(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 जुलाई 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 जुलाई 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

'मेट्रोलाइट' ट्रेन

  • छोटे शहरों के लिए केंद्र सरकार ने 'मेट्रोलाइट' ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। यह ट्रेनें उन स्थानों पर चलाई जाएंगी, जहां यात्रियों की संख्या अधिक नहीं हैं। इन ट्रेनों में तीन कोच होंगे और इसकी गति 25 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं होगी। यह ट्रेन जमीन के साथ ही खंभों के ऊपर भी चलेगी। मेट्रो की तुलना में इसकी लागत कम होने के साथ ही यह मेट्रो के फीडर प्रणाली के तौर पर भी काम करेगी। इसके लिए केंद्र राज्यों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगा।
  • केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय ने 'मेट्रोलाइट' प्रणाली के संबंध में मानक जारी कर दिए हैं। मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल जिस मेट्रो रेल प्रणाली का विकास किया जा रहा है वो उच्च क्षमता वाली है, जिसके लिए बड़े शहरों और उनमें यात्रा करने वाले अधिक लोगों की जरूरत है। भाजपा ने चुनाव घोषणा पत्र में मेट्रो का विस्तार 50 शहरों में करने का वादा किया था।

'मेट्रोलाइट' ट्रेन की विशेषता

  • मेट्रोलाइट का अपना अलग एक रास्ता होगा। सड़क पर चल रहे यातायात से इसकी गति प्रभावित नहीं हो, इसके लिए जहां जरूरत होगी वहां पर दोनों तरफ बाड़ भी लगाई जाएगी। यह ट्रेन जमीन और खंभे दोनों पर चलेगी, लेकिन खंभे पर ट्रेन चलाने की अनुमति तभी दी जाएगी जब उसे भूमि पर चलाना संभव नहीं होगा। सबसे खास बात यह है कि ट्रेन के खंभों के निर्माण के लिए सड़क के बीचोंबीच मात्र 2.2 मीटर जगह की ही जरूरत होगी।
  • इस ट्रेन में तीन कोच होंगे। जो एक-दूसरे से जुड़े होंगे। इन लो फ्लोर कोच की जमीन से ऊंचाई 300 से 350 मिमी होगी। जबकि एक कोच की लंबाई 33 मीटर के आसपास होगी। तीनों कोचों में 300 यात्री तक सफर कर सकेंगे। कोच स्टेनलस स्टील या फिर एल्यूमिनियम के बने होंगे।
  • मेट्रोलाइट प्रणाली के लिए जो प्लेटफार्म बनाए जाएंगे उनके ऊपर शेड होगा। हालांकि इसमें एएफसी गेट (आटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम), प्लेटफार्म स्क्रीन डोर, एक्स-रे और बैगज स्कैनर नहीं होंगे। टिकट निरीक्षक या नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी-वन नेशन वन कार्ड जैसी प्रणाली) को मेट्रोलाइट के अंदर स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। मेट्रोलाइट के जारी किए गए मानकों में कहा गया है कि अगर जांच के दौरान किसी यात्री को बिना टिकट पकड़ा जाता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

डिफेंस एक्सपो इंडिया-2020 (Defence Expo India 2020)

  • रक्षा मंत्रालय ने रविवार को एलान किया कि भारत की बड़ी रक्षा प्रदर्शनी 'द डेफएक्सपो' का आयोजन अगले साल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किया जाएगा। इसमें विश्व की बड़ी रक्षा सामग्री विनिर्माण कंपनियों के साथ-साथ घरेलू कंपनियां भी हिस्सा लेंगी। यह प्रदर्शनी रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए उत्तर प्रदेश को उभरते हुए आकर्षक ठिकाने के रूप में स्थापित करेगी। साथ ही यह रक्षा उद्योग में साझीदारी व संयुक्त उद्यमों के लिए प्लेटफॉर्म भी मुहैया कराएगी।
  • यह पहला मौका होगा जब लखनऊ 'द डेफएक्सपो' की मेजबानी करेगा। इसमें बड़ी संख्या में अग्र्रणी देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। अधिकारी ने बताया कि बड़ी विदेशी व स्वदेशी कंपनियां इस प्रदर्शनी में अपने अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन करेंगी। इनकी नजर विश्व के सबसे बड़े हथियार आयातक देश के लाभदायक सैन्य बाजार पर होगी।
  • लखनऊ में 5 से 8 फरवरी के बीच आयोजित होने वाले 11वें डिफेंस एक्सपो इंडिया-2020 की थीम 'भारत : उभरता हुआ रक्षा विनिर्माण केंद्र' रखा गया है। डिफेंस सेक्टर में तेजी से उभरते उत्तर प्रदेश में आयोजित होने जा रहे इस मेले में दुनियाभर के अत्याधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
  • उत्तर प्रदेश में रक्षा उद्योगों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। यहां ङ्क्षहदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड की चार इकाइयां- लखनऊ, कानपुर, कोरवा (अमेठी) व नैनी (प्रयागराज), नौ आयुद्ध निर्माण इकाइयां व एक सार्वजनिक क्षेत्र का रक्षा उपक्रम- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, गाजियाबाद में स्थित है।

उत्तर प्रदेश में दो कौशल उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों की स्‍थापना

  • प्‍लंबिग के उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र की ग्रेटर नोएडा में और सेवा क्षेत्र के उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र की वाराणसी में स्‍थापना की जाएगी।
  • भारत कौशल संस्‍थान (कानपुर) में जल्‍द ही काम शुरू हो जाएगा।
  • दोनों केन्‍द्र अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के अति आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस होंगे। इनकी स्‍थापना राज्‍य और केन्‍द्र के बीच संयुक्‍त सहयोग के तहत की जाएगी। इसके लिए राज्‍य दो भवनों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्‍ध कराएगा। बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण आपूर्ति संबंधित क्षेत्र कौशल परिषदों द्वारा उपलब्‍ध कराई जाएगी और औद्योगिक भागीदार बाजार की मांग और रुख के अनुसार इन्‍हें प्रासांगिक बनाने में मदद करेंगे।

पृष्ठभूमि

  • केन्‍द्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री डॉ. महेन्‍द्रनाथ पांडेय और उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री योगी आदित्‍यनाथ के बीच लखनऊ में एक बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में प्‍लंबिग के लिए उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र की ग्रेटर नोएडा में और सेवा क्षेत्र के लिए एक उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र की वाराणसी में स्‍थापना करने का संयुक्‍त निर्णय लिया गया।

'रेल मदद'

  • अब रेलवे हेल्पलाइन नंबरों की उधेड़बुन से निजात दिलाते हुए असली 'रेल मदद' मुहैया कराएगा। 'रेल मदद' एक तरह की वेबसाइट होगी। इसका मोबाइल ऐप भी जल्द लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल 'रेल मदद' का ट्रायल चल रहा है। इसके शुरू होते ही 139 (इन्क्वॉयरी) को छोड़ कर रेलवे के बाकी हेल्पलाइन नंबर बंद हो जाएंगे।
  • रेल मदद ऐप का ट्रायल के तौर पर 13 जुलाई को बीटा वर्जन लॉन्च हुआ है। प्ले स्टोर से इसका ऐप डाउनलोड किया जा सकता है। 'रेल मदद' ऐप में हर तरह की शिकायत के लिए अलग-अलग आइकन दिए गए हैं। मसलन, ट्रेन के अंदर किसी शिकायत पर ट्रेन कंप्लेंट। स्टेशन पर किसी परेशानी पर स्टेशन कंप्लेंट ऑप्शन अलग-अलग हैं।
  • बीटा वर्जन सफल होते ही ऐप को व्यापक स्तर पर लॉन्च कर दिया जाएगा। शासन के जनसुनवाई पोर्टल की तरह ही 'रेल मदद' ऐप में भी आप जान सकेंगे कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई या कहां तक शिकायत पहुंची। इसके लिए ट्रैक योर कंप्लेंट का भी ऑप्शन है।
  • ट्रायल सफल होते ही रेलवे जल्द ही 'रेल मदद' वेबसाइट और मोबाइल एप लॉन्च करने जा रहा है। इससे तमाम हेल्पलाइन नंबर की जगह 'रेल मदद' का ही उपयोग मुसाफिर कर सकेंगे। हेल्पलाइन नंबर 139 जारी रहेगा।

पृष्ठभूमि

यात्रियों की समस्याओं को हल करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए रेलवे ने कई हेल्पलाइन नंबर्स जारी किए हैं। ऐसे महत्वपूर्ण नंबरों की संख्या 36 है। कई बार यात्री इनके जाल में ही उलझकर रह जाता है और उसकी परेशानी हल नहीं हो पाती।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

शिनजियांग प्रांत

  • चीन पर आरोप है कि वह शिनजियांग में नजरबंदी शिविरों में जातीय उइगर मुसलमानों को कथित तौर पर हिरासत में रखकर उनपर अत्याचार करता है। इन नजरबंदी शिविरों में बंद उइगर मुसलमानों को अपने कई धार्मिक क्रिय-कलाप करने की इजाजत नहीं होती है। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना कर रहे चीन ने रविवार को एक श्वेत पत्र जारी किया और कहा कि यह अस्थिर प्रांत देश का ‘अविभाज्य’ हिस्सा है तथा यह कभी ‘पूर्वी तुर्किस्तान’ नहीं रहा जैसा कि अलगाववादी दावा करते हैं।
  • चीन उन खबरों को लेकर पश्चिमी देशों की तीखी आलोचना का सामना कर रहा है कि उसने भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तथा कई मध्य एशियाई देशों के साथ लगती सीमा पर शिनजियांग में नजरबंदी शिविरों में 10 लाख लोगों को बंद कर रखा है जिनमें से ज्यादातर जातीय उइगुर हैं। खबरें हैं कि उसने अलगाववादी पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक आंदोलन (ETIM) के हिंसक हमलों को नियंत्रित करने के प्रयास में ऐसा किया। आपको बता दें कि उइगर मुसलमानों का यह संगठन शिनजियांग को पूर्वी तुर्किस्तान बताता रहा है।
  • चीन अशांत शिनजियांग क्षेत्र और बीजिंग समेत देश के कई अन्य हिस्सों में कई हिंसक हमलों के लिए ETIM को जिम्मेदार ठहराता है। संसाधनों से भरपूर शिनजियांग प्रांत तुर्की भाषा बोलने वाले एक करोड़ से अधिक उइगुर मुसलमानों का घर है। चीन ने रविवार को श्वेत पत्र जारी कर कहा कि चीन के इतिहास में कभी भी उत्तर पश्चिम शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र ‘पूर्वी तुर्किस्तान’ का हिस्सा नहीं रहा और ‘पूर्वी तुर्किस्तान’ नाम का कोई राज्य नहीं रहा।
  • श्वेत पत्र में कहा गया है, ‘हाल के समय में चीन में और उसके बाहर शत्रु ताकतों खासतौर से अलगाववादियों, धार्मिक चरमपंथियों और आतंकवादियों ने इतिहास तथा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर चीन को बांटने की कोशिश की। शिनजियांग लंबे समय से चीनी क्षेत्र का अविभाज्य हिस्सा रहा है। कभी भी उसे तथाकथित पूर्वी तुर्किस्तान नहीं कहा गया। उइगुर जातीय समूह प्रवास और एकीकरण की लंबी प्रक्रिया से अस्तित्व में आया।’

:: राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

ईसीआई फ्लैगशिप आईटी प्रोग्राम – इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम (ईटीपीबीएस)

  • भारत निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की गईं जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम (ईटीपीबीएस) भी अपनी तरह की एक अनूठी प्रणाली है। 2014 के पिछले आम चुनाव के दौरान पंजीकृत डाक मतदाताओं की 13,27,627 संख्या की तुलना में, 2019 में संपन्न दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में डाक मतदाताओं की 18,02,646 की रिकॉर्ड उच्चतम संख्या दर्ज की गई। पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण में सक्षम एक समर्पित पोर्टल https://www.servicevoter.eci.nic.in के माध्यम से डाक मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रसंस्करण समय बचाने, संसाधनों को बचाने और मानवीय त्रुटियों से बचने के लिए डाक मतपत्र भेजे गए।
  • देश के बाहर दूतावासों में तैनात शस्त्र अधिनियम और सरकारी अधिकारियों के तहत केंद्रीय बलों में काम करने वाले व्यक्तियों को डाक मतदाता के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और उनके लिए ऑनलाइन नामांकन का प्रावधान किया जाता है। 2019 के आम चुनावों में डाक मतदाताओं की कुल संख्या में से, 10,16,245 रक्षा मंत्रालय से ; 7,82,595 गृह मंत्रालय (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) से; 3539 विदेश मंत्रालय और 267 राज्य पुलिस के थे। आम चुनाव 2019 में फैले सात चरणों में, कुल 18,02,646 डाक मतपत्र भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख आईटी कार्यक्रम - ईटीपीबीएस का उपयोग करते हुए इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे गए थे। इससे कुल 10,84,266 ई-पोस्टल मत प्राप्त हुए जिन्होंने 60.14% मतदान का संकेत दिया।

इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम (ईटीपीबीएस)

  • ईटीपीबीएस पूरी तरह से एक सुरक्षित प्रणाली है, जिसमें सुरक्षा की दो परतें हैं। ओटीपी और पिन के उपयोग से मतदान की गोपनीयता बनी रहती है और पोर्टल https: // www.etpbs.in में अनूठे क्यूआर कोड के कारण डाले गये ईटीपीबी का कोई दोहराव संभव नहीं है। इस प्रणाली के माध्यम से डाक मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर कहीं से भी, इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त डाक मतपत्र पर अपना वोट डाल सकते है, जिससे मतदान का अवसर खोने की संभावना कम हो जाती है। ऑनलाइन प्रणाली का उद्देश्य रक्षा कार्मिकों के लिए डाक मतदाता बनने के लिए सुविधाजनक और उपयोग में आसान ऑनलाइन प्रणाली तैयार करना था। 2014 में डाक मतदाता द्वारा केवल 4 % मतदान दर्ज किया गया था।
  • भारत निर्वाचन आयोग के ईटीपीबीएस ने "कोई मतदाता पीछे न छूटे" के आदर्श वाक्य के साथ, राष्ट्र के लिए अपना कर्तव्य निभाते हुए मतदान करने के अपने संवैधानिक अधिकार के साथ सभी पात्र डाक मतदाताओं का सशक्तिकरण सुनिश्चित किया है राज्यवार आंकड़े के आधार पर अल्पसंख्यकों का निर्धारण की मांग
  • राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनएमसी) राष्ट्रीय आंकड़े की जगह राज्यवार जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यकों के निर्धारण की मांग ठुकरा सकता है। यह जानकारी रविवार को एक अधिकारी ने दी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तीन सदस्यीय समिति कुछ दिनों में भाजपा नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय को आयोग की रिपोर्ट की प्रति सौंपेगी। उपाध्याय ने इस मुद्दे पर शीर्ष कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर रखी है।
  • आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य-स्तरीय जनसंख्या आंकड़े के आधार पर अल्पसंख्यक समुदायों के निर्धारण से कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। भविष्य में लोग जिला और प्रखंड स्तर की जनसंख्या के आधार निर्धारण की मांग करेंगे।
  • अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के तहत अल्पसंख्यक की परिभाषा में बदलाव की गुंजाइश नहीं है। इसलिए राज्यवार आधार पर अल्पसंख्यक का निर्धारण करने की मांग ठुकराई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने हमें मामले में याची को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट तैयार है और कुछ दिनों में सौंपी जा सकती है।
  • शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर एनसीएम के अध्यक्ष सैयद जीएच रिजवी ने मुद्दे पर रिपोर्ट सौंपने के लिए फरवरी में उपसमिति गठित की थी। आयोग के उपाध्यक्ष जार्ज कुरियन इसके प्रमुख थे। 11 फरवरी को कोर्ट ने उपाध्याय से इस मुद्दे पर एनसीएम से संपर्क करने और आयोग को उनके आवेदन पर तीन महीने में फैसला लेने के लिए कहा था। अपनी अर्जी में भाजपा नेता ने समुदाय की राज्यवार जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यक को परिभाषित करने करने की मांग की थी।
  • उपाध्याय ने जुलाई में नई अर्जी दायर की जिसके बाद शीर्ष कोर्ट ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से सहायता करने को कहा है। याचिका में कहा गया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार लक्षद्वीप, मिजोरम, नगालैंड, जम्मू एवं कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और पंजाब में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। उपाध्याय ने 23 अक्टूबर 1993 को जारी सरकारी अध्यादेश को भी चुनौती दी है। इस अध्यादेश के जरिये पांच समुदायों मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख और पारसी को अल्पसंख्यक घोषित किया गया। बाद में जैन समुदाय को भी अल्पसंख्यक घोषित किया गया।

नैदानिक स्थापना (केंद्र सरकार) नियम, 2019

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंग्रेजी और आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सुविधा मुहैया कराने वाले क्लीनिक के लिए न्यूनतम मानक तय करने का प्रस्ताव किया है। इन मानकों को पूरा करने वाले पर ही क्लीनिक का पंजीकरण हो सकेगा।
  • नैदानिक स्थापना (केंद्र सरकार) नियम, 2019 के संशोधनों में प्रस्तावित 'न्यूनतम मानकों' के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारी, उपकरण, दवाइयां, सहायक सेवा और रिकॉर्ड का पालन नहीं करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
  • नैदानिक स्थापना (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत क्लीनिक चलाने के लिए पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया है। फिलहाल मेडिकल डाइग्नोस्टिक लैब के लिए ही न्यूनतम मानक तय हैं, जिन्हें 21 मई, 2018 को अधिसूचित किया गया था। प्रस्तावित सुधारों का मकसद विभिन्न चिकित्सा प्रतिष्ठानों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं में एकरूपता लाना है।
  • नैदानिक स्थापना (केंद्र सरकार) तीसरा संशोधन नियम, 2019 के मसौदे को स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है और इससे प्रभावित होने वाले लोगों से 43 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।
  • प्रस्तावित मानकों के मुताबिक क्लीनिक में मरीजों, उनके परिजनों, स्टाफ और आगंतुकों के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए भौतिक सुविधा का विकास और रखरखाव करना होगा। क्लीनिक स्वच्छ वातावरण वाले स्थान पर स्थित होना चाहिए और यदि कोई स्थानीय उपनियमों हों तो उनका समय-समय पर पालन किया जाना चाहिए।
  • क्लीनिक में इलाज करने के लिए आने वाले डॉक्टरों के नाम और पंजीकरण संख्या, उपलब्ध इलाज, डॉक्टरों के बैठने के समय और फीस के बारे में बोर्ड पर स्थानीय भाषा में जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। ये मानक उन सभी क्लीनिक पर लागू होंगे जहां एक या एक से ज्यादा चिकित्सक बैठते हों।

‘शहीदों के परिवारों को वित्तीय सहायता का भुगतान अधिनियम, 2019’

  • लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया गया है जिसमें सशस्त्र बलों के शहीदों के आश्रितों को दो करोड़ रुपये की सहायता राशि, नि:शुल्क रेलवे पास और सरकारी एवं निजी नौकरियों में पांच फीसदी तक आरक्षण दिए जाने का प्रस्ताव किया गया है।
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद सुप्रिया सुले की ओर से यह निजी विधेयक पेश किया गया है। इसमें शहीदों के आश्रितों को अन्य कई सुविधाएं देने का प्रस्ताव किया गया है। लोकसभा में यह विधेयक पेश करते हुए सुप्रिया ने कहा कि ‘शहीदों के परिवारों को वित्तीय सहायता का भुगतान अधिनियम, 2019’ नाम का एक नया अधिनियम गठित किया जाना चाहिए।
  • इस अधिनियम के तहत रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एक वित्तीय सहायता भुगतान प्राधिकरण होना चाहिए, जो सशस्त्र बलों के शहीदों के आश्रितों के कल्याण और भुगतान संबंधी मुद्दों की निगरानी करेगा।
  • विधेयक में सैनिकों की शहादत को मातृभूमि के लिए ‘‘सर्वोच्च बलिदान’’ करार देते हुए सुप्रिया ने कहा कि शहीदों के परिवारों को जरूरी सुविधाएं देना सरकार की न्यूनतम जिम्मेदारी है, ताकि उनके नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।
  • इस विधेयक में कहा गया है कि कर्तव्य पालन के दौरान जान गंवाने वाले थलसेना, वायुसेना, नौसेना एवं तटरक्षक बल के सभी सैनिकों को ‘शहीद’ माना जाए।

:: आर्थिक समाचार ::

निर्यात क्षेत्र में संकट

  • जून में निर्यात नौ महीने के निचले स्तर पर आने के बाद अब निकट भविष्य में भी निर्यात में अपेक्षित सुधार की संभावना नहीं के बराबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिकूल स्थितियों और घरेलू मोर्चे पर कर्ज की कमी व अधिक लागत जैसे मसले निर्यातकों के लिए अभी भी परेशानी का सबब बने हुए हैं। निर्यातकों का मानना है कि जब तक घरेलू स्तर पर कर्ज की समस्या का हल नहीं निकलता तब तक निर्यात को संभालना मुश्किल होगा।
  • बीते नौ महीने से निर्यात वृद्धि की दर सकारात्मक बनी हुई थी। लेकिन जून में इसमें 9.01 फीसद की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में निर्यात की जाने वाली 30 प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में से केवल नौ में ही वृद्धि दर्ज की गई। परेशानी की बात यह है कि श्रम आधारित उद्योगों से होने वाले निर्यात में भी कमी आ रही है। निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के प्रेसिडेंट शरद कुमार सराफ के मुताबिक घरेलू स्तर पर निर्यातकों के समक्ष आ रही परेशानियों को तुरंत हल करना आवश्यक है। इसमें निर्यातकों को कर्ज मिलने में हो रही दिक्कत, कर्ज की अधिक लागत और जीएसटी के रिफंड पर ध्यान देना प्रमुख हैं।
  • वैश्विक बाजार में अमेरिका और चीन के बीच चल रहा कारोबारी तनाव तो मुश्किल बढ़ा ही रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बने नए राजनीतिक तनाव ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित किया है। इससे उत्पन्न अनिश्चितता की स्थिति ने निर्यातकों को काफी हद तक प्रभावित किया है। इस अनिश्चितता का असर न केवल निवेश पर पड़ रहा है बल्कि मुद्रा में हो रहा उतार-चढ़ाव भी निर्यातकों के लिए मुश्किल बना हुआ है।

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तुत सुझाव एवं उपाय

  • निर्यात की धीमी रफ्तार को देखते हुए फियो ने पहले भी सरकार को कई सुझाव दिए हैं, जिनसे निर्यात में वृद्धि की जा सकती है। फियो का मानना है कि कृषि उत्पादों का निर्यात करने वाले निर्यातकों को ब्याज पर मिलने वाली छूट और घरेलू स्तर पर विदेशी पर्यटकों को बेचे जाने वाले उत्पादों की बिक्री को निर्यात मानने जैसे प्रस्तावों पर भी सरकार को तुरंत कदम उठाना होगा। इसके अलावा फियो ने पर्यटकों को हवाई अड्डों पर जीएसटी के रिफंड की सुविधा शुरू करने के काम में तेजी लाने का सुझाव भी दिया है। इससे विदेशी पर्यटकों को अधिक से अधिक उत्पाद खरीदने को प्रोत्साहन मिलेगा। इन उपायों से निर्यात में थोड़ी तेजी लाई जा सकती है।
  • उद्योग जगत की संस्था सीआइआइ ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 31 उत्पादों की पहचान की है। इनमें महिलाओं के परिधान, दवाएं व अन्य वस्तुएं शामिल हैं। जून में निर्यात में बड़ी गिरावट को देखते हुए सीआइआइ ने उन उपायों की पहचान शुरू की है, जिनसे निर्यात को बढ़ावा दिया जा सकता है। सीआइआइ ने सरकार को यह भी सुझाया है कि मार्केटिंग और प्रमोशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मार्केटिंग केंद्र स्थापित करे।
  • सीआइआइ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता, वैश्विक आपूर्ति तंत्र में बदलाव और तेजी से बदलते वैश्विक कारोबारी गणित के मौजूदा माहौल में निर्यात के लिए ठोस रणनीति की बेहद जरूरत है। बनर्जी ने कहा कि हमने उन उत्पादों की पहचान की है, जिससे निर्यात को बढ़ाया जा सके।

भारतमाला के लिए एलआइसी देगी सरल कर्ज

  • सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने भारतमाला परियोजना के लिए 2024 तक 1.25 लाख करोड़ रुपये का सरल कर्ज देना स्वीकार किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक साक्षात्कार में कहा कि LIC ने सालभर में 25,000 करोड़ रुपये और पांच साल में 1.25 लाख करोड़ रुपये की पेशकश की है। उन्होंने सैद्धांतिक सहमति दी है। हम राजमार्गों के निर्माण में इस फंड का इस्तेमाल करेंगे। LIC के चेयरमैन आर कुमार ने पिछले सप्ताह गडकरी से मुलाकात की थी।
  • इस परियोजना की संशोधित लागत बढ़कर 8.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। शुरू में इस परियोजना को 5.35 लाख करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी मिली थी।
  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और एलआइसी के अधिकारी एक साथ बैठकर अन्य विवरण तय करेंगे, जिनमें ब्याज दर और कर्ज की वापसी भी शामिल होंगे। यह कर्ज बांड के रूप में लिया जाएगा और इसे एनएचएआइ जारी करेगी। मंत्री ने कहा कि हमारे पास फंड की कमी नहीं है। परियोजना जैसी ही पूरी होगी, इसका मौद्रीकरण होगा। इस प्रक्रिया से मिले फंड का उपयोग भी राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा।

IL&FS संकट: सेबी ने रेटिंग एजेंसियों के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाया

  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) ने आईएलएंडएफएस मामले में पांच क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है। संकटग्रस्त आईएलएंडएफएस समूह के नए बोर्ड द्वारा कराए फॉरेंसिंक ऑडिट में गंभीर खामियों का खुलासा किया गया है।
  • इसमें क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और आईएलएंडएफएस समूह के पूर्व शीर्ष अधिकारियों के बीच मिलीभगत पर भी उंगली उठायी गयी है और निष्कर्ष निकाला गया है कि कमजोर वित्तीय स्थिति के बावजूद इस समूह की कंपनियों को शीर्ष वित्तीय रेटिंग दी गई।
  • दो रेटिंग एजेंसियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को सेबी की जांच पूरी होने तक पहले ही जबरन अवकाश पर भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नियामक अब सभी पांचों एजेंसियों में संभावित प्रणालीगत खामियों की जांच कर रहा है। इसके अलावा नियामक रेटिंग प्रक्रियाओं में जानबूझकर गड़बड़ी करने के लिए कई लोगों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
  • ग्रांट थॉर्नटन द्वारा किए गए विशेष आडिट में इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) के पूर्व प्रमुख कार्यकारियों और रेटिंग एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के बीच ई-मेल के आदान प्रदान की समीक्षा की है। इस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि रेटिंग एजेंसियों के अधिकारियों को गंभीर नकदी चिंताओं और समूह की कमजोर होती वित्तीय स्थिति की जानकारी थी।
  • विशेष ऑडिट की अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएलएंडएफएस समूह के तत्कालीन महत्वपूर्ण अधिकारियों ने कई तरीकों का इस्तेमाल किया और रेटिंग एजेंसियों के अधिकारियों को उपहार या अन्य लाभ दिए जिससे जून, 2012 से जून, 2018 के दौरान आईएलएंडएफएस समूह को लगातार ऊंची रेटिंग मिलती रही।
  • रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि कई बार क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने रेटिंग को कम करने की तैयारी की लेकिन आईएलएंडएफएस समूह के अधिकरियों ने रेटिंग एजेंसी के अधिकारियों को लाभ-उपहार आदि देकर उन्हें ऐसा करने से 'रोक दिया।

:: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ::

सेंटर फॉर सेलुलर मॉलिक्‍यूलर बायोलॉजी में एनएसजी सुविधा का उद्घाटन

  • केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज हैदराबाद में सेंटर फॉर सेलुलर मॉलिक्‍यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) में अगली पीढ़ी अनुक्रमण (एनएसजी) सुविधा का उद्घाटन किया। इस सुविधा में उच्‍च जीनोम अनुक्रमण और नैदानिक नमूनों के डायग्‍नोस्टिक अनुक्रमण की प्रौद्योगिकी शामिल है।
  • 8 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई अति आधुनिक मशीन 8 मिनट में 18,000 नमूनों का अनुक्रमण कर सकती है। एनएसजी द्वारा प्रसव पूर्व अनुवांशिक जांच और परामर्श में मदद से निदान और उपचार के लिए महत्‍वपूर्ण अनुवांशिक डाटा का बड़े पैमाने पर सृजन होगा।
  • डॉ. हर्षवर्धन ने सीएसआईआर के तहत कृषि मिशन परियोजना के एक हिस्‍से के रूप में निर्मित किए जाने वाले ‘स्‍केलअप फैसेलिटी फॉर एग्रो केमिकल्‍स’ की भी आधारशिला रखी। इस परियोजना का उद्देश्‍य सस्‍ती और प्रदूषण संबंधी मुद्दों से मुक्‍त प्रक्रियाओं का विकास करना है। एग्रो मिशन में सतत कृषिजन प्रक्रियाओं को विकसित करने में किसानों की दिलचस्‍पी को बढ़ावा देने पर ध्‍यान दिया गया है।

चंद्रयान 2 मिशन-रोवर प्रज्ञान

भारत के 'चंद्रयान 2' मिशन के कुल तीन मुख्य हिस्से हैं।

1. ऑर्बिट-यह विक्रम लैंडर के साथ संचार करने में सक्षम होगा।

2. लैंडर-इसे विक्रम नाम दिया गया है। यह चांद पर रोवर की सॉफ्ट लैंडिंग कराएगा। मतलब रोवर लैंडिंग से पहले इसी के भीतर होगा। विक्रम के पास बैंगलोर के नजदीक बयालू में आई डी एस एन के साथ-साथ ऑर्बिटर और रोवर के साथ संवाद करने की क्षमता है।

3. रोवर- जिसे प्रज्ञान नाम दिया गया है। 27 किलोग्राम का यह रोवर 6 पहिए वाला एक रोबॉट वाहन है। इसका नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब 'ज्ञान' होता है।

रोवर प्रज्ञान-

  • चांद पर 500 मीटर (½ आधा किलोमीटर) तक घूम सकता है। यह सौर ऊर्जा की मदद से काम करता है। रोवर सिर्फ लैंडर के साथ संवाद कर सकता है। इसकी कुल लाइफ 1 लूनर डे की है। जिसका मतलब पृथ्वी के लगभग 14 दिन होता है। इसके बाद यह रोवर वहीं चलना बंद हो जाएगा। चंद्रयान पर कुल 13 पेलोड हैं। इसमें से 2 पेलोड रोवर पर भी होंगे।
  • लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS): जिस जगह रोवर उतरेगा यह वहां मौजूद तत्वों की जानकारी जुटाएगा। इसके लिए यह लेजर पल्स छोड़ेगा। वहां सड़ रहे प्लाजमा को भी यह रेडिऐशन से रीड करेगा।
    अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS): वहां की सतह किस-किस चीज से बनी है, यह पता लगाएगा।
  • प्रज्ञान से पहले भी चांद पर कई रोवर गए हैं। ये रोवर चांद पर भेजे गए अलग-अलग यानों के साथ गए, जिन्हें सोवियत यूनियन, अमेरिका, चीन आदि ने भेजा। प्रज्ञान से पहले चांद पर 5 रोवर जा चुके हैं।

‘ओरियन क्रू’ उड़ान को तैयार

  • नासा का पहला मानवरहित ओरियन क्रू कैप्सूल चंद्रमा पर जाने के लिए तैयार है। ‘अपोलो 11’ की चांद पर लैंडिंग की 50वीं सालगिरह पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने यह घोषणा की।
  • आर्टिमिस-1 मिशन के लिए ओरियन क्रू यान पूरी तरह तैयार है और इसकी पहली ऐतिहासिक उड़ान की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नासा ने इस कार्यक्रम का नाम ‘आर्टिमिस’ रखा है।

‘डीप न्यूरल नेटवर्क’

  • सोशल मीडिया के यूजर्स की गोपनीयता के लिए फर्जी वीडियो एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है। इससे निपटने के लिए भारतीय मूल के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का एक ऐसा ‘डीप न्यूरल नेटवर्क’ विकसित किया है, जो तस्वीरों या वीडियो फुटेज के साथ की गई छेड़छाड़ का आसानी से पता लगा सकता है।
  • वीडियो फुटेज के साथ छेड़छाड़ करना, किसी एक व्यक्ति के चेहरे के हाव-भावों को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बदल देना ‘डीपफेक वीडियो’ कहलाता है। यह ऐसे वीडियो होते हैं जिन्हें देखकर आप आसानी से अंदाजा नहीं लगा सकते कि वीडियो फुटेज में जो व्यक्ति दिख रहा है वह कोई और है। कई देशों में ऐसे वीडियो बनाकर लोग इनका प्रयोग एक राजनीतिक हथियार के रूप में भी कर रहे हैं, जो किसी भी व्यक्ति की पूरी जिंदगी की कमाई को महज कुछ ही पल के वीडियो के जरिये तबाह कर देते हैं।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, रिवरसाइड में इलेक्ट्रॉनिक एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अमित राय चौधरी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने टीम अभी भी स्थिर चित्रों (इमेज) पर काम कर रही है, लेकिन उनके द्वारा बनाया गया नया सिस्टम ‘डीपफेक’ वीडियो की पहचान आसानी से कर सकता है। प्रोफेसर राय चौधरी ने कहा कि हमने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो छेड़छाड़ की गई इमेजों और सामान्य इमेजों के बीच का फर्क पहचान करता है। उन्होंने कहा कि यदि आप अभी हमें एक नई इमेज उपलब्ध कराएं तो हम इस सिस्टम की मदद से यह बता सकते हैं कि उस इमेज के साथ छेड़छाड़ की गई है या नहीं। यदि इमेज के साथ छेड़छाड़ की गई होगी तो यह भी पता लगाया जा सकता है कि इमेज के किन हिस्सों को बदला गया है।
  • ‘डीप न्यूरल नेटवर्क’ वास्तविकता में एक कंप्यूटर सिस्टम ही है, जिसे एआइ शोधकर्ताओं ने विशिष्ट कार्यो के लिए प्रशिक्षित किया है। फेक वीडियो के मामले में यह नेटवर्क बदली हुई इमेजों की पहचान करता है। दरअसल, वीडियो वास्तविकता में स्थिर चित्रों का ही एक गतिशील रूप है, पर ये स्थिर चित्र वीडियो में परत-दर-परत इतनी तेजी से आगे बढ़ते हैं कि इन्हें आसानी से पहचान पाना संभव ही नहीं है। इस सिस्टम की मदद से अब यह पता लगाया जा सकता है कि वीडियो में किस इमेज के साथ-छेड़छाड़ की गई है। इस सिस्टम की मदद से वीडियो की संरचना और स्थिर चित्रों के बीच संबंध का पता लगाया जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि किसी भी इमेज के साथ छेड़छाड़ करने पर उसके पिक्सल बदल जाते हैं। ऐसे में यदि उन्हीं इमेजों के जरिये वीडियो तैयार किया जाता है तो इस सिस्टम की मदद से उन्हें पकड़ा जा सकता है।
  • इस सिस्टम के परीक्षण के लिए शोधकर्ताओं ने एक इमेज का सेट तैयार किया। जब न्यूरल नेटवर्क सिस्टम के जरिये उसकी जांच की गई तो उसने आसानी से बदली हुई इमेजों को न सिर्फ पहचाना गया, बल्कि इमेज के जिन-जिन भागों को बदला गया था उन्हें भी चिन्हित कर दिया गया। यह अध्ययन आइईईई ट्रांजेक्शनंस ऑन इमेज प्रोसेसिंग जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस सिस्टम की मदद से हम साइबर हमलों की चपेट में आने से बच सकते हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

उत्तराखंड में बाघों की संख्या में वृद्धि

  • बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहे उत्तराखंड में बाघों के कुनबे में और इजाफा हो सकता है। अखिल भारतीय बाघ आकलन-2018 के सर्वेक्षण के दौरान जिस प्रकार के रुझान मिले, उससे माना जा रहा कि इस मर्तबा यहां बाघों की संख्या 400 पार हो जाएगी। हालांकि, 29 जुलाई को दिल्ली में अखिल भारतीय बाघ आकलन के आकड़े घोषित होने पर इसे लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी। वर्ष 2014 में हुई अखिल भारतीय स्तर की गणना के अनुसार तब प्रदेश में 340 बाघ थे, जबकि 2017 की राज्य स्तरीय गणना में ये आंकड़ा 361 पहुंच गया था।
  • राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण के मामले में वर्ष 2014 की अखिल भारतीय गणना के अनुसार उत्तराखंड देश में कर्नाटक (403) के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां विश्व प्रसिद्ध कार्बेट टाइगर रिजर्व के अलावा राजाजी टाइगर रिजर्व और 12 वन प्रभागों में बाघों का बसेरा है। यह बाघ संरक्षण के प्रयासों का ही नतीजा है कि प्रदेश में बाघों का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की गाइडलाइन के अनुसार राज्य स्तर पर होने वाले बाघ आकलन में वर्ष 2017 में प्रदेश में बाघों की संख्या में 2014 की अखिल भारतीय गणना के मुकाबले 21 का इजाफा हुआ था। पिछले वर्ष उत्तराखंड समेत देश के 18 राज्यों में अखिल भारतीय बाघ आकलन के तहत सर्वेक्षण हुआ। इस दौरान कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व में एक हजार से ज्यादा बीटों में बाघों के पगचिह्नों की गणना की गई। इसके अलावा बाघ बहुल वन प्रभागों में भी बड़ी संख्या में पगचिह्न मिले। इसके अलावा 1200 कैमरा ट्रैप के जरिये भी गणना की गई।
  • सर्वेक्षण के आंकड़ों को विशेष रूप से तैयार किए गए 'एम स्ट्राइप एप' में भी फीड किया गया। सर्वेक्षण में आए आंकड़ों के विश्लेषण के बाद अब इनके सार्वजनिक होने की घड़ी नजदीक आ रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक सर्वेक्षण के दौरान इस मर्तबा जिस हिसाब से बाघों के पगचिह्न मिले और कैमरा ट्रैप में बड़ी संख्या में आई तस्वीरों से साफ है कि यहां बाघों की संख्या में भारी इजाफा तय है। खासकर, राजाजी व कार्बेट के मध्य स्थित लैंसडौन वन प्रभाग के अलावा कार्बेट से लगे तराई के वन प्रभागों में अच्छी-खासी संख्या में बाघों की मौजूदगी के प्रमाण मिले।
  • ऐसे में माना जा रहा कि इस बार राज्य में बाघों की संख्या 400 पार हो जाएगी। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि बाघ आकलन के नतीजे 29 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री जारी करेंगे। इसके साथ ही राज्य में बाघों की संख्या के संबंध में सही तस्वीर सामने आएगी।

राज्य में बाघ

वर्ष संख्या
2017 361
2014 340
2011 227
2010 199
2008 179

अब प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर लगेगा भारी जुर्माना

  • नेशनल ग्रीन ट्बि्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का उल्लंघन कर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर अब भारी जुर्माना लगाया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली-एनसीआर समेत 16 राज्यों के 100 औद्योगिक समूहों को प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र (पीआइए) में चिह्नित किया गया है। सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक चिह्नित प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), एंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) व ठोस कचरा प्रबंधन में कमियां मिली है। इस मामले में एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने वाले बड़े उद्योगों पर एक करोड़ रुपये, मध्यम वर्ग के उद्योगों पर 50 लाख और छोटे उद्योगों पर 25 लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। यह जुर्माना सीपीसीबी के तय फार्मूले के अनुसार लगाया जाएगा। पहले यह जुर्माना राशि कम थी।
  • वर्ष 2009-10 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) के साथ विभिन्न शहरों में लगे उद्योगों की निगरानी की थी। इस दौरान उत्तर प्रदेश समेत 16 राज्यों में 88 औद्योगिक समूहों को प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र (पीआइए) में चिह्नित किया गया। इन औद्योगिक समूहों की व्यापाक पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक (सीइसीआइ) के तहत रैंकिग की गई। रैंकिग के तहत 43 औद्योगिक समूह गंभीर प्रदूषित क्षेत्र (सीपीए) व 32 को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्र (एसपीए) में शामिल किया गया। इन उद्योगों को प्रदूषण के निर्धारित मानक स्तर पर लाने के लिए लघु व दीर्घकालीन कार्य योजना बनाई गई।
  • सीपीसीबी ने करीब आठ वर्ष बाद 2017-18 में दोबारा उद्योगों की निगरानी की। निगरानी के लिए इन शहरों में वायु व जल प्रदूषण की निगरानी के लिए सतत जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीडब्ल्यूक्यूएमएस) व निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) लगाए गए। इसके जरिये व्यापक पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक (सीइपीआइ) के तहत एक रैंकिंग जारी की गई। इसमें 100 प्रदूषित औद्योगिक समूह पाए गए। इनमें अब 38 औद्योगिक समूह अति गंभीर, 31 गंभीर और 31 अन्य प्रदूषित क्षेत्र में आते हैं।
  • अब प्रदूषण फैलाने पर बंद किए जाएंगे उद्योग : एनजीटी का स्पष्ट कहना है कि उद्योगों को आम आदमी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा और नियमों के उल्लंघन की छूट भी नहीं दी जाएगी। उद्योगों को अब एसटीपी, ईटीपी समेत अन्य व्यवस्थाएं मजबूत करनी होगी। उद्योग ऐसा नहीं करते हैं और जांच में कमियां मिलने पर बंद करा दिए जाएंगे। प्रदूषित औद्योगिक क्लस्टर में शामिल उद्योगों को कार्य योजना बनानी होगी। प्रदूषण फैलाना अपराध है और उन्हें इस पर नियंत्रण करना होगा।
  • सीपीसीबी ने 16 राज्यों के 100 शहरों को प्रदूषित औद्योगिक समूह में चिह्नित किया है। इसमें उत्तर प्रदेश के 12 शहर शामिल हैं। देश में टॉप पर महाराष्ट्र का तारापुर शहर है, जबकि दूसरे स्थान पर दिल्ली का नजफगढ़ ड्रेन, आनंद पर्वत, नारायना, वजीरपुर व ओखला क्षेत्र शामिल है। वहीं, तीसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश का मथुरा शहर है। इसके अलावा कानपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, बुलंदशहर-खुर्जा, फिरोजाबाद, गजरौला क्षेत्र, आगरा, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ व अलीगढ़ शामिल है। प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र में गाजियाबाद 33, नोएडा 43 व मेरठ 52 वें स्थान पर है। एसटीपी व इटीपी को दुरुस्त रखना उद्यमियों की जिम्मेदारी है। ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने की वजह से वेस्ट को खाली स्थान पर फेंकना पड़ता है। उद्योग बंधु की बैठकों में प्रशासन व प्राधिकरण से कई बार इसकी व्यवस्था करने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई है।

:: विविध ::

तुर्की /इकलौती इंटरकॉन्टिनेंटल स्वीमिंग रेस

  • तुर्की के इस्तांबुल में रविवार को 31वीं बोसफोरस क्रॉस-कॉन्टिनेंटल स्वीमिंग रेस हुई। इसमें दुनिया भर के 2400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसमें 1200 तैराक तुर्की के ही थे। यह रेस वॉटरवे के एशियन किनारे से शुरू होकर यूरोपियन किनारे पर खत्म होती है।
  • 6.5 किमी की इस रेस को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ओपन वॉटर स्वीमिंग रेस कहा जाता है। यह दुनिया की इकलौती इंटरकॉन्टिनेंटल स्वीमिंग रेस (अंतर महाद्वीपीय रेस) है। 10 घंटे की रेस कनीला पियर से शुरू हुई और बोस्फोरस को पार करने के बाद कुरुकेसमे में समाप्त हुई।
  • रेस में 14 से 89 साल तक के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसके लिए इस्तांबुल ने अपना शिपिंग ट्रैफिक एक दिन के लिए बंद भी रखा। रेस पहली बार 1989 में हुई थी। तब 64 पुरुष और 4 महिला तैराकों ने हिस्सा लिया था।

हिमा दास- एक महीने के भीतर जीता पांचवां स्वर्ण पदक

  • भारत की नई उड़न परी हिमा दास (Hima Das) के गोल्ड मेडल जीतकर रिकॉर्ड बनाने का सिलसिला जारी है. असम की इस धावक ने एक के बाद एक लगातार 5 स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है. किसी भारतीय एथलीट का विश्व स्तर पर यह प्रदर्शन निश्चित रूप से उल्लेखनीय है. हिमा दास ने शनिवार को एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. हिमा ने चेकगणराज्य में नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया.

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • हाल ही में गोल्डन गर्ल हिमा दास ने किस प्रतिस्पर्धा में 1 महीने के भीतर ही अपना पांचवां स्वर्ण पदक हासिल किया? (चेकगणराज्य में नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री)
  • हाल ही में किस देश में दुनिया की एकमात्र क्रॉस-कॉन्टिनेंटल स्वीमिंग रेस की प्रतियोगिता संपन्न हुई? (तुर्की -इस्तांबुल: 31वीं बोसफोरस क्रॉस-कॉन्टिनेंटल स्वीमिंग रेस)
  • हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा चिन्हित किए गए 100 प्रदूषित औद्योगिक समूह शहरों में उत्तर प्रदेश के कितने शहर शामिल हैं? (12)
  • हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा चिन्हित किए गए 100 प्रदूषित औद्योगिक समूह शहरों में कौन सा शहर शीर्ष स्थान पर है? (महाराष्ट्र का तारापुर)
  • भारतीय मूल के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित ‘डीप न्यूरल नेटवर्क’ का विकास किस उद्देश्य हेतु किया गया है? (तस्वीरों या वीडियो फुटेज के साथ की गई छेड़छाड़ का पता लगाने हेतु)
  • किस अंतरिक्ष एजेंसी के द्वारा ‘ओरियन क्रु कैप्सूल’ मिशन को भेजा जाएगा? (नासा)
  • ओरियन क्रु कैप्सूल को किस ग्रह/उपग्रह के अभियान पर भेजा जाएगा? (चंद्रमा)
  • चंद्रयान 2 मिशन में किस रोवर को चंद्रमा पर भेजा जाएगा? (रोवर- प्रज्ञान)
  • हाल ही में किस संस्थान में अगली पीढ़ी अनुक्रमण (एनएसजी) सुविधा का उद्घाटन किया गया है? (सेंटर फॉर सेलुलर मॉलिक्‍यूलर बायोलॉजी-हैदराबाद)
  • हाल ही में शहीदों के आश्रितों को कई प्रकार की सुविधाएं देने हेतु संसद में कौन-सा विधेयक प्रस्तुत किया गया है? (‘शहीदों के परिवारों को वित्तीय सहायता का भुगतान अधिनियम, 2019’)
  • अंग्रेजी और आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सुविधा देने वाले क्लिनिकों में न्यूनतम मानक तय करने हेतु किस विधेयक को संसद में प्रस्तुत किया गया है? (नैदानिक स्थापना (केंद्र सरकार) नियम, 2019)
  • देश के बाहर दूतावासों में तैनात शस्त्र अधिनियम और सरकारी अधिकारियों के तहत केंद्रीय बलों में काम करने वाले व्यक्तियों के लिए उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पद्धति का पूरा नाम क्या है? (इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम -ईटीपीबीएस)
  • उत्तर प्रदेश के किस स्थान पर प्लंबिंग के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जाएगी? (ग्रेटर नोएडा)
  • उत्तर प्रदेश के किस स्थान पर सेवा क्षेत्र के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जाएगी? (वाराणसी)
  • किस स्थान पर भारत कौशल संस्‍थान का निर्माण प्रस्तावित है? (कानपुर)
  • 11 में डिफेंस एक्सपो 2020 का आयोजन किस स्थान पर होगा? (लखनऊ)
  • 11 में डिफेंस एक्सपो 2020 की थीम क्या होगी? ('भारत : उभरता हुआ रक्षा विनिर्माण केंद्र')
  • छोटे शहरों में मेट्रो की तर्ज पर केंद्र सरकार के द्वारा कौन सी ट्रेन चलाई जाएगी? ('मेट्रोलाइट' ट्रेन)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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