(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 जुलाई 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 जुलाई 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

इंडियन स्पेस एक्स’

  • भविष्य के युद्ध मैदानों में नहीं होंगे और न ही इनमें बंदूक और तोपों का इस्तेमाल होगा। आने-वाले दिनों की इन जंगों को अंतरिक्ष में लड़ा जाएगा। विशुद्ध तकनीक और उपग्रह आधारित इस जंग में जो विजेता होगा वही दुनिया पर हुकूमत करेगा। स्पेस वार (अंतरिक्ष में जंग) के लिए खुद को तैयार करने के लिए तमाम देश तेजी से जुटे हैं। इस तैयारी में भारत भी पीछे नहीं है। भारत इस आशय का ‘इंडियन स्पेस एक्स’ नामक दो दिवसीय युद्धाभ्यास आज यानी 25 जुलाई से शुरू कर रहा है जिसमें देश की तीनों सेनाएं और मशहूर वैज्ञानिक शामिल होंगे।
  • इसी साल 27 मार्च को भारत ने अपने एक सक्रिय सेटेलाइट को धरती से मिसाइल दाग कर मार गिराया था। इसे एंटी सेटेलाइट वीपन (ए-सैट) कहा गया। इस सफल ऑपरेशन ने भारत को स्पेस वार में सक्षम देशों के बरक्स खड़ा कर दिया था।
  • अंतरिक्ष में मौजूद किसी सेटेलाइट को मार गिराने की क्षमता भारत समेत चार देशों के पास ही है। अमेरिका, रूस और चीन के पास यह तकनीक मौजूद है।
  • कोई भी नई तकनीक की खोज के साथ उसे कैसे खत्म किया जा सकता है, यह बात भी वैज्ञानिकों के दिमाग में आती है। लिहाजा अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे किसी सेटेलाइट को नष्ट करने का विचार अमेरिकी वैज्ञानिकों के पास स्पुतनिक को छोड़ने के एक साल बाद यानी 1958 में आ गया था। तभी इसने पहला ए-सैट परीक्षण किया, लेकिन विफलता हाथ लगी। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ ने यह तकनीक विकसित की।
  • चार देशों के पास ही यह क्षमता है कि वे अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे किसी देश के सेटेलाइट को पल में तबाह कर दें। लेकिन अब तक ऐसा किसी ने नहीं किया है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ये चारों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। अगर भूल से भी ऐसी घटना होती है तो दुनिया के सामने बहुत भयावह स्थिति होगी।
  • अमेरिका ने तो ऐसे एंटी सेटेलाइट वीपन या मिसाइल तैयार कर लिए हैं जिसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है। इनमें परमाणु मिसाइलें भी शामिल हैं। चीन ने अपना पहला ए-सैट परीक्षण 2007 में अंजाम दिया।
  • हमारे रोजमर्रा के ज्यादातर काम आज सेटेलाइट के बूते चल रहे हैं। आवागमन हो, संचार हो, मौसम या मनोरंजन। सैन्य गतिविधियां भी इसी सेटेलाइट पर आश्रित हैं। ऐसे में दुश्मन देश के सेटेलाइट को निशाना बनाकर उसे घुटने टेकने पर विवश किया जा सकता है। उसके लड़ाकू विमान, युद्धपोत, मिसाइल जखीरा सब खड़े के खड़े रह जाएंगे। उसका वह इस्तेमाल ही नहीं कर सकेगा।

आंध्र में प्राइवेट नौकरियों में स्थानीय लोगों को मिलेगी 75 फीसद हिस्सेदारी

  • आंध्र प्रदेश में निजी क्षेत्र में 75 फीसद नौकरियां स्थानीय लोगों को मिलेगी। इससे संबंधित कानून 'आंध्र प्रदेश एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल केंडिटेट इन इंडस्ट्रीज एंड फैक्ट्रीज एक्ट 2019' को विधानसभा ने बुधवार को मंजूरी दे दी। बिल के प्रावधानों को बताते हुए श्रम मंत्री गुमानुर जयराम ने बताया कि नए कानून के मुताबिक प्रदेश में सभी प्रकार की औद्योगिक इकाइयों, फैक्ट्री, संयुक्त उद्यम समेत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में चल रही सभी परियोजनाओं में 75 फीसद नौकरियां स्थानीय लोगों को देनी होंगी।
  • यह काम उनको आगामी तीन साल में पूरा करना होगा। यदि कंपनियों को उनकी आवश्यकता के अनुसाार स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा नहीं मिलते हैं तो वे सरकार के साथ मिलकर ऐसे लोगों को तीन साल में प्रशिक्षण देकर नौकरी के लायक बनाएंगी। श्रम मंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। इसके लिए निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाता है। यह ठीक है कि भूमि के बदले उनके मालिकों को मुआवजा दिया जाता है, लेकिन इन लोगों को अपनी जगह से विस्थापित होने के साथ ही नियमित होने वाली आय से भी हाथ धोना पड़ता है।
  • कुछ मामलों में देखा गया है कि फैक्ट्री में स्थानीय लोगों को काम देने के नाम पर उन्हें माली, हाउसकीपिंग और अन्य कम पैसे वाली नौकरियों पर रखा जाता है। इससे स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा होता है। इस समस्या को हल करने के लिए स्थानीय युवाओं के लिए कम से कम 75 प्रतिशत नौकरियां कानूनी रूप से सुनिश्चित करना जरूरी था। सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस ने प्रस्तावित कानून को ऐतिहासिक बताया है। मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि प्रत्येक लोकसभा में इंजीनियरिग कॉलेजों के सहयोग से कौशल विकास केंद्र खोले जाएंगे।

राज्य अपनी योजना के लिए भी अब कर सकेंगे आधार का उपयोग

  • अब तक राज्य सरकारें अपनी योजना लागू करने के लिए कई तकनीकी वजहों से आधार का प्रयोग नहीं कर पाती थी. अब राज्य सरकार की योजनाओं और सब्सिडी के लिए भी आधार के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधार एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2019 में लाए गए आधिकारिक बदलावों को मंजूरी दे दी है. आधार कानून के इस संशोधन के तहत एक नया प्रावधान शामिल किया जा रहा है जिससे आधार के आंकड़ों का इस्तेमाल राज्य सरकार की योजनाओं और सब्सिडी के लिए किया जा सकेगा.
  • आधार कानून में संशोधन के बाद राज्य के समेकित कोष द्वारा वित्त पोषित योजनाओं के लिए राज्य सरकारें राष्ट्रीय बायोमीट्रिक पहचान आधार का इस्तेमाल कर सकेंगी.
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा, "राज्य इसकी मांग काफी समय से कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ऐसे मामलों में आधार के इस्तेमाल की अनुमति है, जहां फंड सीधे केंद्र सरकार से आता है. इस वजह से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए जिस तरीके से केंद्रीय फंड से सब्सिडी लाभार्थी को स्थानांतरित की जाती है उसी तरह आधार के इस्तेमाल से राज्य सरकार की सब्सिडी को भी ट्रांसफर किया जा सकेगा."
  • संसद में इससे पहले जुलाई में ही आधार एवं अन्य कानून में संशोधन को मंजूरी दी गई थी. यह संशोधन मोबाइल फोन का सिम कार्ड लेने या बैंक खाता खोलने के लिए 12 अंकों की इस विशिष्ट पहचान संख्या का इस्तेमाल स्वैच्छिक रूप से करने की अनुमति दिए जाने से संबंधित था. मोदी सरकार ने अब इसमें एक नया प्रावधान जोड़ने के लिये संशोधन का प्रस्ताव किया है जिसमें राज्य सरकारों को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आधार के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने का प्रावधान है.
  • विधेयक को संसद में पेश किए जाने के बाद संबंधित प्रावधान को जोड़ा गया है. ऐसे में मंत्रिमंडल की मंजूरी बाद में दी गई सहमति की तरह है. आधार एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2019 में एक नई धारा 5A को जोड़ा गया है. इसमें कहा गया है कि प्रमुख कानून की धारा 7 में भारत के समेकित कोष के साथ ही 'राज्य का समेकित कोष’ शब्द जोड़ा गया है.

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

श्रीलंका की मुफ्त वीजा सेवा

  • श्रीलंका ने देश के पर्यटन क्षेत्र को फिर पटरी पर लाने के लिए आगमन पर मुफ्त वीजा सेवा को फिर शुरू करने की घोषणा की है। यह सेवा एक अगस्त से प्रभावी होगी। इस बार इस सेवा का लाभ भारत और चीन के पर्यटकों को भी मिलेगा। अप्रैल में ईस्टर के दिन हुए आतंकी हमले के बाद श्रीलंका ने इस सेवा को रोक दिया था।
  • बता दें कि 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर श्रीलंका में नौ आत्मघाती हमलावरों ने तीन चर्च और कई लक्जरी होटल पर हमले को अंजाम दिया था। इसमें 258 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद श्रीलंका ने 39 देशों को दी जाने वाली आगमन पर मुफ्त वीजा सेवा को बंद कर दिया था।
  • श्रीलंका ने बुधवार को जानकारी दी कि इस सेवा को फिर से शुरू किया गया है। यह एक अगस्त से प्रभावी होगी। समाचार पोर्टल श्रीलंका मिरर ने पर्यटन एवं ईसाई मामलों के मंत्री जॉन अमारातुंगे के हवाले से कहा है कि 39 देशों को दी जाने वाली इस सेवा को फिर से शुरू कर दिया गया है।
  • अब इस सेवा का लाभ भारत और चीन के पर्यटकों को भी मिलेगा। पहले भारत और चीन के पर्यटकों को इस सेवा का लाभ नहीं मिलता था। थाईलैंड, यूरोपीय संघ के सदस्य देश, ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड और कंबोडिया के पर्यटकों के लिए यह सेवा पहले से उपलब्ध है।

चाइनाज डिफेंस इन न्यू एरा (नए युग में चीन की सुरक्षा) - श्वेत पत्र

  • चीन की सेना भारत से लगने वाली अपनी सीमा पर सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने का निरंतर प्रयास कर रही है। 2017 में डोकलाम में भारत के साथ बने गतिरोध को दूर करने के लिए भी उसने सकारात्मक वातावरण बनाया था। चीनी सेना ने यह बात चाइनाज डिफेंस इन न्यू एरा (नए युग में चीन की सुरक्षा) शीर्षक से जारी श्वेत पत्र में कही है।
  • श्वेत पत्र में भारत, अमेरिका, रूस और अन्य देशों के सैन्य विस्तार से तुलनात्मक स्थिति प्रस्तुत की गई है। भारत-चीन सीमा के बारे में श्वेत पत्र में कहा गया है कि वहां पर सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए चीनी सेना लगातार प्रयास कर रही है। उसने डोकलाम विवाद को भी खत्म करने के लिए सकारात्मक माहौल बनाया था। डोकलाम में भूटान के क्षेत्र में चीन के सड़क बनाने के विरोध में भारत ने इलाके में अपनी सेना तैनात कर दी थी।
  • दोनों देशों के सैनिकों के बीच निशस्त्र संघर्ष भी हुआ था। दोनों देशों के सैनिक महज 100 मीटर की दूरी पर करीब ढाई महीने तक जमे रहे थे। इस सड़क के निर्माण से उत्तर-पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाली संकरी सी भारतीय सड़क की सुरक्षा खतरे में पड़ने की आशंका थी।
  • गतिरोध के चलते दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे। अंतत: चीन ने इलाके में सड़क निर्माण न करने का वचन दिया, इसके बाद भारतीय सेना मौके से हटी। इसके बाद दोनों देशों की सरकारों ने संबंध को ज्यादा विश्वसनीय बनाने का फैसला किया। इतिहास में पहली बार भारत और चीन की अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई।
  • 2018 में वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग मिले, दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों के विकास की नई रूपरेखा तैयार की। अनौपचारिक मुलाकात के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति चिनफिंग इस वर्ष के अंत में भारत आएंगे।
  • उल्लेखनीय है कि भारत और चीन की सीमा 3,488 किलोमीटर लंबी है और कई स्थानों पर दोनों देशों के बीच विवाद है। इस विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म करने के लिए दोनों देश 21 बार बात कर चुके हैं।
  • श्वेत पत्र में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर सैन्य स्पद्र्धा बढ़ी है। ऐसे में नई चुनौतियों के हिसाब से सेना के चहुंमुखी विकास की आवश्यकता है। चीन इसके मद्देनजर कार्य कर रहा है। इसके लिए सेना को युद्ध के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार किया जा रहा है।
  • अमेरिका का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वह अपनी सेना को तकनीक और संस्थागत तरीके से बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है जिससे दुनिया पर उसका अधिपत्य बना रह सके। बाकी देशों की सेनाएं भी तकनीक विकास के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

:: राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

आईबीबीआई ने भारतीय दिवालियापन व शोधन अक्षमता बोर्ड (दिवालिया पेशेवर) विनियमन, 2016 और भारतीय दिवालियापन व शोधन अक्षमता बोर्ड (दिवालियापन पेशेवर एजेंसियों के मॉडल उपनियम और प्रशासनिक बोर्ड) (संशोधन) विनियमन, 2016 में किया संशोधन

भारतीय दिवालियापन और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने भारतीय दिवालियापन व शोधन अक्षमता बोर्ड (दिवालिया पेशेवर) (संशोधन) विनियमन, 2019 और भारतीय दिवालियापन व शोधन अक्षमता (दिवालियापन पेशेवर एजेंसियों के मॉडल उपनियम और प्रशासनिक बोर्ड) (संशोधन) विनियमन, 2019 से संबंधित नियमों को अधिसूचित कर दिया है।

भारतीय दिवालियापन और शोधन अक्षमता बोर्ड (दिवालियापन पेशेवर) (संशोधन) विनियमन, 2019 द्वारा प्रभावी मुख्य संशोधन इस प्रकार हैं:

  • एक दिवालियापन पेशेवर, अंतरिम समाधान पेशेवर, समाधान पेशेवर, परिसमापक, दिवालिया ट्रस्टी, अधिकृत प्रतिनिधि या दिवालियापन और शोधन अक्षम संहिता, 2016 के अंतर्गत किसी अन्य भूमिका के रूप में कोई कार्य न तो स्वीकार करेगा और न ही करेगा, जब तक उसे उसकी दिवालियापन पेशेवर एजेंसी द्वारा ‘कार्य के लिए प्राधिकार’ नहीं दिया जाता है। यह 1 जनवरी, 2020 से प्रभावी है।
  • दिवालियापन पेशेवर को जब तक ‘कार्य के लिए प्राधिकार’ मिला हुआ है या जब वह कोई सौंपा गया कार्य कर रहा हो, तब तक वह किसी रोजगार से नहीं जुड़ेगा। इससे वह किसी रोजगार से जुड़े होने के दौरान भी दिवालियापन पेशेवर के रूप में पंजीकरण कराने में सक्षम हो जाएगा। हालांकि, अगर वह एक ‘कार्य के लिए प्राधिकार’ चाहता है तो उसे रोजगार से अलग होना चाहिए। अगर वह रोजगार को जारी रखना चाहता है तो वह ‘कार्य के लिए प्राधिकार’ को छोड़ सकता है।
  • जब एक दिवालियापन पेशेवर ने एक कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया पूरी की हो तो वह और उसके संबंधी इस प्रक्रिया के पूरी होने की तारीख से एक साल गुजरने तक 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले कर्जदार, सफल समाधान (रिजॉल्युशन) आवेदन, कर्जदार कंपनी या किसी तीसरे पक्ष के साथ खुली प्रतिस्पर्धा के माध्यम से मिली नियुक्ति से इतर रोजगार से नहीं जुड़ेंगे या किसी तरह की पेशेवर सेवाएं नहीं देंगे।
  • दिवालियापन पेशेवर सौंपे गए किसी काम से जुड़े कार्य से नहीं जुड़ेगा और न ही अपेन संबंधियों या संबंधित पक्षों को नियुक्त कराएगा.

भारतीय दिवालियापन और शोधन अक्षम बोर्ड (दिवालियापन पेशेवर एजेंसियों के मॉडल उपनियम और प्रशासनिक बोर्ड) (संशोधन) विनियमन, 2019 द्वारा प्रभावी मुख्य संशोधन इस प्रकार हैं:

  • एक दिवालियापन पेशेवर एजेंसी इसके उपनियमों के क्रम में दिवालियापन पेशेवरों को ‘कार्य के लिए प्राधिकार’ जारी/नवीकरण करेगी।
  • दिवालियापन पेशेवर की उम्र यदि 70 वर्ष से ज्यादा नहीं हुई है, तो अन्य शर्तों को पूरा करते हुए वह ‘कार्य के लिए प्राधिकार’ पाने का पात्र होगा।
  • अन्य शर्तों को पूरा करते हुए कोई व्यक्ति किसी दिवालियापन पेशेवर एजेंसी के प्रशासनिक बोर्ड में 75 वर्ष की उम्र तक स्वतंत्र निदेशक के रूप में काम कर सकता है।

गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन ( द अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रिवेंशन) अमेंडमेंट या यूएपीए) विधेयक 2019

गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन ( द अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रिवेंशन) अमेंडमेंट या यूएपीए) विधेयक 2019 बिल लोकसभा में पास हो गया। 'यह एंटी टेरर बिल' कई मायनों में खास है। इस बिल में संगठनों के साथ-साथ आतंकी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति को भी आतंकवादी घोषित किए जाने का प्रावधान है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

  • संशोधित कानून के तहत अब आतंकवादी संगठनों और आतंकवादियों की संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी। हालांकि, ऐसा करने के लिए पहले राज्य के डीजीपी की अनुमति लेना आवश्यक होगा। वहीं, अगर एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) मामले की जांच कर रही है तो उसे केवल एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी लेनी होगी। एआईए को डीजीपी से मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा।
  • संशोधित कानून यह भी कहता है कि अब आतंकी गतिविधियों में लिप्त संगठनों और व्यक्तियों तो आंतकवादी घोषित किया जा सकेगा। लोकसभा में शाह ने यासीन भटकल मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एनआईए ने उसके संगठन इंडियन मुजाहिदीन को आतंकी संगठन घोषित किया था लेकिन यासीन को नहीं, क्योंकि कानून में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं था। शाह ने कहा कि इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए भटकल ने 12 आतंकी घटनाएं कीं।
  • इस कानून के तहत केंद्र सरकार उन संगठनों या व्यक्तियों को आतंकी घोषित कर सकेगी जिन्होंने आतंकी घटना को अंजाम दिया हो या घटना में शामिल हों। आतंकवाद के लिए तैयारी कर रहे हों। आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हों या आतंकवाद में किसी भी तरह से शामिल रहे हों।

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019

राज्यसभा ने बुधवार को पोक्सो संशोधन विधेयक पारित कर दिया, जिसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी को परिभाषित करते हुए बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में मृत्यु दंड का भी प्रावधान किया गया है।

मुख्य प्रावधान

  • चाइल्ड पोर्नोग्राफी को परिभाषित करते हुए बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में मृत्यु दंड का भी प्रावधान किया गया है।
  • बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और बलात्कार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए केन्द्र सरकार ने 1023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने को मंजूरी दी है।1023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के लिए कुल 767 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा। इसमें से केन्द्र 474 करोड़ का योगदान देगा।
  • अभी तक 18 राज्यों ने ऐसी अदालतों की स्थापना के लिए सहमति जतायी है।
  • मौजूदा विधेयक में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा तथा ‘‘दुर्लभतम मामलों’’ में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।
  • इमसें सभी राज्यों से सीनियर नोडल पुलिस अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया था। सभी राज्यों में ऐसे अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मूल कानून के अनुसार, बाल यौन अपराधों की प्राथमिकी दर्ज होने के दो माह के भीतर जांच पूरी करने और एक वर्ष के भीतर मुकदमा पूरा करने का प्रावधान है।
  • सरकार ने यौन अपराधों का एक राष्ट्रीय डाटा बेस तैयार किया है। ऐसे 6,20,000 अपराधी हैं। यदि कोई ऐसे व्यक्तियों को रोजगार पर रखता है तो संबंधित व्यक्ति के बारे में इससे जानकारी लेने में मदद मिलेगी।

प्रभाव

  • कानून में संशोधन के जरिए कड़े दंडात्‍मक प्रावधानों से बच्‍चों बच्‍चों से जुड़े यौन अपराधों में कमी आने की संभावना है।
  • इससे विपत्ति में फंसे बच्‍चों के हितों की रक्षा हो सकेगी और उनकी सुरक्षा और सम्‍मान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • संशोधन का लक्ष्‍य बच्‍चों से जुड़े अपराधों के मामले में दंडात्‍मक व्‍यवस्‍थाओं को अधिक स्‍पष्‍ट करना है।

पृष्‍ठभूमि:

पोक्‍सो अधिनियम, 2012 बच्‍चों को यौन अपराधों, यौन शोषण और अश्‍लील सामग्री से सुरक्षा प्रदान करने के लिए लाया गया था। इसका उद्देश्‍य बच्‍चों के हितों की रक्षा करना और उनका कल्‍याण सुनिश्चित करना है। अधिनियम के तहत बच्‍चे को 18 साल की कम उम्र के व्‍यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है और हर स्‍तर पर बच्‍चों के हितों और उनके कल्‍याण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देते हुए उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित किया गया है। यह कानून लैंगिक समानता पर आधारित है।

:: आर्थिक समाचार ::

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत 52वें स्थान पर

  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) 2019 की रैंकिंग जारी हो गयी है। भारत ने रैंकिंग में पांच पायदान की छलांग लगाई है। इस रैंकिंग में भारत को दुनिया भर के देशों में 52वां स्थान मिला है, जबकि साल 2018 में भारत को 57वें नंबर में संतोष करना पड़ा था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स यानी GII की रैंकिंग जारी की।
  • जीआईआई रैंकिंग साल में एक बार प्रकाशित की जाती है। इसे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन प्रकाशित करते हैं। भारत इस रैंकिंग में लगातार सुधार कर हा है। आपको बता दें कि, साल 2017 में भारत की रैंकिंग 60 थी। जबकि 2016 में 66 और 2015 में यह 81वीं थी। भारत का लक्ष्य इसमें पहली 25 अर्थव्यवस्थाओं में आने का है।
  • जीआईआई ने इसके 12वें संस्करण में 80 इंडीकेटर्स (संकेतकों) के आधार पर 129 अर्थव्यवस्थाओं को रैंकिंग दी है। इन इंडीकेटर्स में इंटीलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) के लिए आवेदन जमा कराने की दर से लेकर मोबाइल एप्लिकेशन क्रिएशन (निर्माण), शिक्षा पर खर्च और वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रकाशन शामिल किए जाते हैं।
  • इस इंडेक्स में में स्विट्जरलैंड पहले स्थान पर कायम है। सूचकांक में शामिल टॉप टेन देश..... स्वीडन, अमेरिका, नीदरलैंड, ब्रिटेन, फिनलैंड, डेनमार्क, सिंगापुर, जर्मनी और इजरायल हैं।
  • भारत की अर्थव्यवस्था की बात करें तो इस साल ब्रिटेन को पछाड़ते हुए दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। इसके अलावा एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया पर लगा 3,050 करोड़ का जुर्माना

  • भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर 3,050 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है। इन दोनों कंपनियों पर जुर्माना लगाने का फैसला ट्राई का था जिसे बुधवार को दूरसंचार विभाग की सर्वोच्च निर्णायक संस्था डिजिटल कम्यूनिकेशन कमीशन (डीसीसी) ने मंजूरी दी। इस फैसले की जानकारी देते हुए दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा, ‘डीसीसी ने एयरटेल तथा वोडाफोन आइडिया पर जुर्माना लगाने की टेलीकॉम नियामक संस्था ट्राई की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। अब डीसीसी अपनी यही सिफारिश सरकार के सक्षम प्राधिकारी को भेजेगा।’
  • दरअसल, ट्राई ने अक्टूबर, 2016 में रिलायंस जियो को इंटर-कनेक्टिविटी देने से इंकार के दंडस्वरूप एयरटेल, वोडाफोन तथा आइडिया पर कुल 3,050 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की सिफारिश की थी। एयरटेल और वोडाफोन पर 1050 करोड़ रुपये प्रत्येक का जुर्माना लगाया गया था। इनमें वोडाफोन और आइडिया का अब आपस में विलय हो चुका है। उस वक्त ट्राई ने इन कंपनियों के लाइसेंस रद करने की सिफारिश इसलिए नहीं की थी कि इससे ग्राहकों के लिए बड़ी असुविधा हो सकती थी।
  • ट्राई की उक्त सिफारिश जियो की शिकायत के बाद सामने आई थी। जियो ने कहा था कि उक्त तीनों टेलीकॉम कंपनियों द्वारा पर्याप्त पीआइओ (प्वाइंट आफ इंटरकनेक्ट) नहीं दिए जाने के कारण उसकी 75 फीसदी कॉल्स फेल हो रही हैं।
  • गौरतलब है कि डिजिटल कम्यूनिकेशन कमीशन ने एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर जुर्माना लगाए जाने का फैसला पिछले माह ही ले लिया था, लेकिन बाद में दूरसंचार क्षेत्र की मौजूदा हालत को देखते हुए उसने जुर्माने की राशि के बारे में एक बार फिर से ट्राई की राय लेने का फैसला किया था। परंतु ट्राई ने इस बार भी अपनी पुरानी राय दोहराई और 3,050 करोड़ के जुर्माने को उचित ठहराया। उसका कहना था कि ट्राई एक्ट के अनुसार वह अपनी सिफारिश में संशोधन नहीं कर सकता।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

18 राज्यों ने प्लास्टिक थैलों पर लगाया पूरी तरह प्रतिबंध

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया कि 18 राज्यों ने प्लास्टिक थैलों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। पांच अन्य प्रदेशों ने धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थानों पर प्लास्टिक थैलों के इस्तेमाल पर आंशिक रोक लगाई है।
  • सीपीसीबी ने एनजीटी को यह भी बताया कि 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को लेकर कार्ययोजना पेश कर चुके हैं। उसने एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस एके गोयल की पीठ को बताया, '18 राज्य प्लास्टिक के थैलों या उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा चुके हैं। इनके अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, केरल और बंगाल ने धार्मिक या ऐतिहासिक स्थानों पर प्लास्टिक के थैलों या उत्पादों पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा रखा है।'
  • सीपीसीबी ने यह भी कहा कि सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों असम, बिहार, गोवा, मणिपुर, मेघालय, पुडुचेरी और तेलंगाना ने प्लास्टिक के थैलों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। ओडिशा ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है।
  • एनजीटी ने बोर्ड को 30 सितंबर तक प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के क्रियान्वयन पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने और संबंधित राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को आगे कार्रवाई करने के लिए कहने का निर्देश दिया।
  • एनजीटी ने कहा कि क्रियान्वयन में देरी को लेकर जुर्माना वसूली के मुद्दे पर 16 अक्टूबर को होने वाली इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा। एनजीटी, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के क्रियान्वयन तथा इससे संबंधित मामलों पर दाखिल सीपीसीबी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
  • सीपीसीबी ने बताया कि 16 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाते हुए बंदी नोटिस भी जारी किया है। इनमें चंडीगढ़, दमन-दीव, दादरा-नगर हवेली, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, पंजाब, पुडुचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना व त्रिपुरा आदि शामिल हैं।

क्लाइमेट स्मार्ट खेती

  • धान की खेती को भूजल स्तर गिरने का बड़ा कारण माना गया है। यही वजह है कि इसका रकबा कम करने की बात हो रही है। अब पानी की आधी खपत में धान पैदा किया जा सकेगा। सब-सर्फेस डिप इरीगेशन (उप सतह टपका सिंचाई) तकनीक किसी संजीवनी से कम नहीं है। खासकर धान पैदावार वाले क्षेत्र में यह तकनीक कारगर साबित होगी।
  • क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर मॉडल के तहत सब-सर्फेस डिप इरीगेशन से धान, मक्का और गेहूं की फसल लेने का सफल प्रयोग करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में हो रहा है। पानी की खपत में 50 फीसद और लागत में 20 फीसद की कमी दर्ज की गई है। संस्थान के विज्ञानियों ने दावा किया है कि धान की खेती में 50 प्रतिशत तक पानी की बचत का यह प्रयोग देश में पहली बार किया गया है।
  • इस तकनीक को क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर में मॉडल के रूप में जोड़ा गया है। इस प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र भी सहभाग कर रहा है। यह विधि डिप इरीगेशन का ही आधुनिक स्वरूप है। डिप इरीगेशन में पानी की पाइप लाइन को जमीन की सतह के ऊपर रखा जाता है और सिंचाई के बाद हटा दिया जाता है।
  • नई तकनीक में लाइन जमीन की सतह से 15 सेंटीमीटर की गहराई में बिछाई जाती है। यदि धान और गेहूं की फसल लेनी है तो लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर होती है। मक्का और गेहूं की फसल लेनी है तो यह दूरी 65 सेंटीमीटर तक हो जाती है। जमीन के नीचे जो लाइन बिछाई जाती है उसमें हर 20 सेंटीमीटर की दूरी पर छिद्र बनाए जाते हैं ताकि इनसे पानी रिस सके।
  • किसान एक साल में दो से तीन फसलें लेने के लिए 12 बार खेत की जुताई करता है। गेहूं और धान में 180 किलोग्राम नाइट्रोजन देनी पड़ती है। मक्का में 175 किलोग्राम नाइट्रोजन देनी पड़ती है। लेकिन नई विधि में साल में महज दो बार ही खेत जोतने की जरूरत होती है। कई फसलों में तो इसकी भी जरूरत नहीं होती। इसी तरह, धान में महज 120 किलोग्राम नाइट्रोजन में ही काम चल जाता है, यूरिया को घोलकर पाइपों के जरिये फसलों की जड़ तक पहुंचाया जाता है। मक्का में 145 किग्रा से काम चल जाता है।

:: विविध ::

अतानु चक्रवर्ती, अंशू प्रकाश और एससी गर्ग

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने अतानु चक्रवर्ती को आर्थिक मामलों का नया सचिव नियुक्त किया है. अभी अतानु DIPAM सेक्रेटरी हैं. इसके अलावा समिति ने सुभाष चंद्र गर्ग को नया पावर सेक्रेटरी नियुक्त किया है. अंशू प्रकाश को नया टेलिकॉम सेक्रेटरी बनाया गया है

‘चंद्रशेखर-द लास्‍ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्‍स’

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज ‘चंद्रशेखर- द लास्‍ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स' पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्‍तक की रचना राज्‍यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश और श्री रवि दत्‍त बाजपेयी ने की है। पुस्‍तक विमोचन समारोह का आयोजन बालयोगी ऑडिटोरियम, संसद पुस्‍तकालय भवन में किया गया।

19 वर्षीय क्रिस्टोफ ने तोड़ा माइकल फेलप्स का 10 साल पुराना रिकॉर्ड, जीता 200 मी. बटरफ्लाई में गोल्ड

  • हंगरी के 19 वर्षीय क्रिस्टोफ मिलक ने दक्षिण कोरिया के ग्वांग्झू में चल रही फिना विश्व तैराकी चैंपियनशिप में पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा का स्वर्ण पदक विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता। क्रिस्टोफ ने 1:50.73 सेकंड के समय के साथ नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने दिग्गज अमेरिकी तैराक माइकल फेलप्स (1:51.51 सेकंड) का 10 साल पहले (2009) में बनाया गया रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। दुनिया के सबसे बड़े तैराक माने जाने वाले माइकल फेल्प्स ने 10 साल पहले रोम में 1 मिनट 51.51 सेकंड में स्वर्ण जीता था। मिलाक ने फेल्प्स से 0.78 सेकंड कम समय लिया।

प्रीति पटेल, ऋषि सुनाक और आलोक शर्मा

  • प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कैबिनेट में तीन भारतवंशियों को भी जगह मिली है। प्रीति पटेल को गृह मंत्री बनाया गया है। वहीं इन्फोसिस के सहसंस्थापक एनआर नारायण मूर्ति के दामाद ऋषि सुनाक को ट्रेजरी मिनिस्टर और आलोक शर्मा को अंतरराष्ट्रीय विकास मामलों का विदेश मंत्री बनाया गया है। जॉनसन ने उन सभी लोगों को पदोन्नत किया है, जिन्होंने ब्रेग्जिट मुद्दे पर उनका साथ दिया था।

पूर्व सेना प्रमुख एस्पर ने ली अमेरिका के रक्षा मंत्री पद की शपथ

  • पूर्व सेना प्रमुख माकर् एस्पर ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में आयोजित एक समारोह में अमेरिका के रक्षा मंत्री मंत्री पद की शपथ ली।

बोरिस जॉनसन

  • बोरिस जॉनसन बुधवार को औपचारिक तौर पर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने बकिंघम पैलेस में महारानी को अपना इस्तीफा सौंपा। यूरोपियन यूनियन के साथ ब्रेग्जिट डील कराने में नाकाम रहने पर 7 जून को थेरेसा मे ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • हाल ही में भारत के द्वारा अंतरिक्ष युद्धाभ्यास प्रारंभ किया गया है। इस युद्धाभ्यास का क्या नाम है? (इंडियन स्पेस एक्स)
  • हाल ही में किस राज्य के द्वारा स्थानीय लोगों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 फ़ीसदी आरक्षण देने के लिए कानून बनाया गया है? (आंध्र प्रदेश)
  • हाल ही में जारी हुए ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2019 में भारत की रैंकिंग क्या है? (52 वां)
  • किन संस्थानों के द्वारा ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) जारी किया जाता है? (कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन)
  • हाल ही में जारी हुए ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2019 में कौन सा देश शीर्ष स्थान पर रहा? (स्विट्जरलैंड)
  • हाल ही में किन दूरसंचार कंपनियों पर दूरसंचार विभाग की सर्वोच्च निर्णायक संस्था डिजिटल कम्यूनिकेशन कमीशन (डीसीसी) द्वारा जुर्माना लगाने की अनुमति प्रदान की गई? (भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया)
  • हाल ही में किसे आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई है? (अतानु चक्रवर्ती)
  • हाल ही में किसे टेलिकॉम सेक्रेटरी के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई है? (अंशू प्रकाश)
  • हाल ही में किसे पावर सेक्रेटरी के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई है? (सुभाष चंद्र गर्ग )
  • ‘चंद्रशेखर- द लास्‍ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स' पुस्तक की रचना किनके द्वारा की गई है? (श्री हरिवंश और श्री रवि दत्‍त बाजपेयी)
  • किनके द्वारा ‘चंद्रशेखर- द लास्‍ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स' पुस्तक का विमोचन किया गया? (प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी)
  • हाल ही में किस खिलाड़ी ने माइकल फेल्प्स का 10 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए दक्षिण कोरिया के ग्वांग्झू में चल रही फिना विश्व तैराकी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया? (क्रिस्टोफ मिलक)
  • हाल ही में किस भारतीय मूल के व्यक्ति को ब्रिटेन का गृह मंत्री बनाया गया है? (प्रीति पटेल)
  • हाल ही में किस भारतीय मूल के व्यक्ति को ब्रिटेन का ट्रेजरी मिनिस्टर बनाया गया है? (ऋषि सुनाक)
  • हाल ही में किस भारतीय मूल के व्यक्ति को ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास मामलों का विदेश मंत्री बनाया गया है? (आलोक शर्मा)
  • हाल ही में किसे अमेरिका के रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई है? (मार्क एस्पर)
  • हाल ही में किसे ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है? (बोरिस जानसन)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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