(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (24 जुलाई 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (24 जुलाई 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

हिमाचल में स्नो हार्वेस्टिंग

  • देश को प्राणवायु देने वाले हिमालय पर्वत की श्रृंखलाओं में अब बर्फ के संचयन की योजना है। हिमाचल इस दिशा में पहल कर रैन वाटर हार्वेस्टिंग की तर्ज पर स्नो हार्वेस्टिंग की अवधारणा को धरातल पर उतारेगा। पहाड़ी चोटियों पर अधिकाधिक बर्फ का संचय हो सके और संचित बर्फ एक साथ खिसककर (हिमस्खलन) व्यर्थ न जाए, इसके तकनीकी प्रयास होंगे। हिमस्खलन की बजाय बर्फ के रूप में संचित पानी को धीरे-धीरे धरती में पहुंचाया जाएगा। इससे भूजल स्तर में आ रही गिरावट को रोका जा सकेगा। हिमाचल सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जलशक्तिअभियान को जनशक्ति अभियान बनाएगी। इस मुहिम में कई नूतन प्रयोग होंगे। स्नो हार्वेस्टिंग इसमें अहम है। इसे सिंचाई और जनस्वास्थ्य विभाग लागू करेगा। इसके लिए कसरत शुरू हो गई है।
  • प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र को राज्य नई सोच के साथ क्रियान्वित करेगा। जम्मू कश्मीर, सियाचिन, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, असम, अरुणाचल तक हिमालय का विस्तार है। हिमाचल का प्रयोग अगर सफल रहा तो फिर अन्य हिमालयी राज्य भी इस अवधारणा को अपना सकते हैं।
  • हिमाचल में रावी, ब्यास, सतलुज और चिनाब नदियों के बेसिन पर वर्ष 2018-19 के दौरान 2017-18 की तुलना में स्नो कवर एरिया (हिमाच्छादित क्षेत्र) 97 हजार 672 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 1 लाख 22 हजार 246 वर्ग किलोमीटर हो गया है। 26.16 फीसद बढ़ोतरी के साथ यह पिछले आठ साल का सर्वाधिक स्नो कवर एरिया है। स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद और स्टेट कॉउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से एचपी स्टेट सेंटर ऑन क्लाइमेट चेंजिज के ताजा सर्वेक्षण से यह पता चला है। सेटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सर्वे किया गया है। यह सर्वेक्षण हिमाचल की चार प्रमुख नदियों चिनाब, ब्यास, सतलुज और रावी के बेसिन के अलावा भागा, चंद्रा, मियाड़, जीवा, स्पीति, पिन, पार्वती और बासपा नदी बेसिन में किया गया है। इस बार हर बेसिन पर स्नो कवर एरिया में इजाफा हुआ है।
  • हिमाचल में चार प्रमुख नदियों के बेसिन पर किए गए सर्वेक्षण में स्नो कवर एरिया में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे ग्लेशियरों का आकार बढ़ेगा। रिवर डिस्चार्ज बेहतर होगा। इससे भूजल स्तर में बढ़ोतरी होगी।
  • पंद्रह हजार से अधिक ऊंचाई वाले पर्वतों में स्नो हार्वेस्टिंग होगी। पहाड़ों के ऊपरी स्थानों पर ही बर्फ का संचय होगा। ऐसा तंत्र विकसित किया जा रहा है ताकि पहाड़ो पर संचित बर्फ खिसक ने सके। इसे प्रधानमंत्री के जलशक्तिअभियान के तहत ही क्रियान्वित किया जाएगा। फिलहाल यह शुरुआती योजना है, इसके लिए पूरा खाका खींचा जा रहा है।

इसरो देश में छह NIT में खोलेगा रिसर्च सेंटर

  • चंद्रयान-2 लांचिंग की हमारी बड़ी उपलब्धियों में शुमार हो गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इस प्रोजेक्ट के साथ विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों के विद्यार्थी भी जुड़े रहे। इसरो ऐसे ही भावी अंतरिक्ष वैज्ञानिक तैयार करने के लिए देशभर में छह अलग-अलग दिशाओं में स्थापित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआइटी) में अपने क्षेत्रीय अकादमिक सेंटर खोलने जा रहा है। एनआइटी कुरुक्षेत्र भी इसरो के इस महाप्रोजेक्ट में शुमार हो गया है।
  • स्पेस रिसर्च को प्रोत्साहित करने के लिए देश के छह एनआइटी संस्थानों में इसरो अपने अकादमिक सेंटर खोलने जा रहा है। शुरुआत में तीन एनआइटी शामिल किए गए हैं, जिनके साथ एमओयू तैयार हो गए हैं। इनमें उत्तर-पूर्व में एनआइटी गुवाहाटी, पश्चिम में जयपुर और उत्तर भारत में एनआइटी कुरुक्षेत्र रखे गए हैं। इनके साथ तीन और संस्थानों से एमओयू होंगे, जिनमें दक्षिण-पूर्व में एनआइटी राउरकेला, दक्षिण क्षेत्र में कर्नाटक के मेंगलोर एनआइटी और केंद्र के लिए बीएचयूआइटी वाराणासी को चुना गया है।

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना

  • कृषि मंत्री तोमर ने लोकसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान बताया कि परियोजना की बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनजर सरकार ने 84 नई योजनाओं को मंजूरी दे दी है. इसमें कुल 33.81 लाख महिला किसानों को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. आंकड़ा देते हुए तोमर ने बताया कि 31 मार्च 2019 तक कुल 35.98 लाख महिला किसानों को इसका लाभ मिल चुका है. खास परियोजना में 30 लाख से अधिक गांवों को कवर कर लिया गया है.
  • इस परियोजना के लिए केंद्र से वित्तीय मदद के रूप में 847.48 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इसमें से कुल 570 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं. तोमर ने कहा कि कृषि मंत्रालय लगातार महिला किसानों के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत निरंतर जागरूकता अभियान चला रहा है. उदाहरण के तौर पर कृषि मंत्री तोमर ने बताया कि कृषि क्षेत्र में गैर इमारती लकड़ियों का उत्पादन और पशु पालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है.
  • महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना को ग्रामीण महिला आजीविका मिशन के जरिये लागू किया जा रहा है. इसके लिए 29 राज्यों में कुल 34 लाख स्वयं सहायता समूह के सदस्यों का चयन कर लिया गया है. इनमें ज्यादातर एसएचजी पर्यावरण, पशुधन व कृषि से जुड़े अन्य उद्यम में सक्रिय हैं.

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना क्या है?

  • महिला किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP) को कृषि से जुड़ी महिलाओं की वर्तमान स्थिति मे सुधार करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए इसकी शुरुआत की गई है. इस योजना का उद्देश्य महिलाओ को कृषि में अधिकार संपन्न बनाना है.

'एक गांव-एक खेत' (कलेक्टिव फार्मिंग -सामूहिक खेती) की अवधारणा

  • पलायन का दंश झेल रहे उत्तराखंड के गांवों में खेत अब वीरान नहीं रहेंगे, बल्कि इनमें फसलें लहलहाएंगी। खेती-किसानी की तस्वीर संवारने के मकसद से राज्य सरकार 'एक गांव-एक खेत' की अवधारणा को धरातल पर उतारने जा रही है। इसमें पर्वतीय इलाकों पर विशेष फोकस रहेगा। योजना के तहत गांव के सभी खेतों को एक मानते हुए उनमें सामूहिक रूप से खेती की जाएगी। खेती करने वाले सभी किसानों को उत्पादित अनाज का समान रूप से वितरण किया जाएगा। यही नहीं, जो लोग गांव से बाहर हैं, उनके खेतों का उपयोग करने पर उन्हें अनाज के रूप में कुछ हिस्सेदारी दी जाएगी।
  • सरकार की कोशिश है कि आने वाले खरीफ सीजन से इस व्यवस्था को धरातल पर उतारा जाए। खेती के नजरिये से देखें तो इसकी हालत बहुत बेहतर नहीं है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में कृषि की हिस्सेदारी इसकी तस्दीक करती है। वर्ष 2010-12 में यह 7.05 फीसद थी, जो अब घटकर 4.67 फीसद पर आ गई है। आकड़े बताते हैं कि गुजरे 18 वषरें में राज्य में 72 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि योग्य भूमि बंजर में तब्दील हुई है। हालांकि, गैर आधिकारिक आकड़ों पर गौर करें तो यह रकबा एक लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच चुका है। यही नहीं, राज्य गठन के समय विरासत में मिली सवा तीन लाख हेक्टेयर कृषि योग्य बंजर भूमि का उपयोग अभी खोजना बाकी है।
  • वर्तमान में कृषि योग्य बंजर भूमि का आंकड़ा करीब सवा चार लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। हालांकि कृषि की सूरत संवारने को दावे तो हुए, मगर धरातल पर गंभीरता से पहल नहीं हो पाई। यही कारण भी है कि जिन खेतों में फसलें लहलहाया करती थीं, वे धीरे-धीरे बंजर में तब्दील होते चले गए। गांवों से निरंतर हो रहे पलायन ने इसमें आग में घी का काम किया। इस सबके मद्देनजर सरकार ने अब केंद्र से मिले संबल के बाद खेती-किसानी की तस्वीर संवारने की ठानी है। किसानों की आय दोगुना करने के मद्देनजर उन्हें कृषि व इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत राज्य में तैयार होने जा रहे 3900 कृषि क्लस्टरों में सामूहिक खेती पर जोर दिया जा रहा है। इस अवधारणा को नाम दिया गया है 'एक गांव-एक खेत'।
  • यह एक प्रकार से कलेक्टिव फार्मिंग (सामूहिक खेती) है। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के मुताबिक इसके तहत गांव के सभी खेतों को एक मानते हुए इसमें वहां रह रहे सभी लोग सामूहिक रूप से खेती करेंगे। इसमें उन लोगों के बंजर हो चुके खेत भी शामिल होंगे, जो गांव से बाहर रह रहे हैं। उत्पादित फसल का खेती करने वाले सभी लोगों में समान रूप से वितरण होगा। यही नहीं, जो लोग गांव में नहीं रहते और उनके खेतों में खेती की जा रही है, उन्हें उनकी हिस्सेदारी का आधा भाग दिया जाएगा।

ये होंगे फायदे

  • सामूहिक रूप से खेती करने पर समय और श्रम की होगी बचत
  • क्लस्टर आधार पर होने वाली खेती से उत्पादों के विपणन में होगी आसानी
  • जो लोग गांव से बाहर रह रहे हैं, वे भी खेती के लिए होंगे प्रोत्साहित
  • बंजर हो चुकी कृषि योग्य भूमि फिर से हो सकेगी उपजाऊ
  • पर्यावरणीय लिहाज से जलस्रोतों के संरक्षण में सहायक होगा यह प्रयास

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

बोरिस जॉनसन होंगे ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री

  • ब्रिटेन को बोरिस जॉनसन के रूप में अपना नया प्रधानमंत्री मिल गया है। लंदन के पूर्व मेयर और यूके के पूर्व विदेश मंत्री जॉनसन मंगलवार को कंजर्वेटिव पार्टी के नेता चुने गए। उन्हें 92,153 (66 प्रतिशत) वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी जेरमी हंट को सिर्फ 46,656 वोट मिले। कंजर्वेटिव पार्टी के कुल 1,59,320 सदस्यों में से 87.4 प्रतिशत ने वोट डाला था। 509 वोट खारिज कर दिए गए।
  • 55 साल के बोरिस जॉनसन ब्रेग्जिट के प्रबल समर्थक हैं और उन्होंने इसके पक्ष में जमकर अभियान चलाया था। कंजर्वेटिव पार्टी का नया नेता चुने जाने के बाद उन्होंने 31 अक्टूबर तक ईयू से यूके के अलग होने की (ब्रेग्जिट) प्रक्रिया को पूरी करने की प्रतिबद्धता जताई है। मौजूदा प्रधानमंत्री टरीजा मे अब क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय को अपना इस्तीफा भेजने से पहले हाउस ऑफ कॉमंस में बतौर प्रधानमंत्री आखिरी बार सवालों का सामना करेंगी। मे ने पिछले महीने ब्रेग्जिट मुद्दे पर पार्टी में विद्रोह के बाद इस्तीफे का ऐलान किया था। वह ब्रेग्जिट को लेकर यूरोपीय संघ से हुए समझौते को ब्रिटिश संसद में पास नहीं करा पाईं।

जापान और दक्षिण कोरिया की ट्रेड वॉर

  • जहां एक ओर सभी की निगाहें अमेरिका-चीन के व्यापारिक विवाद पर टिकी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर एक और युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसका असर स्मार्टफोन की कीमत पर पड़ सकता है। सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जापान और दक्षिण कोरिया की ट्रेड वॉर के बीच आपके स्मार्टफोन महंगे हो सकते हैं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में जापान ने दक्षिण कोरिया को निर्यात किए जाने वाले कुछ रसायनों की आपूर्ति के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। इनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर बनाने में किया जाता है जो कि चिप और मोबाइल समेत कई इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स तैयार करने में इस्तेमाल किए जाते हैं।
  • सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स दक्षिण कोरिया के दो सबसे बड़े सेमीकंडक्टर निर्माता हैं, सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में मेमरी चिप में इस्तेमाल होने वाले 61 पर्सेंट कम्पोनेंट्स का सप्लाई इनके द्वारा किया जाता है। ऐपल और हुवावे जैसी कंपनियां इन चिप्स के सबसे बड़े खरीदारों में से एक हैं। ऐनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगर जापान और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार युद्ध जारी रहता है तो इससे स्मार्टफोन समेत कई डिवाइसों की कीमत पर असर पड़ेगा, जिससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकंडक्टर निर्माताओं के पास पर्याप्त इन्वेंटरी है, लेकिन यह निश्चित नहीं है कि वे कितने समय तक चलेंगे। अमेरिकी और चीनी दोनों ही कंपनियां इन चिप्स पर निर्भर हैं और अगर व्यापार युद्ध जारी रहता है तो उपभोक्ताओं को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि जापान फ्लोराइडयुक्त पॉलीमाइड का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके अलावा, यह दुनिया के 70% हाइड्रोजन फ्लोराइड का उत्पादन भी करता है जिसकी वजह से दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए वैकल्पिक स्रोतों को खोजना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में साउथ कोरिया की जापान पर निर्भरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस बीच अमेरिका-चीन के बीच की ट्रेड वॉर ने अब तक हुवावे को सबसे अधिक प्रभावित किया है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के संबंधों में सुधार नहीं होता है तो ऐपल, सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों को भी नुकसान होगा।

उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने के दिए संकेत

  • परमाणु मसले पर अमेरिका के साथ वार्ता में आए गतिरोध के बीच उत्तर कोरिया ने फिर उकसावे वाला काम किया है। उसने एक नई पनडुब्बी का निर्माण कर बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने का संकेत दिया है।
  • उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने मंगलवार को इस पनडुब्बी का निरीक्षण किया और शीर्ष अधिकारियों को देश की नौसैनिक ताकत बढ़ाने का निर्देश दिया।
  • उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए के अनुसार, नई पनडुब्बी को जल्द ही देश के पूर्वी क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही किम की तीन तस्वीरें भी जारी की गई। इसमें वह एक शिपयार्ड का दौरा करते दिख रहे हैं, जहां इस पनडुब्बी का निर्माण किया गया है।
  • अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ पहुंचे किम ने पनडुब्बी की डिजाइन और क्षमताओं के बारे में जानकारी लेकर संतुष्टि जाहिर की। पनडुब्बी के बारे में इसके अलावा कोई विवरण जारी नहीं किया गया है। यह हालांकि पहले से पता था कि उत्तर कोरिया पूर्वी तट सिंपो में एक नई पनडुब्बी का निर्माण कर रहा है।
  • उत्तर कोरिया पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पुकुसांग-1 का पहले ही परीक्षण कर चुका है। विश्लेषकों का कहना है कि नई पनडुब्बी के विशाल आकार को देखकर लगता है कि अब वह पनडुब्बी से दागी जाने वाली नई और ज्यादा शक्तिशाली मिसाइल का विकास कर रहा है।
  • उत्तर कोरिया अगर बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने में सफल होता है तो अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी देशों के लिए खतरा बढ़ सकता है क्योंकि पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पहले ही पता लगाना बेहद कठिन है। उत्तर कोरिया अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिका तक मार करने की क्षमता पहले ही हासिल कर चुका है।

:: राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त तक बढ़ाई एनआरसी की डेडलाइन

  • सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के फाइनल पब्लिकेशन की तारीख बढ़ा दी है। पहले इसे 31 जुलाई 2019 को पब्लिश किया जाना था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 31 अगस्त 2019 कर दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया था कि वह एनआरसी को पब्लिश किए जाने की डेडलाइन 31 जुलाई से आगे बढ़ा दे।
  • असम में आई बाढ़ के चलते केंद्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से डेडलाइन आगे बढ़ाने की अपील की थी। केंद्र सरकार ने कहा था कि अवैध घुसपैठियों को हर हाल में ही अपने देश वापस जाना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस अपील को स्वीकार करते हुए डेडलाइन को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक वेरिफिकेशन के काम को निपटाने के लिए कहा था।

सैंपल रीवेरिफिकेशन की अपील ठुकराई

  • सुप्रीम कोर्ट ने 20 फीसदी नमूनों के पुन: सत्यापन का केंद्र और राज्य सरकार का अनुरोध ठुकराया दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की पीठ ने असम नागरिक पंजी समन्वयक प्रतीक हजेला की रिपोर्ट के अवलोकन के बाद एनआरसी के अंतिम प्रकाशन की अवधि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त करने के बारे में आदेश पारित किया।
  • बता दें कि केंद्र और असम सरकार ने एनआरसी में गलत तरीके से शामिल किए गए और उससे बाहर रखे गए नामों का पता लगाने के लिए 20 फीसदी नमूने का फिर से सत्यापन करने की अनुमति कोर्ट से मांगी थी। केंद्र की ओर से अटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल और असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस संबंध में पक्ष रखे लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ।

लाखों लोगों के गलत तरीके से एनआरसी में रजिस्ट्रेशन की आशंका

  • दरअसल, पता चला है कि बांग्लादेश के बॉर्डर के पास लाखों लोग गलत तरीके से एनआरसी में आ गए हैं। जिन लोगों का नाम शामिल हुआ है, वे अवैध घुसपैठिए हैं। केंद्र सरकार ने कहा था कि 31 जुलाई को सप्लिमेंटरी लिस्ट जारी कर देंगे लेकिन फाइनल लिस्ट जारी करने में अभी और समय लगेगा। असम में अभी बाढ़ भी आई हुई है।

वेतन विधेयक, 2019 पर कोड

केन्‍द्रीय श्रम और रोजगार राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने वेतन और बोनस तथा इनसे जुड़े मामलों से संबंधित कानूनों में संशोधन और समेकन के लिए आज लोकसभा में वेतन विधेयक, 2019 पर कोड पेश किया। वेतन विधेयक, 2019 पर कोड में न्‍यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के प्रासंगिक प्रावधानों को शामिल किया गया है। वेतन पर कोड लागू होने के बाद ये सभी चार अधिनियम निरस्‍त हो जाएंगे।

कोड की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार हैं –

  • वेतन पर कोड सभी कर्मचारियों के लिए क्षेत्र और वेतन सीमा पर ध्‍यान दिए बिना सभी कर्मचारियों के लिए न्‍यूनतम वेतन और वेतन के समय पर भुगतान को सार्वभौमिक बनाता है। वर्तमान में न्‍यूनतम वेतन अधिनियम और वेतन का भुगतान अधिनियम दोनों को एक विशेष वेतन सीमा से कम और अनुसूचित रोजगारों में नियोजित कामगारों पर ही लागू करने के प्रावधान हैं। इस विधेयक से हर कामगार के लिए भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित होगा और मौजूदा लगभग 40 से 100 प्रतिशत कार्यबल को न्‍यूनतम मजदूरी के विधायी संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर कामगार को न्‍यूनतम वेतन मिले, जिससे कामगार की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा। न्‍यूनतम जीवन यापन की स्थितियों के आधार पर गणना किये जाने वाले वैधानिक स्‍तर वेतन की शुरूआत से देश में गुणवत्‍तापूर्ण जीवन स्‍तर को बढ़ावा मिलेगा और लगभग 50 करोड़ कामगार इससे लाभान्वित होंगे। इस विधेयक में राज्‍यों द्वारा कामगारों को डिजिटल मोड से वेतन के भुगतान को अधिसूचित करने की परिकल्‍पना की गई है।
  • विभिन्‍न श्रम कानूनों में वेतन की 12 परिभाषाएं हैं, जिन्‍हें लागू करने में कठिनाइयों के अलावा मुकदमेबाजी को भी बढ़ावा मिलता है। इस परिभाषा को सरल बनाया गया है, जिससे मुकदमेबाजी कम होने और एक नियोक्‍ता के लिए इसका अनुपालन सरलता करने की उम्‍मीद है। इससे प्रतिष्‍ठान भी लाभान्वित होंगे, क्‍योंकि रजिस्‍टरों की संख्‍या, रिटर्न और फॉर्म आदि न केवल इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकेंगे और उनका रख-रखाव किया जा सकेगा, बल्कि यह भी कल्‍पना की गई है कि कानूनों के माध्‍यम से एक से अधिक नमूना निर्धारित नहीं किया जाएगा।
  • वर्तमान में अधिकांश राज्‍यों में विविध न्‍यूनतम वेतन हैं। वेतन पर कोड के माध्‍यम से न्‍यूनतम वेतन निर्धारण की प्रणाली को सरल और युक्तिसंगत बनाया गया है। रोजगार के विभिन्‍न प्रकारों को अलग करके न्‍यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है। न्‍यूनतम वेतन निर्धारण मुख्‍य रूप से स्‍थान और कौशल पर आधारित होगा। इससे देश में मौजूद 2000 न्‍यूनतम वेतन दरों में कटौती होगी और न्‍यूनतम वेतन की दरों की संख्‍या कम होगी।
  • निरीक्षण शासन में अनेक परिवर्तन किए गए हैं। इनमें वेब आधारित रेंडम कम्‍प्‍यूटरीकृत निरीक्षण योजना, अधिकार क्षेत्र मुक्‍त निरीक्षण, निरीक्षण के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से जानकारी मांगना और जुर्मानों का संयोजन आदि शामिल हैं। इन सभी परिवर्तनों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ श्रम कानूनों को लागू करने में सहायता मिलेगी।
  • ऐसे अनेक उदाहरण थे कि छोटी सीमावधि के कारण कामगारों के दावों को उठाया नहीं जा सका। अब सीमा अवधि को बढ़ाकर तीन वर्ष किया गया है और न्‍यूनतम वेतन, बोनस, समान वेतन आदि के दावे दाखिल करने को एक समान बनाया गया है। फिलहाल दावों की अवधि 6 महीने से 2 वर्ष के बीच है।
  • इसलिए यह कहा जा सकता है कि न्‍यूनतम वेतन के वैधानिक संरक्षण करने को सुनिश्चित करने तथा देश के 50 करोड़ कामगारों को समय पर वेतन भुगतान मिलने के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम जीवन सरल बनाने और आराम से व्‍यापार करने को बढ़ावा देने के लिए भी वेतन पर कोड के माध्‍यम से उठाया गया है।

पृष्ठभूमि

वेतन विधेयक पर कोड इससे पहले 10 अगस्‍त, 2017 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे संसद की स्‍थायी समिति के पास भेजा गया था। समिति ने अपनी रिपोट 18 दिसंबर, 2018 को प्रस्‍तुत की थी। हालांकि 16वीं लोकसभा भंग करने के कारण यह विधेयक रद्द हो गया। इसलिए वेतन विधेयक, 2019 पर कोड नामक नया विधेयक तैयार किया गया। संसद की स्‍थायी समिति की सिफारिशों और हितधारकों के अन्‍य सुझावों पर परस्‍पर विचार करने के बाद वेतन विधेयक, 2019 पर कोड नामक नया विधेयक तैयार किया गया।

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता विधेयक, 2019

  • श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने आज लोकसभा में व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति को विनियमित करने वाले कानूनों में संशोधन करने के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता विधेयक, 2019 पेश किया। श्री गंगवार ने कहा कि प्रस्तावित बिल मजदूर यूनियनों, नियोक्ताओं और अन्य सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद पेश किया जा रहा है।
  • सुरक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और बेहतर कामकाजी परिस्थितियां कामगार की भलाई के लिए और देश के आर्थिक विकास के लिए भी आवश्यक हैं क्योंकि देश का स्वस्थ कार्यबल अधिक उत्पादक होगा और दुर्घटनाओं और अप्रत्याशित घटनाओं में कमी से नियोक्ताओं को आर्थिक रूप से लाभ होगा।
  • संहिता देश के सभी कार्यबल के लिए सुरक्षा और स्वस्थ कार्य स्थितियों का विस्तार करने के अंतिम उद्देश्य के साथ सुरक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और कार्य स्थितियों के प्रावधानों के दायरे को मौजूदा 9 प्रमुख क्षेत्रों से लेकर 10 या अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों तक बढ़ाती है। प्रस्तावित संहिता श्रमिकों के कवरेज को कई गुना बढ़ाती है क्योंकि यह 10 या अधिक श्रमिकों को नियुक्त करने वाले सभी उद्योग, व्यापार, व्यवसाय और विनिर्माण प्रतिष्ठानों पर लागू होगा। इसमें आईटी क्षेत्र या सेवा क्षेत्र के प्रतिष्ठान शामिल हैं।
  • इसके अलावा संहिता में खदानों और बंदरगाहों को छोड़कर 10 कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों के लिए विभिन्न उपयुक्तताओं को एक साथ दिया गया है। एक मात्र कर्मी वाले खदानों और गोदी में यह संहिता लागू होगी।
  • संहिता में व्यापक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए श्रमजीवी पत्रकारों और सिनेमा कर्मियों की परिभाषाओं के अंदर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्यरत श्रमिकों और ऑडियो विजुअल उत्पादन के सभी रूपों को शामिल करने के लिए भी संशोधन किया गया है।
  • अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक की परिभाषा में उन प्रवासी श्रमिकों को शामिल करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव है, जिन्हें ठेकेदार या एजेंट के बिना दूसरे राज्यों के नियोक्ता द्वारा सीधे नियोजित किया जा रहा है। यह प्रस्ताव सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों के प्रावधानों के कवरेज को कई गुना बढ़ा देगा।

अन्य मुख्य विशेषताएं:

  • संहिता में व्यापक विधायी रूपरेखा का प्रावाधान है, जो विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार नियम-विनियम बनाने, मानक तय करने और उप-विधि बनाने में सहायक है। इसके परिणामस्वरूप संहिता में अनुच्छेद की संख्या 622 से घटकर 134 हो गई है। इससे कानून सरल होगा और उसमें उभरती टेक्नॉलाजी के अनुरूप परिवर्तन की गुंजाइश होगी और कानून गतिशील होगा।
  • विधेयक में अनेक पंजीकरणों के बदले एक प्रतिष्ठान के लिए एक पंजीकरण का प्रस्ताव किया गया है। अभी 13 श्रम कानूनों में से 6 में प्रतिष्ठान के लिए अगल से पंजीकरण की व्यवस्था है। इससे एक केंद्रीकृत डाटा बेस बनेगा और व्यावसायिक सुगमता को प्रोत्साहन मिलेगा। अभी 6 कानूनों के अंतर्गत अलग पंजीकरण की आवश्यकता पड़ती है।
  • नियोक्ता निर्धारित प्रतिष्ठान के निर्धारित आयु के ऊपर के कर्मियों के लिए निर्धारित स्वास्थ्य जांच की वार्षिक निःशुल्क सुविधा देंगे। इससे उत्पादता बढ़ेगी क्योंकि बीमारी का पता लगाना संभव हो सकेगा। स्वास्थ्य परिक्षण के लिए एक निश्चित उम्र के कर्मचारियों की कवरेज से समावेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • संहिता में पहली बार प्रतिष्ठान के प्रत्येक कर्मचारी को सरकार द्वारा तय न्यूनतम सूचना के साथ वैधानकि प्रावधान किया गया है। नियुक्ति पत्र के प्रावधान से रोजागर का औपचारिकरण होगा और कर्मचारी का शोषण रूकेगा।
  • पांच श्रम कानूनों के अंतर्गत अनेक समितियों का स्थान एक राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा तथा स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड लेगा। राष्ट्रीय बोर्ड स्वरूप में त्रिपक्षीय होगा और इसमें मजदूर यूनियनों, नियोक्ता संगठनों तथा राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व होगा। इससे विभिन्न कानूनों में निकायों / समितियों की संख्या कम होगी और सरल तथा समन्वित नीति बनेगी।
  • सरकार द्वारा किसी भी श्रेणी के प्रतिष्ठान में द्विपक्षीय सुरक्षा समिति बनाने का प्रावधान होगा। इससे प्रतिष्ठान में सुरक्षा और स्वस्थ्य कामकाजी माहौल को प्रोत्साहन मिलेगा। समिति के भागीदारी मूलक स्वरूप से प्रबंधन द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करने में प्रोत्साहन मिलेगा।
  • मृत्यु या किसी व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में नियोक्ता के कर्तव्यों से संबंधित प्रावधानों के उल्लंधन पर दंड का एक हिस्सा अदालत द्वारा पीड़ित या पीड़ित व्यक्ति के कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाएगा। दंड के इस हिस्से से घायल कर्मी को सहायता मिलेगी या मृतक के परिवार को वित्तीय सहायता मिलेगी।
  • वर्तमान में विभिन्न कानूनों में क्रेच, कैंटीन, प्रथम चिकित्सा सहायता, कल्याण अधिकारी जैसे विभिन्न प्रावधानों को लागू करने की अलग–अलग शर्तें हैं। प्रस्तावित संहिता में सभी प्रतिष्ठानों के लिए जहां तक व्यावहारिक रूप से संभव है उनके कर्मचारियों के कल्याण के लिए एकरूप प्रावधान होंगे।
  • निर्धारित प्रतिष्ठानों के मामले में सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा, अवकाश, काम के घंटे या अन्य शर्त के अधीन महिलाओं को शाम 7 बजे से आगे और सुबह 6 बजे से पहले काम करने के लिए अनुमति लेनी होगी। लेकिन रात्रि कार्य के लिए उनकी सहमति लेने के बाद ही ऐसा होगा। इससे लैंगिग समानता को प्रोत्साहन मिलेगा और यह अंतर्राष्ट्रीय संघटनो सहित विभिन्न मंचों की मांग के अनुरूप है। रात्रि कार्य के लिए महिला कर्मचारी की सहमति और इच्छा की शर्त से प्रावधान का दुरूपयोग टलेगा।
  • 13 श्रम कानूनों में अनेक लाइसेंसों और रिटर्न के स्थान पर एक लाइसेंस तथा एक रिटर्न के प्रावधान से समय तथा संसाधनों और प्रतिष्ठान के प्रयासों में बचत होगी।

लोकसभा ने लाभ के पदों संबंधी संयुक्त समिति के गठन को मंजूरी दी

  • लोकसभा ने मंगलवार को लाभ के पदों संबंधी संयुक्त समिति गठित करने के संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी । इस समिति में संसद के दोनों सदनों के सदस्य होंगे ।
  • निचले सदन में विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह प्रस्ताव पेश किया । इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘सभाओं के लाभ के पदों संबंधी एक संयुक्त समिति गठित होगी जिसमें 15 सदस्य होंगे । इसमें 10 सदस्य लोकसभा के और 5 सदस्य राज्यसभा के होंगे ।’ ये एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार प्रत्येक सभा के सदस्यों में से निर्वाचित होंगे ।
  • संयुक्त समिति के कार्यों में सभी मौजूदा समितियों तथा बाद में गठित सभी समितियों की संरचना एवं प्रकृति की जांच करना शामिल है। समिति के कार्यों में इसके द्वारा जांच की गई समितियों के संबंध में सिफारिश करना भी है कि किन पदों को निरस्त किया जाना चाहिए और किन पदों को निरस्त नहीं किया जाना चाहिए। समय समय पर संसद की अनुसूची निर्रहरता निवारण अधिनियम 1959 की समीक्षा करना तथा योग, लोप करना अथवा किसी माध्यम से उक्त अनुसूची में संशोधनों की सिफारिश करना भी समिति के कार्यों में शामिल है ।
  • इसमें कहा गया है कि संयुक्त समिति उपयुक्त सभी अथवा किसी मामले के संबंध में संसद की दोनों सभाओं को समय समय पर रिपोर्ट करेगी । संयुक्त समिति के सदस्य वर्तमान लोकसभा की अवधि तक पद धारण करेंगे ।

राष्ट्रीय गीत का दर्जा बढ़ाने की मांग वाली याचिका

  • राष्ट्रीय गीत ‘वंदेमातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा और सम्मान देने के लिए नीति बनाने का निर्देश सरकार को देने की मांग वाली भाजपा नेता अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी।
  • याचिका पर सुनवाई के लिए अब 26 जुलाई की तारीख तय की गई है। सुनवाई टलने का कारण मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ का न बैठना रहा।
  • पेश याचिका में अनुरोध किया गया है कि बंकिम चंद्र चटर्जी लिखित राष्ट्रीय गीत ‘वंदेमातरम’ को रवींद्र नाथ टैगोर लिखित राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मान दिया जाए। याची का कहना है कि राष्ट्रीय गीत ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी।
  • पहली बार 1896 में रवींद्र नाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में इसे गाया था। याचिका में कहा गया है कि वंदेमातरम में जिन भावनाओं को अभिव्यक्ति दी गई है, वह देश के चरित्र को बताती हैं। उसे भी बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए।
  • याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि वंदे मातरम को ‘जन गण मन’ के बराबर सम्मान दिया जाएगा और दोनों का दर्जा समान होगा।
  • ऐसी की एक याचिका अक्तूबर 2017 में दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए उक्त याचिका को खारिज कर दिया था। केंद्र सरकार का कहना था कि ‘वंदेमातरम’ और ‘जन गण मन’ को समान सम्मान प्राप्त है।

मोटर वाहन संशोधन विधेयक-2019

  • नई दिल्ली लोकसभा ने मंगलवार को मोटर वाहन (संशोधन) बिल-2019 को मंजूरी दे दी। इसमें रोड सेफ्टी को लेकर बहुत सख्त प्रावधान किए गए हैं। तमाम मामलों में ड्राइविंग के दौरान मामूली गलती पर भी भारी जुर्माना लगेगा। चाहे ड्राइविंग के दौरान ओवरस्पीड का मामला हो, बिना हेल्मेट या बिना बेल्ट या फिर नशे में ड्राइविंग कर रहे हैं तो जुर्माने की रकम कई गुना तक बढ़ाने की तैयारी है।
  • कुछ मामलों में बाकायदा सजा का प्रावधान तक है। कुछ मामलों में सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने तक का प्रावधान रखा है। किसी किशोर के ड्राइविंग दौरान सड़क पर कोई अपराध या हादसा होने पर गाड़ी मालिक या अभिभावक को दोषी माना जाएगा। उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जाएगा।
  • सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि गाड़ियों की खरीद की स्थिति में उसके रजिस्ट्रेशन का काम डीलर को देने से राज्यों को राजस्व का कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि राजस्व का पैसा सीधा राज्य सरकारों के खाते में जाएगा। इतना ही नहीं, इस संबंध में राजस्व की दर का निर्धारण भी राज्य अपने हिसाब से कर सकते हैं। बिल में 'मोटर वाहन दुर्घटना फंड' के गठन की बात कही गई है, जो भारत में सड़क का इस्तेमाल करने वालों को अनिवार्य बीमा कवर देगा ।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

  • हिट ऐंड रन के मामले में मृतक के परिजनों को सरकार की ओर से दो लाख रुपये की राहत राशि दी जाएगी। फिलहाल महज 25,000 रुपये का ही प्रावधान है।
  • मोटर वीइकल्स ऐक्सिडेंट फंड बनेगा, जो देश के सभी रोड यूजर्स को इंश्योरेंस कवर प्रदान करेगा। इसके तहत कुछ निश्चित तरह के हादसों को कवर किया जाएगा।
  • थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर देनदारी की सीमा को समाप्त किया जाएगा। इससे पहले 2016 में तैयार प्रस्ताव में मौत पर 10 लाख और गंभीर घायल पर 5 लाख रुपये का प्रावधान था।
  • यदि किसी नाबालिग के द्वारा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता है तो उसके पैरंट्स को जिम्मेदार माना जाएगा। परिजनों को बचने के लिए यह साबित करना होगा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया था। नाबालिग पर जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट के तहत केस चलेगा। वीइकल्स का रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो सकता है।
  • नशे में गाड़ी चलाने पर न्यूनतम जुर्माने को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये तक कर दिया गया है। रैश ड्राइविंग पर फाइन भी 1,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 कर दिया गया है। बिना लाइसेंस के फाइन पर 5,000 रुपये तक का फाइन देना होगा, फिलहाल यह 500 रुपये है।
  • बिना सीट बेल्ट पहने चलाने पर 100 रुपये की बजाय 1,000 देना होगा। इसके अलावा तय सीमा से अधिक स्पीड से चलाने पर 400 के स्थान पर 1,000 से 2,000 रुपये तक फाइन देना होगा।
  • मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करने पर 5,000 रुपये तक फाइन देना होगा। फिलहाल यह महज 1,000 रुपये है।

:: आर्थिक समाचार ::

आइएमएफ ने 0.3 फीसदी घटाया भारत की ग्रोथ रेट का अनुमान

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने चालू वर्ष 2019 और 2020 में भारत की आर्थिक विकास दर धीमी पड़ने का अनुमान लगाया है। उसने दोनों वर्षों के लिए विकास दर अनुमान 0.3 फीसदी घटा दिया है। घरेलू स्तर पर मांग उम्मीद से ज्यादा कमजोर रहने के कारण इन दो वर्षों में विकास दर क्रमशः 7 और 7.2 फीसदी रह सकती है।
  • इसके बावजूद भारत की विकास दर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था में सबसे तेज रहेगी। ग्लोबल वित्तीय संस्थान आइएमएफ ने कहा कि विकास दर चीन से भी काफी ज्यादा रहेगी। उसने इन दोनों वर्षों के लिए इस साल के शुरू में जारी अनुमान में 0.3 फीसदी की कटौती की है। आइएमएफ ने वर्ल्ड इकोनॉमिक अपडेट में कहा कि चालू वर्ष में ग्रोथ 7 फीसदी रहेगी जबकि अगले साल यह थोड़ी सुधरकर 7.2 फीसदी हो जाएगी। घरेलू मांग कमजोर रहने से विकास दर सुस्त रहेगी।
  • आइएमएफ के अनुसार चीन में इस साल 6.2 फीसदी और अगले साल 6 फीसदी विकास दर रहेगी। उसने अप्रैल के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के मुकाबले ग्रोथ रेट में 0.1 फीसदी की कमी की है। अमेरिकी आयात शुल्क में वृद्धि के नकारात्मक असर और कमजोर विदेशी मांग से चीन की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा। कर्ज पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए नियामकीय मजबूती की आवश्यकता है।
  • आइएमएफ की भारतीय मूल की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने चिली की राजधानी सेंटियागो में जारी रिपोर्ट में दुनिया की विकास दर का भी अनुमान घटाया है। इस साल वैश्विक विकास दर 3.2 फीसदी और अगले साल 3.5 फीसदी रहने की संभावना है।

MSME को 59 मिनट में मिलेगा पांच करोड़ तक का लोन

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लोन इन 59 मिनट योजना के तहत अब पांच करोड़ रुपये तक का कर्ज मिल सकेगा। एसबीआई सहित पांच सरकारी बैंकों ने कर्ज की सीमा को बढ़ा दिया है। मोदी सरकार ने नवंबर 2018 में एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए योजना की शुरुआत की थी।
  • पीएसबी लोन इन 59 मिनट योजना के तहत एमएसएमई को एक करोड़ का कर्ज उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई थी। कारोबारियों के आवेदन को एक घंटे के भीतर स्वीकार करते हुए लोन पास कर दिया जाता है और आठ कारोबारी दिवस में कर्ज की राशि आवेदनकर्ता के खाते में आ जाती है। योजना का दायरा बढ़ाने के लिए एसबीआई, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, कॉरपोरेशन बैंक और आंध्र बैंक ने करार किया है। लोन इन 59 मिनट पोर्टल पर इन बैंकों का चुनाव करने वाले कारोबारियों को अब योजना के तहत पांच करोड़ की राशि का लोन एक घंटे में पास हो जाएगा। इस तरह के कर्ज पर ब्याज की शुरुआत 8.5 फीसदी से होती है।

मध्यकालिक रणनीति रूपरेखा उत्कर्ष 2022

  • रिजर्व बैंक ने मंगलवार को बैंक की मध्यम काल के तैयार की गई रणनीति रूपरेखा ‘उत्कर्ष 2022’ की शुरुआत की। यह रणनीति वैश्विक स्तर पर बन रहे वृहद आर्थिक परिवेश के अनुरूप तैयार की गई है।
  • इस रणनीतिक रूपरेखा की शुरुआत आरबीआई को मिले अधिकारों के तहत बेहतर कार्यप्रदर्शन हासिल करने तथा नागरिकों एवं अन्य संस्थानों का केन्द्रीय बैंक में विश्वास मजबूत करने के लिये की गई है।
  • रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसका प्रबंधन ‘उत्कर्ष 2022’ को लेकर काफी गंभीर है और इसे काफी महत्व देता है। केन्द्रीय बैंक एक उप- समिति के जरिये इसके क्रियान्वयन और प्रगति की समय समय पर निगरानी करता रहेगा।
  • रिजर्व बैंक के मूल उद्देश्य, मूल्यों और दृष्टि वक्तव्यों को नये सिरे से स्पष्ट करने के लिये अप्रैल 2015 में एक औपचारिक रणनीतिक प्रबंधन रूपरेखा को जारी किया गया था। इसका मकसद रिजर्व बैंक की रणनीति के लिये समय के अनुरूप एक नई रूपरेखा तैयार की जा सके।

:: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ::

सुपर फास्ट क्वांटम कंप्यूटर

  • क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की एक टीम को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। इन वैज्ञानिकों ने एक क्वांटम कंप्यूटर के सेंट्रल बिल्डिंग के सुपर फास्ट वर्जन का निर्माण किया है। यह कंप्यूटर किसी भी पेंचीदा समस्या का हल 200 गुना ज्यादा तेजी से कर सकता है।
  • क्वांटम कंप्यूटर का इस्तेमाल ऐसी गणनाएं करने में किया जाता है जिसे सैद्धांतिक या भौतिक रूप से लागू किया जा सकता है। क्वांटम कंप्यूटर बेहद पेचीदा गणनाओं को सुलझाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा आधुनिक क्वांटम कंप्यूटर में कॉस्मो से संबंधित रहस्यों को सुलझाने में वैज्ञानिकों की मदद करने की क्षमता होती है। इन गणनाओं की मदद से दुनिया की उत्पत्ति के रहस्य से लेकर दूसरे ग्रहों पर जीवन है या नहीं, इसका पता भी लगाया जा सकता है। यह अनुसंधान रिपोर्ट ‘नेचर जर्नल’ में प्रकाशित हुयी है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

एंटीबायोटिक का अत्यधिक प्रयोग

  • लचर निगरानी तंत्र और पुख्ता आंकड़ों का अभाव एंटीबायोटिक के प्रति बढ़ रही प्रतिरोधक के खिलाफ भारत की लड़ाई को कमजोर कर रहा है। ऐसा नहीं है कि भारत को एंटीबायोटिक के अत्यधिक प्रयोग के खतरे का अहसास नहीं है। इसके लिए दो साल पहले ‘नेशनल एक्शन प्लान’ भी बन चुका है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ‘मन की बात’ में इसके खतरे के प्रति आगाह कर चुके हैं। लेकिन धरातल पर एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने का ठोस प्रयास होता नहीं दिख रहा है।
  • 2017 में तैयार ‘नेशनल एक्शन प्लान ऑन एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस’ में एंटीबायोटिक के हो रहे दुरुपयोग और उससे निपटने में आ रही समस्याओं को विस्तार से बताया गया है। इसमें साथ ही इससे निपटने के लिए अगले पांच साल का रोडमैप भी बताया गया है। यही नहीं, भारत ने इस मुद्दे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के ‘वल्र्ड एक्शन प्लान’ के पांच लक्ष्यों में अपने लिए छठा लक्ष्य भी जोड़ लिया है, जिसमें एंटीबायोटिक के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता के खिलाफ लड़ाई में भारत को दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाने की बात कही गई है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि भारत खुद अपने घर में इस लड़ाई को अधूरे मन से लड़ रहा है।

मुर्गीपालन, मछलीपालन में भी इस्तेमाल

  • देश में एंटीबायोटिक की मार चौतरफा है। सीधे तौर पर सामान्य बीमारियों में बिना डॉक्टर की सलाह के ली जाने वाली एंटीबायोटिक दवा के अलावा मुर्गीपालन, मछली पालन और अन्य जानवरों में भी इसका बहुतायत से प्रयोग हो रहा है। जाहिर है एंटीबायोटिक के अत्यधिक प्रयोग से संबंधित बैक्टीरिया में इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। एक बार प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के बाद उस बैक्टीरिया के पीड़ित व्यक्ति का इलाज नामुमकिन हो जाता है।
  • सरकार के पास यह आंकड़ा तो है कि किस-किस बैक्टीरिया में किस-किस एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है। स्वास्थ्य मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एंटीबायोटिक के प्रति बढ़ते प्रतिरोध पर पुख्ता डाटा जुटाने की कोशिश की जा रही है और देशभर में लगभग तीन दर्जन प्रयोगशालाओं को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि किन-किन बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है। ताकि ऐसे बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों के वैकल्पिक इलाज का रास्ता ढूंढा जा सके।

सरकार के पास नहीं मरने वालों के आंकड़े

  • सरकार के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता के कारण इलाज नहीं हो पाने से हर साल देश में कितने व्यक्तियों की मौत होती है। जाहिर है आंकड़ों के अभाव में स्थिति की भयावहता को भांपना संभव नहीं है।

पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं

  • कई बार की कोशिशों के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से इस मुद्दे पर बात नहीं हो सकी। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रलय के वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि एंटीबायोटिक के प्रयोग को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है। भारत ने 2013 में एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसे एक नई एच-1 श्रेणी के ड्रग में शामिल कर दिया था। इसके तहत एंटीबायोटिक दवाओं के स्टिप पर लाल लाइन और आरएक्स लिखना अनिवार्य कर दिया ताकि दुकानदार सिर्फ डॉक्टर द्वारा लिखे जाने पर ही यह दवा बेच सके। लेकिन इसका भी कड़ाई से पालन नहीं कराया जा सका।
  • भारत में गरीबों की बड़ी संख्या और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं तक उनकी पहुंच का अभाव एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता के खिलाफ लड़ाई की राह में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गरीबों तक सस्ते एंटीबायोटिक की पहुंच को पूरी तक रोकना संभव नहीं है।

एफएएसएसआइ ने भी बनाया कड़ा नियम

  • निगरानी तंत्र का अभाव मुर्गीपालन, पशुपालन और मछली पालन में एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को नियंत्रित नहीं कर पाने की प्रमुख वजह है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएएसएसआइ) ने मुर्गी और पशुओं के चारे में एंटीबायोटिक की मात्र निर्धारित करने का कड़ा नियम बना दिया है।
  • सरकार के नेशनल एक्शन प्लान में ही स्वीकार किया गया है कि चारे में किसानों द्वारा एंटीबायोटिक मिलाने की स्थिति में निगरानी का कोई तंत्र नहीं है। नेशनल एक्शन प्लान में एंटीबायोटिक के उपयोग के प्रति देशभर में जागरूकता फैलाना भी शामिल था, लेकिन दवा दुकानों से लेकर अस्पतालों तक में यह कहीं नजर नहीं आता।

:: विविध ::

IFS संजीव सिंगला, IAS राजीव तोपनो बने PM के प्राइवेट सेक्रेटरी

  • भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी संजीव कुमार सिंगला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी सचिव बनाया गया है. वहीं हिरेन जोशी और प्रतीक दोषी को ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) नियुक्त किया गया है. आईएएस अफसर राजीव तोपनो को भी पीएम का निजी सचिव नियुक्त किया गया है. नई नियुक्तियों का ये ऑर्डर डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग ने 23 जुलाई को जारी किया.
  • हरेन जोशी इससे पहले की एनडीए सरकार में भी बतौर ओएसडी अपनी सेवा दे चुके हैं. जोशी को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में ओएसडी बनाया गया है, वहीं दोषी को रिसर्च और स्टैटेजी डिपार्टमेंट में नियुक्त किया गया है.

फॉर्च्यून ग्लोबल 500 लिस्ट

  • फॉर्च्यून ने कहा, ‘इस साल रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्लोबल 500 की सूची में 106वें स्थान पर है। इसने आईओसी को पीछे छोड़ा है जो 117वें पायदान पर है।’
  • ओएनजीसी इस सूची में 37 पायदान की छलांग के साथ 160वें स्थान पर है। एसबीआई 20 स्थान खिसककर 236वें स्थान पर पहुंच गई है। टाटा मोटर्स 33 स्थानों के नुकसान के साथ 265वें स्थान पर है। बीपीसीएल 39 पायदान चढ़कर 275वें स्थान पर पहुंची है। वहीं राजेश एक्सपोर्ट्स 90 स्थान खिसककर 495वें पायदान पर है।
  • अमेरिका की दिग्गज कंपनी वॉलमार्ट फॉर्च्यून 500 सूची में शीर्ष पर बनी हुई है। वहीं चीन की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी सिनोपेक ग्रुप एक स्थान की छलांग के साथ दूसरे पायदान पर है। नीदरलैंड की कंपनी डच शेल तीसरे और चाइना नेशनल पेट्रोलियम ऐंड स्टेट ग्रिड चौथे स्थान पर है। सऊदी अरब की पेट्रोलियम क्षेत्र की दिग्गज सऊदी अरामको पहले बार शीर्ष दस में पहुंची है। यह छठे स्थान पर है। वहीं बीपी, एक्सॉन मोबिल, फॉक्सवैगन और टोयोटा मोटर क्रमश: सातवें, आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर हैं।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • किस राज्य के द्वारा रैन वाटर हार्वेस्टिंग की तर्ज पर स्नो हार्वेस्टिंग की अवधारणा पर कार्य करने की योजना बनाई जा रही है? (हिमाचल प्रदेश)
  • स्पेस रिसर्च को प्रोत्साहित करने के लिए इसरो द्वारा कितने एनआईटी में अकादमिक सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई है? (6 एनआइटी-गुवाहाटी, जयपुर, कुरुक्षेत्र, राउरकेला, मेंगलोर और बीएचयूआइटी वाराणासी)
  • स्पेस रिसर्च को प्रोत्साहित करने के लिए इसरो के द्वारा उत्तर प्रदेश में स्थित किस संस्थान में अकादमिक सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई है? (बीएचयूआइटी-वाराणासी)
  • किस राज्य में ‘एक गांव एक खेत’ की अवधारणा पर कार्य शुरू करने पर विचार किया जा रहा है? (उत्तराखंड)
  • हाल ही में किसे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हेतु चयन किया गया है एवं ये किस दल से संबंधित है? (बोरिस जॉनसन - कंजर्वेटिव पार्टी)
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा फाइनल एनआरसी के पब्लिकेशन की तारीख किस तिथि तक बढ़ा दी गई है? (31 अगस्त 2019)
  • हाल ही में लाभ के पदों से संबंधित एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है। इस संयुक्त समिति में कितने सदस्य होंगे? (15 सदस्य -10 सदस्य लोकसभा के और 5 सदस्य राज्यसभा के)
  • हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने चालू वर्ष 2019 और 2020 में भारत की आर्थिक विकास दर का क्या अनुमान लगाया है? (क्रमशः 7 और 7.2)
  • किस संस्था के द्वारा मध्यम काल के लिए तैयार की गई रणनीति रेखा ‘उत्कृष्ट 2022’ को प्रारंभ किया गया है? (रिजर्व बैंक)
  • हाल ही में किस देश के वैज्ञानिकों के द्वारा एक क्वांटम कंप्यूटर के सेंट्रल बिल्डिंग के सुपर फास्ट वर्जन का निर्माण किया गया है? (ऑस्ट्रेलिया)
  • हाल ही में किस अधिकारी को प्रधानमंत्री के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है? (संजीव कुमार सिंगला और राजीव तोपनो)
  • हाल ही में जारी हुई फॉर्चून ग्लोबल 500 की सूची में कौन सी वैश्विक कंपनी शीर्ष स्थान पर बनी हुई है? (वॉलमार्ट)
  • हाल ही में जारी हुई फॉर्चून ग्लोबल 500 की सूची में कौन सी भारतीय कंपनी सिर्फ स्थान पर काबिज है? (रिलायंस इंडस्ट्रीज)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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