प्रदेश दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर हैं। वहीं सात संघ शासित क्षेत्रों के हैल्थ इंडेक्स रैंकिंग में चंडीगढ़ पहले नंबर पर है जबकि दिल्ली पांचवें स्थान पर है।
  • आयोग ने यह इंडेक्स विश्व बैंक और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर जारी किया है। इसमें वर्ष 2017-18 में राज्यों के प्रदर्शन का आकलन किया गया है।
  • ''हेल्दी स्टे्टस प्रोग्रेसिव इंडिया'' शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े राज्यों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य का ओवरऑल हेल्थ इंडेक्स स्कोर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य की तुलना में ढाई गुना है। हेल्थ इंडेक्स पर 74.01 स्कोर के साथ केरल ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए देशभर में बड़े राज्यों में पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि 28.61 स्कोर के साथ उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है।
  • खास बात यह है कि वर्ष 2015-16 में हेल्थ इंडेक्स पर यूपी का स्कोर 33.69 था जो 5.08 अंक की गिरावट के साथ 28.61 पर आ गया है। इंडेक्स तैयार करते वक्त साल 2015-16 को आधार वर्ष माना गया है। जबकि 2017-18 को संदर्भ वर्ष माना गया है। इस तरह हेल्थ इंडेक्स पर बिहार का स्कोर भी 2015-16 में 38.46 से घटकर 32.11 पर आ गया है।
  • इस तरह इन दोनों राज्यों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसके अलावा उत्तराखंड के प्रदर्शन में भी बड़ी गिरावट आयी है। 2015-16 में हेल्थ इंडेक्स पर उत्तराखंड का स्कोर 40.20 था जो 2017-18 में बढ़कर 45.22 हो गया है। इसी तरह पंजाब, मध्य प्रदेश और दिल्ली का प्रदर्शन भी सुधरने के बजाय खराब हुआ है।
  • वहीं कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन में इस अवधि में खासा सुधार किया है। मसलन हेल्थ इंडेक्स पर हरियाणा की रैंकिंग वैसे तो 12वीं है लेकिन उसकी इंक्रीमेंटल रैंक पहली है। इसका मतलब यह हुआ है कि हरियाणा ने अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में तेजी से सुधार किया है। 2015-16 में हेल्थ इंडेक्स पर हरियाणा का स्कोर 46.97 था जो 2017-18 में बढ़कर 53.51 हो गया है।
  • इसी तरह राजस्थान और झारखंड का प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। वर्ष 2015-16 में हेल्थ इंडेक्स पर झारखंड का स्कोर 45.33 था जो 2017-18 में बढ़कर 51.33 हो गया है। ऐसे ही छत्तीसगढ़ भी अपना प्रदर्शन सुधारने में कामयाब रहा है। हिमाचल प्रदेश की छठी रैंक है और इसका प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। 2015-16 में हिमाचल प्रदेश का स्कोर 61.20 था जो 2017-18 में बढ़कर 62.41 हो गया है।

गुजरात राज्यसभा उपचुनाव:

  • गुजरात में राज्यसभा की खाली हुईं 2 सीटों पर एक साथ चुनाव की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए चुनाव आयोग को दोनों सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराने को हरी झंडी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात कांग्रेस से कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद हम दखल नहीं दे सकते। आप को चुनौती देना है तो बाद में चुनाव याचिका दाखिल कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है बल्कि विधायी अधिकार है। ऐसे में आप रिट नहीं लगा सकते। अमित शाह और स्मृति इरानी के लोकसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुईं दोनों सीटों के लिए 5 जुलाई को वोटिंग होगी लेकिन दोनों सीटों के लिए अलग-अलग वोटिंग होगी।
  • चुनाव आयोग की ओर से 15 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दोनों सीटों के लिए चुनाव 5 जुलाई को ही होने हैं। दोनों सीटों पर चुनाव अलग-अलग हो रहे हैं, लिहाजा विधायक एक बार में ही दोनों सीटों के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। आयोग के इस फैसले को गुजरात कांग्रेस के नेता परेश भाई धनानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बीजेपी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ओबीसी नेता जुगलजी ठाकोर को अपना उम्मीदवार बनाया है। आज ही नॉमिनेशन की आखिरी तारीख है।

अलग-अलग चुनाव पर कांग्रेस को क्या नुकसान?

गुजरात में विधानसभा की कुल 182 सीटें हैं, लेकिन फिलहाल इसके 175 सदस्य हैं। बीजेपी के पास 100 सीटें हैं जबकि कांग्रेस के पास 71 सीटें हैं। राज्यसभा की सीटों के लिए संबंधित राज्य के विधायक ही वोट देते हैं। इन विधायकों में से हर कोई दोनों सीटों के लिए 2 अलग-अलग बैलट से वोट देंगे। ऐसे में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए 88 वोटों की दरकार होगी। कांग्रेस के सिर्फ 71 विधायक हैं, लिहाजा उसका दोनों में से किसी पर भी जीत मुश्किल है।

एक साथ चुनाव से कांग्रेस को कैसे होता फायदा?

सबसे पहले तो राज्यसभा चुनाव के फॉर्म्युले को समझ लेते हैं। इसका फॉर्म्युला है: N= [T/(S+1)] +1 है। यहां N का मतलब जीत के लिए जरूरी वोट है। T का मतलब कुल वोटरों की संख्या (विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या) और S का मतलब रिक्तियां (जितनी सीटों पर चुनाव) हैं।

अब इस फॉर्म्युले को गुजरात में लागू करें तो वहां फिलहाल कुल 175 विधायक हैं। अगर एक साथ दोनों सीटों पर चुनाव होते तो फॉर्म्युले के हिसाब से जीत के लिए जरूरी वोट (N)= [175/(2+1)]+1, यानी (175/3)+1, यानी 58.33+1, यानी 59.33 वोट। इस तरह किसी उम्मीदवार को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 60 वोट जरूरी होंगे। ऐसे में कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत सकती थी क्योंकि सूबे में उसके 71 विधायक हैं।

अलग-अलग चुनाव के पक्ष में EC ने दी थी दलील

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा सहित दोनों सदनों की सभी रिक्तियों पर उपचुनाव के लिए उन्हें ‘अलग-अलग रिक्तियां’ माना जाएगा और अलग-अलग अधिसूचना जारी की जाएगी। चुनाव भी अलग-अलग होंगे। हालांकि इनका कार्यक्रम समान हो सकता है। चुनाव आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट के 1994 और 2009 के 2 फैसलों का भी जिक्र किया है, जो उसके फैसले का समर्थन करते हैं।

कांग्रेस की क्या थी दलील

कांग्रेस की दलील थी कि हाई कोर्ट के फैसले इस मामले में लागू नहीं होते क्योंकि वे अलग-अलग वर्षों (1989 और 1990) में खाली हुईं 2 सीटों से जुड़े थे और उनका कार्यकाल अलग-अलग समय पर खत्म हुआ था। जबकि मौजूदा मामले में दोनों ही सीटें एक साथ खाली हो रही हैं।

जम्मू कश्मीर राज्य को परिसीमन अधिनियम 2002 के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं किया गया

सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि जम्मू कश्मीर राज्य को परिसीमन अधिनियम 2002 के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि राज्य विधान सभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन संबंधी भारत के संविधान के अनुच्छेद 170 को जम्मू कश्मीर राज्य पर लागू नहीं किया गया है।

लोकसभा में असादुद्दीन औवैसी और अजय कुमार के प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि जम्मू कश्मीर राज्य में विधान सभा के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जम्मू कश्मीर संविधान की धारा 47 और 141 के तहत किया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ जम्मू कश्मीर राज्य को परिसीमन अधिनियम 2002 के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं किया गया है ।’’ रेड्डी ने कहा कि वर्तमान में जम्मू डिवीजन में 37,33,111 मतदाता, कश्मीर डिवीजन में 40,10,971 मतदाता तथा लद्दाख डिवीजन में 1,79,147 मतदाता हैं।

उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिये अभी तारीखों का निर्धारण नहीं किया है।

शहरों में व्‍यापक बदलाव के 4 वर्षों (2015-19) के दौरान प्रमुख मिशनों की प्रगति

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत और स्‍मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) में कुल आठ लाख करोड़ रुपये का निवेश
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 81 लाख से अधिक घरों के निर्माण को मंजूरी-48 लाख घरों का निर्माण विभिन्‍न चरणों में- 26 लाख घरों का निर्माण कर उन्हें सौंप दिया गया है- 13 लाख घरों का निर्माण नई प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया जा रहा – घर महिलाओं के नाम या संयुक्‍त स्‍वामित्‍व में उपलब्‍ध कराए गए हैं- सीएलएसएस के तहत 6.32 लाख से अधिक लोग लाभान्वित
  • अमृत योजना के तहत 64 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की 4,910 परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं/पूरी हो गई हैं- 62 लाख से अधिक स्‍ट्रीट लाइटों को हटाकर एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं-1,705 यूएलबी में ऑनलाइन निर्माण अनुमति प्रणालियां (ओबीपीएस) लागू की गई हैं, इनमें नागरिकों के जीवन को सरल बनाने के लिए 11 राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों में सभी यूएलबी भी शामिल हैं
  • 353 शहरों में पंपों की ऊर्जा लेखा परीक्षा पूरी हो गई है- 467 अमृत शहरों में पहले से पूरे किए गए कार्य की क्रेडिट रेटिंग पूरी हो चुकी है-163 शहरों को निवेश योग्य ग्रेड रेटिंग प्राप्‍त हो चुकी हैं-8 शहरों ने निगम बांड द्वारा 3,400 करोड़ रुपये जुटाए
  • 16 एकीकृत नियंत्रण और कमांड केंद्र संचालित हुए-नागरिकों को अनेक ऑनलाइन सेवाएं उपलब्‍ध कराने के लिए सहायता-अन्‍य 55 केंद्र कार्यान्‍वयन के विभिन्‍न चरणों में
  • 25 शहरों में 837 करोड़ रुपये लागत की स्‍मार्ट सड़कें पूरी हुई-94 शहरों में 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की स्‍मार्ट सड़क परियोजनाएं प्रगति के विभिन्‍न चरणों में
  • 15 शहरों में स्‍मार्ट सौर ऊर्जा परियोजनाएं पूरी हुई
  • 111 भारतीय शहरों को शामिल करते हुए जीवनयापन को सहज बनाने का सूचकांक 13 अगस्‍त, 2018 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्‍य विभिन्‍न शहरी पहलों के माध्‍यम से शहरी पर्यावरण में हुई प्रगति का आकलन करने में शहरों को समर्थ बनाना है। यह ढांचा 4 स्‍तंभों – संस्‍थागत, सामाजिक, आर्थिक और वस्‍तुगत में जीवनयापन को सहज बनाने का मापन करता है। इस बारे में सबसे अच्‍छा काम करने वाले शहर हैं - पुणे, नवी मुंबई, वृह्त मुंबई, तिरूपति और चंडीगढ़।

शहरों में व्‍यापक बदलाव हेतु चल रही योजनायें-

इंडिया स्‍मार्ट सिटीज फेलोशिप प्रोग्राम: 39 युवा प्रोफेशनलों का चयन शहरी नियोजन एवं डिजाइन और संबंधित मुद्दों के क्षेत्र में स्‍मार्ट सिटी फेलो के रूप में किया गया है। ये प्रोफेशनल आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में स्‍मार्ट सिटी के मिशन निदेशक के कार्यालय और/अथवा चुनिंदा स्‍मार्ट सिटी के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को विश्लेषिकी, अनुसंधान, प्रलेखन इत्‍यादि के संदर्भ में आवश्‍यक सहयोग देंगे।
जीवन यापन में सुगमता सूचकांक 2019: सूचकांक को बेहतर करके के तहत एक नया संस्‍करण ‘जीवन यापन में सुगमता सूचकांक 2019’ शुरू किया गया है, जिसके तहत परिणामों पर ज्‍यादा फोकस किया जा रहा है और जिसका उद्देश्‍य समस्‍त तीनों स्‍तम्‍भों में लोगों के जीवन यापन में सुगमता का आकलन करना है।

भारत शहरी वेधशाला: आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में एक अत्‍याधुनिक भारत शहरी वेधशाला में परिचालन शुरू हो गया है। यह वेधशाला शहरों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और सरकारों के लिए विश्लेषिकी के माध्यम से अंतर्दृष्टि पैदा करने के लिए वास्तविक समय और अभिलेखीय दोनों ही स्रोतों से शहरों से प्राप्‍त होने वाले डेटा के विभिन्न स्रोतों से जुड़ी होगी। यह साक्ष्य नीति निर्माण की दिशा में उल्‍लेखनीय योगदान देगी।

स्‍मार्ट सिटी डिजिटल भुगतान पुरस्‍कार -2018 : भारत के शहरी निवासियों के जीवन यापन में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की पहल के तहत स्‍मार्ट सिटी डिजिटल भुगतान पुरस्‍कार (एससीडीपीए) 2018 ‘100 स्‍मार्ट सिटी में 100 दिनों की चुनौतियां’ का शुभारंभ 9 जुलाई, 2018 को किया गया था।

नवाचार, एकीकरण और निरंतरता के लिए शहरों में निवेश (सिटीज) चैलेंज : नवाचार, एकीकरण और निरंतरता के उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए स्‍मार्ट सिटी मिशन के तहत जुलाई, 2018 में एएफडी, ईयू और एनआईयूए की साझेदारी में एक ‘सिटीज चैलेंज’ का शुभारंभ किया गया था। 36 स्‍मार्ट सिटी से प्राप्‍त 67 प्रस्‍तावों में से 13 परियोजनाओं का चयन 100 मिलियन यूरो के निवेश के लिए किया गया था। 26 फरवरी, 2019 को स्‍मार्ट सिटी के सीईओ के दूसरे शिखर सम्‍मेलन के दौरान ‘सिटीज पुरस्‍कार’ प्रदान किए गए थे।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

गुथी (न्यास) विधेयक

  • नेपाल सरकार को एक सप्ताह तक चले जोरदार आंदोलन के बाद नेशनल असेंबली में प्रस्तुत विवादास्पद गुथी (न्यास) विधेयक को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। पड़ोसी देश की सरकार ने मंगलवार को औपचारिक रूप से विधेयक वापस ले लिया।
  • प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अगुआई वाली सरकार ने गुथी अधिनियम में संशोधन के लिए संसद में विधेयक पेश किया था। इसके तहत सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार की गुथियों का राष्ट्रीयकरण किया जाना तथा एक शक्तिशाली आयोग के माध्यम से सभी धार्मिक स्थलों को विनियमित किया जाना प्रस्तावित था।
  • पुरातन नेवार समुदाय का मानना था कि इस विधेयक के पास होने के बाद सनातन हिदू परंपरा खतरे में आ जाएगी।
  • इसके खिलाफ नेवार समुदाय के लोगों ने एक सप्ताह तक जोरदार आंदोलन चलाया। पिछले हफ्ते ही काठमांडू के मैतीघर मंडला में लगभग 50 हजार लोगों ने रैली निकालकर अपना विरोध जताया।
  • आंदोलनकारियों का तर्क था कि प्रस्तावित विधेयक से सार्वजनिक गुथियों में नेताओं, सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों का प्रवेश संभव हो जाएगा और वे इसकी हजारों हेक्टेयर जमीन का गबन कर लेंगे।

:: आर्थिक समाचार ::


इस वित्त वर्ष में बैंकों का NPA घटकर 8 फीसद रह जाएगा: Crisil

वसूली प्रक्रिया में तेजी आने और ताजा बैड लोन में कमी के कारण मार्च 2020 तक बैंकों के गैर-निष्पादित ऋण (NPA) में करीब 8 फीसद की कमी आने की संभावना है। न्यूज एजेंसी पीटीआइ ने एक रिपोर्ट के हवाले से यह खबर दी है। बैंकिंग प्रणाली में एनपीए मार्च 2018 में 11.5 फीसद के स्तर तक पहुंच गया था जिसमें अब कमी आई है और यह मार्च 2019 में घटकर 9.3 फीसद रह गया है।

रेटिंग, रिसर्च और सलाहकार सेवा प्रदाता क्रिसिल (Crisil) के मुताबिक मार्च 2020 तक बैंकों की सकल एनपीए (NPA) 350 आधार अंक घट कर 8% रह जाएगी। क्रिसिल ने एक नोट में लिखा, "इस वित्त वर्ष (FY20) में बैंकों की परिसंपत्ति की गुणवत्ता में एक निर्णायक बदलाव हो सकता है, जिससे सकल एनपीए 350 आधार अंकों तक घटकर 8 फीसद हो जाएगा। ऐसा ताजा एनपीए बढ़ने की दर में गिरावट और मौजूदा एनपीए खातों से वसूली में तेजी लाने से होगा।”

रेटिंग, रिसर्च और सलाहकार सेवा प्रदाता क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमन के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष के दौरान राइट-ऑफ और मुख्य बड़ी दबावग्रस्त संपत्तियों में दिवालिया कानून के तहत वसूली ने एनपीए की कटौती में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

क्रिसिल के अनुसार, वास्तव में एनपीए में गिरावट का दौर पिछले वित्त वर्ष से शुरू हुआ था। वित्त वर्ष 2017-18 में 7.4% की तुलना में 2018-19 में ताजा एनपीए बढ़ने की दर घट कर 3.7% रह गयी थी। यह बैंकों द्वारा पहले से ही वित्त वर्ष 2015-16 से 17 लाख करोड़ रुपये के दबावग्रस्त ऋणों की एनपीए के रूप में पहचान करने से संभव हो पाया। साथ ही इस सुधार के पीछे की बड़ी वजह आरबीआई के कड़े मानदंडों और संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा के बाद एनपीए की पहचान करने में तेजी लाना भी है। एनपीए में कमी होना बैंकिंग सेक्टर के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों पर गठित विशेषज्ञ समिति ने पेश की अपनी रिपोर्ट

समिति की अहम सिफरिशें
  • वेंचर कैपिटल और निजी इक्विटी फर्मों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का कोष
  • एमएसएमई क्षेत्र के लिए होना चाहिए 20 लाख रुपये तक रेहन मुक्त ऋण
  • कंपनियों को बाहरी संकट से बचाने के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का कोष
  • इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में सिडबी की होगी अहम भूमिका
  • उधार लेने वालों के लिए ऋण सेवा प्रदाताओं की स्थापना
  • एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए अधिक परिषदों के गठन की सिफारिश
  • जटिल कानूनों के बजाय व्यापक एमएसएमई संहिता
  • एमएसएमई को मिले दोगुना ऋणबढ़ती महंगाई को देखते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पर गठित विशेषज्ञ समिति ने इस क्षेत्र के लिए गिरवी मुक्त ऋण दोगुना कर 20 लाख रुपये करने की सिफारिश की है। इसमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) और स्वयं-सहायता समूह आधारित इकाइयां भी शामिल हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्व अध्यक्ष यू के सिन्हा की अगुआई वाली इस समिति ने साथ ही बाहरी परिस्थितियों के कारण पैदा हुए संकट से इस क्षेत्र को बचाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का कोष बनाने का भी सुझाव दिया है।
  • समिति का साथ ही कहना है कि एमएसएमई को विभिन्न विभागों में पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होनी चाहिए और उन्हें केवल स्थायी खाता संख्या (पैन) देकर ही अपनी अधिकांश गतिविधियों को चलाने की अनुमति होनी चाहिए। एमएसएमई को अपना कौशल बढ़ाने में मदद करने वाले निजी क्षेत्र को करों में छूट या बॉन्ड के रूप में प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। इस खंड में निजी क्षेत्र का योगदान मामूली है लेकिन उनके पास शोध एवं विकास की जो सुविधाएं हैं, वे काफी अहम हैं। सरकार को खासकर उत्पाद विकास, प्रौद्योगिकी अपनाने और विपणन रणनीति में एमएसएमई क्षेत्र के कौशल को विकसित करने की जरूरत है।
  • समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार को एमएसएमई क्षेत्र में निवेश करने वाली वेंचर कैपिटल और निजी इक्विटी फर्मों की मदद के लिए सिडबी द्वारा विकसित संशोधित शर्तों पर 10,000 करोड़ रुपये का एक फंड ऑफ फंड्स बनाना चाहिए। इससे सौदे की शर्तों और उत्पादन ढांचे में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
  • खराब प्रदर्शन करने वाली एमएसएमई के खातों के पुनर्गठन के बारे में समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि किसी एमएसएमई के खाते को छह महीने के संतोषजनक प्रदर्शन के बाद स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जा सकता है। अभी इसमें एक साल का प्रावधान है। जिस एमएसएमई के खाते को स्टैंडर्ड में बदला जाना है, उसके पास छह महीने के स्थायी प्रदर्शन के अलावा कारोबार में अतिरिक्त इक्विटी होनी चाहिए या नकदी प्रवाह का नया स्रोत होना चाहिए।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जनवरी में एमएसएमई खातों के पुनर्गठन के लिए एकमुश्त योजना की घोषणा की थी लेकिन मूल रूप से यह योजना उन खातों के लिए है जो अब भी मानक है। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक एनपीए बन चुके एमएसएमई खातों के लिए बैंकों को उस दिन 15 फीसदी प्रावधान करना होता है जिस दिन वे एनपीए बनते हैं। समिति का कहना है कि ऐसे खातों के लिए बैंकों को एक साल तक प्रावधान करने की जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन बैंकर ऐसे खातों के पुनर्गठन से हिचकते हैं।
  • एमएसएमईडी कानून अपने उद्देश्य में सफल रहा है लेकिन अब वक्त आ गया है कि एमएसएमई क्षेत्र में बाजार में पहुंच बढ़ाने और कारोबार को आसान बनाने के उपायों पर जोर होना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है, 'इस कानून को व्यापक एमएसएमई संहिता में बदला जा सकता है और विभिन्न जटिल कानूनों को तिलांजलि दी जा सकती है। नए कानून में क्षेत्राधिकार आधारित और मनमानी निरीक्षण व्यवस्था के स्थान पर नीति आधारित और पारदर्शी निरीक्षण व्यवस्था लाई जा सकती है।'
  • समिति का कहना है कि इस कानून से एमएसएमई क्षेत्र की बड़ी चुनौतियों का समाधान होना चाहिए। इनमें बुनियादी ढांचे से जुड़ी बाधाएं, औपचारिक स्वरूप का अभाव, प्रौद्योगिकी अपनाना, क्षमता निर्माण, बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज, क्रेडिट तक पहुंच का अभाव, पूंजी जोखिम और भुगतान में देरी की समस्या शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन समस्याओं के कारण एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल नहीं मिल पा रहा है। समिति के अनुसार एमएसएमई क्षेत्र की क्षमताओं के पूर्ण इस्तेमाल और इसकी रफ्तार बनाए रखने के लिए उद्यमशीलता का माहौल तैयार करना खासा अहम है। अन्य सिफारिशों में समिति ने एमएसएमई को आ रही भुगतान में देरी की समस्या दूर करने के लिए एमएसएमईडी कानून में संशोधन की जरूरत बताई है।
  • समिति ने कहा कि इसके तहत सभी एमएसएमई को एक निश्चित रकम से ऊपर के सभी बिल अनिवार्य रूप से अपलोड करना चाहिए। समिति के अनुसार निगरानी करने वाली इकाई का भी गठन किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है, 'इस प्रणाली से भुगतान नहीं करने वाले खरीदारों के नाम स्वत: ही दिख जाएंगे। इसके साथ ही खरीदारों पर भी एमएसई आपूर्तिकर्ताओं को रकम जारी करने का दबाव बढ़ेगा।' फाइनैंस इंडस्ट्री डिपार्टमेंट काउंसिल (एफआईडीसी) के चेयरमैन रमन अग्रवाल ने इसे एक एक अच्छी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे एमएसएमई क्षेत्र को बड़े स्तर पर मदद देने के लिए एनबीएफसी को अनुमति मिल जाएगी।

सरकार ने GI लोगो और टैगलाइन के उपयोग पर जारी किए दिशानिर्देश

रिटेल स्टोर या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स भारतीय ज्योग्रैफिकल इंडिकेशन (जीआइ) उत्पादों पर प्रदर्शन के लिए जीआइ लोगो और टैगलाइन का इस्तेमाल उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) की पूर्व मंजूरी लेकर कर सकेंगे। यह बात वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देश में कही गई है। जीआइ मुख्यत: ऐसे कृषि, प्राकृतिक या मैन्युफैक्चर्ड (हस्तशिल्प और औद्योगिक वस्तु) उत्पाद होते हैं, जिनका उत्पादन एक खास भौगोलिक क्षेत्र में होता है।

मंत्रालय के तहत काम करने वाले डीपीआइआइटी ने कहा कि उसने जीआइ उत्पादों के प्रचार और मार्केटिंग के लिए अनेक कदम उठाए हैं। जीआइ के रूप में पंजीकृत भारतीय उत्पादों के प्रचार और मार्केटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए डीपीआइआइटी ने अगस्त 2018 में एक साझा जीआइ लोगो और टैगलाइन लांच किया था। जीआइ लोगो और टैगलाइन के उपयोग की अनुमति देने के लिए दिशानिर्देश का मसौदा जारी करते हुए डीपीआइआइटी ने कहा कि यह लोगो प्रमाणीकरण मार्क के रूप में काम करेगा। इसका उपयोग जीआइ के रूप में पंजीकृत सभी भारतीय उत्पादों की पहचान सुनिश्चित करने में किया जा सकेगा, चाहे वह किसी भी श्रेणी का हो।

मसौदे में कहा गया है कि जीआइ लोगो और टैगलाइन का स्वामित्व सचिव के जरिये डीपीआइआइटी के पास रहेगा। डीपीआइआइटी ने दिशानिर्देश के मसौदे पर विभिन्न पक्षों की टिप्पणी आमंत्रित की है। मसौदे में कहा गया है कि समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और इंटरनेट के जरिये आलेख और ब्लॉग्स में लोगो और टैगलाइन को प्रकाशित करने के लिए भी डीपीआइआइटी से पहले मंजूरी लेना जरूरी होगा। मसौदे में कहा गया है कि जीआइ लोगो और टैगलाइन का प्रकाशन करने की अनुमति देने के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

मुजफ्फरपुर में एईएस पीड़ितों में मिला नया मम्प्स वायरस

मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के ब्लड सैंपल में एक नया वायरस मिलने से चिंताएं बढ़ गई है। पीड़ित बच्चों के ब्लड सैंपल की जांच लखनऊ स्थित किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में की गई है। वहां भेजे गए 150 से भी अधिक ब्लड सैंपल में से कई सैंपल में मम्प्स वायरस मिला है।

नए वायरस के बारे में सघन जांच और स्टडी चल रही है। वह इसके बारे में ठीक-ठीक आगामी 3-4 दिनों में ही पुष्टि कर सकेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एईएस पीड़ितों में मम्प्स वायरस मिले हैं तो यह आश्चर्यजनक है कि इससे इतनी जल्दी बच्चों की मौत कैसे हुई?

पूरे बिहार में एईएस संबंधी पहले से जो रिसर्च हुए है, उनमें स्क्रब टाइफस नामक पैरासाइट पाया गया है। स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो जानलेवा है। इसके लक्षण चिकनगुनिया जैसे होते हैं। यह पैरासाइट दूसरे राज्यों के एईएस पीड़ितों में नहीं पाया गया है। एईएस में स्क्रब टाइफस पाए जाने पर मरीज का इलाज कर उसकी जिंदगी बचाना संभव है, क्योंकि इसके लिए एजीथ्रोमाइसीन नामक दवा कारगर है। एईएस के लक्षण दिखने पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीड्योर में इस दवा को देने के निर्देश दिए गए हैं।

मुजफ्फरपुर से भेजे नहीं गए सीएफएस सैंपल

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच से इस साल एईएस के फैलने के बाद पीड़ितों के 138 ब्लड सैंपल भेजे गए है। ये सैंपल काफी सावधानी से बर्फ में रखकर पीड़ित बच्चों के सेरीब्रो स्पाइनल फ्लूड (सीएसएफ) जांच के लिए भेजे जाने थे, हालांकि इनमें से अब तक एक भी सैंपल केजीएमयू को नहीं मिला है। सीएफएस मस्तिष्क का एक तरह का पानी होता है, जो पीड़ित की रीढ़ की हड्डी से निकाला जाता है। बच्चों में यह पानी काफी कम मात्रा में होता है। इसके अलावा जो बच्चे होश में हो उनसे ही यह सैंपल लिया जाता है, इसलिए शायद ज्यादा सैंपल लिए नहीं जा सके हैं।

बिहार में बनी हैं दो रिसर्च कमेटियां

बिहार में एईएस पर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए दो टीम बनाई गई हैं। जिसमें पहली पीएमसीएच और दूसरी एसकेएमसीएच में है। यह प्रोजेक्ट इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट से स्वीकृत है और केजीएमयू की सरपरस्ती में पिछले तीन सालों से चल रहा है। यहां से भेजे गए सैंपल की जांच केजीएमयू में होती है।

स्पेसएक्स ने लांच किया तीसरा ‘फॉल्कन रॉकेट’

अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स ने मंगलवार को देर रात 24 सैटेलाइटों के साथ अपने तीसरे भारी ‘फॉल्कन रॉकेट’ को लांच कर दिया है। इस बार इस रॉकेट में सोलर सेल, हरित ईंधन के साथ-सात मानव अस्थियां भी भेजी गईं हैं। स्पेप एक्स के वैज्ञानिकों ने कहा कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी लांचिंग के कुछ मिनटों बाद ही रॉकेट के दोनों बूस्टर कैप कनेवरल में वापस आ गए। लेकिन इस बार बूस्टर समुद्र में अपने निश्चित प्लेटफॉर्म पर नहीं उतरा। उन्होंने कहा कि इस मिशन को एक मुश्किल मिशन के रूप में याद किया जाएगा।

अंतरिक्ष का चक्कर लगाएगा ‘फ्यूनरल फ्लाइट’

  • इससे पहले सोमवार को स्पेस एक्स ने एक कार्गो भी अंतरिक्ष में भेजा था , जो 152 लोगों की अस्थियों को अपने साथ ले गया है। इसे ‘फ्यूनरल फ्लाइट’ का नाम दिया गया है। इन अस्थियों को खास तौर पर डिजाइन किए गए यह कैप्सूल में रखा गया है, जो बाहर से ‘टाइम कैप्सूल’ की तरह ही होंगे, यानी उनके ऊपर अस्थियां किसकी हैं, क्या करता था, कहां का रहने वाला है आदि जानकारियां भी दर्ज होंगी।
  • मानव अस्थियों से भरे सभी कैप्सूल एक सैटेलाइट के भीतर रखे गए हैं। यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में अपनी उम्र पूरी होने तक चक्कर लगाता रहेगा। इससे पहले फॉल्कन स्पेस फ्लाइट के 1994 से 15 अलग-अलग रॉकेटों से मानव अस्थियां अंतरिक्ष में भेज चुकी हैं।

3D प्रिंटेड ई-बाइक

  • इलेक्ट्रिक बाइक नेरा ( NERA ) तैयार की गई है, इस बाइक की खासियत ये है कि ये बाइक दुनिया की पहली 3डी प्रिंटेड फंक्शनल इलेक्ट्रिक बाइक है।
  • जर्मन कंपनी बिग रीप और नॉउ लैब ने हाल ही में इलेक्ट्रिक बाइक नेरा (NERA) तैयार की है। इस बाइक की खासियत ये है कि ये बाइक दुनिया की पहली 3डी प्रिंटेड फंक्शनल इलेक्ट्रिक बाइक है।

:: विविध ::

भारतीय तटरक्षक के नए चीफ कृष्‍णस्‍वामी नटराजन, 30 जून को संभालेंगे कार्यभार

  • भारतीय तटरक्षक के अगले चीफ के तौर पर मंगलवार को के नटराजन को नियुक्‍त किया गया है। 30 जून को रिटायर हो रहे राजेंद्र सिंह की जगह कृष्‍णस्‍वामी नटराजन लेंगे।

Indo French joint exercise Garuda: फ्रांस के साथ वायुसेना का होगा सबसे बड़ा छठा गरुड़ अभ्यास

  • भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट फ्रांस के लड़ाकू राफेल विमान के साथ गरुड़ -सीरीज एरियल वॉर गेम्स में भाग लेने के लिए मंगलवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गए। दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच होने जा रहे सबसे बड़े हवाई युद्धाभ्यास में, भारतीय दल को राफेल विमानों के साथ उड़ान भरने का मौका मिलेगा, जो इस साल सितंबर से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में शामिल होने जा रहे हैं।
  • भारत और फ्रांस दोनो ही देशों के आपसी सैन्य संबंधों को मजबूती देने के लिए यह व्यापक वायुसैनिक अभ्यास किया जा रहा है। गरुड़ अभ्यास के तहत वायुसेना के सुखोई 30 लड़ाकू विमानों के बेड़े के साथ ही हवा में ईंधन भरने वाले विमान आईएल-78 को भी फ्रांस भेजा गया है। वायुसेना की भागीदारी में सुखोई -30 एमकेआई, आईएल-78 टैंकर एयरक्राफ्ट और इलयुशिन आईएल-76 अवाक्स एयरबोन शामिल है।

भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रक्षा संबंध

  • गौरतलब है कि युद्ध-नीति साझेदारी पर भारत और फ्रांस के बीच जनवरी 1998 में हस्ताक्षर किए गए थे। सन् 2003 से गरुड़ युद्ध अभ्यास कभी भारत में तो कभी फ्रांस में आयोजित हो रहा है। पहला गरुड़ फरवरी 2003 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आयोजित किया गया था। तब से विभिन्न गरुड़ युद्ध अभ्यास फ्रांस और भारत में आयोजित किए गए हैं। पांचवा इंडो-फ्रांस एयर अभ्यास गरुड़ 2004 में वायुसेना के जोधपुर स्थित स्टेशन पर आयोजित किया गया था।
  • इससे पहले भारत और फ्रांस ने हाल ही में अरब सागर में वरुणा सीरीज के तहत नौसैनिक अभ्यास आयोजित किया था, जिसमें भारतीय नौसेना के लड़ाकू विमानों ने फ्रांसीसी वायुसेना के राफेल-एम के साथ भाग लिया था। भारत और फ्रांस रणनीतिक साझेदार हैं और पिछले कई वर्षो में अपने रणनीतिक सहयोग को बढ़ा रहे हैं।
  • भारत ने प्रोजेक्ट 75 के तहत अपनी नौसेना के लिए स्कॉर्पीन के रूप में फ्रांसीसी पनडुब्बियों का विकल्प भी चुना है। पिछले कई वर्षो से परस्पर सहयोग में इजाफा कर रहे भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच वर्ष 2016 में 36 राफेल विमानों का सौदा हुआ है। पहले राफेल विमान को इसी साल सितंबर में भारत आना है।

राष्ट्रमंडल खेलों से हटने का एकतरफा फैसला नहीं कर सकता आईओए, सरकार से मशविरा करना होगा : रीजीजू

खेल मंत्री कीरेन रीजीजू ने मंगलवार को कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) 2022 में होने वाले बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों से हटने का एकतरफा फैसला नहीं कर सकता है। आईओए ने इन खेलों से निशानेबाजी को हटाये जाने के बाद बहिष्कार की धमकी दी है।

पिछले सप्ताह राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) ने बर्मिंघम खेलों से निशानेबाजी को बाहर रखने का फैसला किया था जबकि तीन नये खेलों को शामिल करने की सिफारिश की थी। यह फैसला भारत के लिये बड़ा झटका है क्योंकि गोल्ड कोस्ट खेल 2018 में उसने कुल 64 पदकों में से 16 पदक निशानेबाजी में जीते थे। इसके बाद आईओए ने कहा था कि वह इन खेलों से हटने पर विचार कर रहा है।

प्रिलिमिस बूस्टर

  • हाल ही में राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) ने बर्मिंघम खेलों से किस खेल को बाहर रखने का फैसला किया है? (निशानेबाजी)
  • हाल ही में होने वाला गरुड़ युद्धाभ्यास किन-किन देशों के बीच आयोजित किया जाता है? (भारत और फ्रांस)
  • हाल ही में किसको भारतीय तटरक्षक बल का चीफ नियुक्त किया गया है? (कृष्‍णस्‍वामी नटराजन)
  • इलेक्ट्रिक बाइक कनेरा को किस कंपनी के द्वारा तैयार किया गया है? (जर्मन कंपनी बिग रीप और नॉउ लैब)
  • किस अंतरिक्ष कंपनी के द्वारा ‘फ्यूनरल फ्लाइट’ को अंतरिक्ष में भेजा गया? (स्पेस एक्स)
  • हाल ही में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पर गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस समिति की अध्यक्षता किसने की? (यू के सिन्हा)
  • नीति आयोग के हैल्थ इंडेक्स 2019 में कौन सा राज्य प्रथम स्थान पर रहा? (केरल)
  • नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स 2019 में कौन सा राज्य सबसे निचले पायदान पर है? (उत्तर प्रदेश)
  • नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स 2019 में कौन सा केंद्र शासित प्रदेश अव्वल स्थान पर रहा? (चंडीगढ़)
  • कौन से देश के द्वारा देश के द्वारा विवादास्पद गुथी (न्यास) विधेयक प्रस्तुत किया गया? (नेपाल)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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