(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 जुलाई 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (04 जुलाई 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया

  • देश के पांच से 19 आयु वर्ग के बीच एक चौथाई दिव्यांग बच्चे क ख ग से पूरी तरह दूर हैं। इसमें से तीन चौथाई आंकड़ा पांच वर्ष तक आयु वर्ग का है। लड़कों के मुकाबले लड़कियों की शिक्षा से जुड़ने का आंकड़ा सबसे कम है। यह खुलासा स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया (चिल्ड्रेन विद डिसेबिलिटी) 2019 की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में मोदी सरकार द्वारा दिव्यांग छात्रों को शिक्षा से जोड़ने संग मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने पर संतुष्टि जताई गई है।
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा 2017-2018 के बीच शोध अध्ययनों के आधार पर तैयार रिपोर्ट को यूनेस्को ने भी मान्यता दी है।
  • दिल्ली में बुधवार को यूनेस्को और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने संयुक्त कार्यक्रम में सर्वे रिपोर्ट जारी किया। यूनेस्को के दिल्ली निदेशक एरिक फाल्ट ने कहा कि भारत ने विशेष वर्ग के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा, कार्यक्रम व योजनाओं को एक श्रेणी में डालने के मामले में काफी काम किया है। इसी के चलते दिव्यांग छात्रों की नामांकन दर में सुधार हुआ है। लेकिन ऐसे बच्चों के साथ शिक्षकों का रवैया ठीक नहीं है।
  • रिपोर्ट में नीति आयोग के न्यू इंडिया 75 शिक्षा एजेंडा पर फोकस किया गया है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर दिव्यांग छात्रों की सफलता की कहानी को अन्य विशेष बच्चों तक पहुंचाएं।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदू:

  • भारत में पांच वर्ष से कम आयु के कुल 368.697 विशेष बच्चे हैं। इनमें से 27 फीसदी छात्र स्कूलों में पढ़ते हैं। जबकि 72 फीसदी बच्चे स्कूल ही नहीं गए। एक फीसदी बीच में स्कूल छोड़ देते हैं।
  • पांच साल से कम आयु के 40.801 बच्चे विशेष स्कूलों में पढ़ते हैं। इसमें 47 फीसदी बच्चियां और 53 फीसदी लड़के हैं। पांच से 19 वर्ष आयु वर्ग के तहत स्कूली शिक्षा में सामान्य बच्चों का आंकड़ा 70.97 और विशेष बच्चों का 61.18 फीसदी है। सामान्य बच्चों की पढ़ाई छोड़ने का आंकड़ा 11.82 फीसदी तो विशेष का 12.14 फीसदी है। सामान्य में 17.21 फीसदी बच्चे कभी स्कूल नहीं जा पाते हैं। जबकि विशेष में यह आंकड़ा 26.68 फीसदी है। भारत में 54.39 फीसदी बच्चों को बहु दिव्यांगता है।
  • 2014-15 से 2016-17 तक की तुलना करें तो प्राइमरी में बच्चों के इनरोलमेंट में कमी आई है। 2014-15 में यह आंकड़ा 15,67,633 था तो 2016-17 में 13,52,162 पहुंच गया है। अपर प्राइमरी में 750230 से गिरकर 745153 और सेकेंडरी में 219571 से 218261 है।
  • गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र में जेंडर अनुपात में सेकेंडरी व हायर एजुकेशन में अंतर है। जबकि हिमाचल प्रदेश, पंजाब व तेलंगाना में विशेष लड़कियों की स्कूलों में संख्या अधिक है।

कुपोषण से जूझ रहे देशभर के गरीबों को मिलेगा 'फोर्टिफाइड' चावल

  • सरकार गरीबी और कुपोषण से जूझ रहे लोगों को खरीफ मौसस की धान कटाई के बाद विटामिन और खनिज पदार्थों से युक्त (फोर्टिफाइड राइस) उपलब्ध कराएगी। इस योजना को लागू करने के लिए मंत्रिमंडल की स्वीकृति लेनी होगी। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में कैबिनेट नोट बनाया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले पखवाड़े तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
  • खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले फैसला हुआ था कि 15 राज्यों के एक-एक जिले में फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति होगी। लेकिन नीति आयोग के हस्तक्षेप के बाद इस योजना को देशभर के सभी जिलों में लागू करने का फैसला किया गया।
  • दरअसल, फोर्टिफाइड चावल के वितरण पर मंत्रालय और नीति आयोग की बैठक हुई थी। इसमें नीति आयोग ने सवाल उठाया कि जब फोर्टिफाइड राइस का वितरण गरीबों के बीच करना है तो इसकी शुरुआत सिर्फ 15 जिलों से क्यों? बैठक में इसके लिए कोष की व्यवस्था करने को लेकर भी सवाल उठा? तमाम पहलुओं पर विचार करने के बाद फैसला हुआ कि शुरुआत से ही यह योजना पूरे देश में लागू होगी।

फोर्टिफाइड चावल

  • सामान्य चावल को फोर्टिफाइड चावल बनाने के लिए उस पर आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन ए और विटामिन बी12 का लेप किया जाता है।
  • इस पर प्रति किलो 60 पैसे का खर्च आता है। देशभर के अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराने पर कुल 2,500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए वित्त मंत्रालय से राशि मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से आंगनवाड़ी केंद्रों और मध्यान्ह भोजन योजना में कुछ जगहों पर पहले से ही फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति की जा रही है।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

इतालवी डेमोक्रेट डेविड सासोली चुने गए यूरोपीय संसद के नए अध्यक्ष

  • यूरोपीय संसद ने इटली के एक सोशल डेमोक्रेट को बुधवार को अपना नया अध्यक्ष चुना। ब्रसेल्स द्वारा एक दिन पहले प्रमुख पदों पर दो महिलाओं को पहली बार नामित किए जाने के बाद यूरोपीय संघ के शीर्ष पद को भरा गया। इटली के डेविड सासोली (63) ने मतदान के दूसरे चरण में पूर्ण बहुमत हासिल किया। इस पद पर उनका मुकाबला जर्मनी की ग्रीन पार्टी की स्का केलर, स्पेन के धुर वामपंथी सीरा रेगो और चेक गणराज्य के कंजर्वेटिव जेन जाहरादिल से था।
  • ईयू नेताओं ने जर्मनी की रक्षा मंत्री उरसुला वोन डेन लेयन को यूरोपीय आयोग का प्रमुख और आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्द को यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अध्यक्ष के तौर पर नामित किया हालांकि उनकी नियुक्ति की पुष्टि होनी शेष है।

मंत्रिमंडल ने नौवहन के लिए भारत और मालदीव के बीच समझौते को मंजूरी दी

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और मालदीव के बीच समुद्री मार्ग से यात्री सेवा और माल ढुलाई सेवा को बढ़ावा देने के किए दिए गए समझौते को पूर्व-प्रभाव से अपनी मंजूरी दे दी है, जिस पर भारत के प्रधानमंत्री के मालदीव के दौरे के अवसर पर 8 जून, 2019 को हस्ताक्षर किए गए थे।
  • यह समझौता मालदीव और केरल के बीच समुद्री मार्ग से फेरी सेवाओं के जरिए कोच्चि को मालदीव के माले और कुलहुधुफुसी से जोड़ने के लिए है
  • मालदीव के विकास में भारत एक अग्रणी साझेदार है और इसने मालदीव में अनेक महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित किए हैं। फिलहाल भारत ने व्यापार के लिए मालदीव को दीर्घकालिक और रिवोल्विंग क्रेडिट सहित 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की स्टेंड-बाय ऋण सुविधा (एससीएफ) प्रदान की है।
  • माले, मालदीव की राजधानी और सबसे अधिक जनसंख्या वाला महानगर है और कुलहुधुफुसी सबसे अधिक जनसंख्या वाला तीसरा महानगर है, जिससे दोनों देशों के पर्यटकों के साथ-साथ माल ढुलाई के लिए कोच्चि से फेरी सेवाओं की शुरुआत के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। माले कोच्चि से 708 किलोमीटर की दूरी पर और कुलहुधुफुसी 509 किलोमीटर दूर है।
  • कुलहुधुफुसी और इसके आस-पास के द्वीप मालदीव के उत्तरी भाग में जनसंख्या के प्रमुख केंद्र हैं। यहां काफी संख्या में रिज़ॉर्ट्स बने हैं, जो भारतीय लोगों के लिए संभावित पर्यटन स्थल हो सकते हैं। वर्तमान संपर्क सुविधाओं में माले के लिए उड़ानों और रिज़ॉर्ट्स के लिए सी प्लेनों की सेवाएं शामिल हैं, जो महंगे विकल्प हैं। दूसरी ओर, समुद्री मार्ग से कोच्चि के साथ संपर्क सुविधा कायम होने से दोनों देशों के बीच, विशेषकर भारत के लिए स्वास्थ्य और वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। मालदीव के बहुत से लोग शैक्षिक उद्देश्यों के लिए भी केरल और दक्षिण भारत के अन्य महानगरों की यात्रा करते हैं।
  • दोनों देशों के बीच, समुद्री मार्ग से यात्री एवं माल ढुलाई के क्षेत्र में संभावित अवसर से लाभ प्राप्त करने की दृष्टि से, मालदीव के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। प्रस्तावित फेरी सेवा से जन-जन के बीच संपर्क बढ़ने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में योगदान मिलेगा।

:: राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

देशद्रोह कानून

  • केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देशद्रोह के कानून को खत्म का उनका कोई इरादा नहीं है। सरकार का कहना है कि आईपीसी के तहत बने इस कानून को खत्म करने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।

आईपीसी की धारा 124-ए?

  • भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 124-ए को ही राजद्रोह का कानून कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि को सार्वजनिक रूप से अंजाम देता है तो यह 124-ए के अधीन आता है।
  • साथ ही अगर कोई व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है, ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ ही संविधान का अपमान करता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124-ए के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज हो सकता है। इन गतिविधियों में लेख लिखना, पोस्टर बनाना, कार्टून बनाना जैसे कार्य भी शामिल होते हैं।
  • इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी को 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। बता दें इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस कानून को सरकार बनने के बाद मजबूत करने की बात कर चुके हैं।

सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2019

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें बच्चे पैदा करने में अक्षम दंपति को केवल करीबी रिश्तेदारों से कोख किराये पर लेने की अनुमति दी गई है ।
  • सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2019 के माध्यम से भारत में किराये की कोख की व्यवस्था के नियमन का प्रस्ताव किया गया है जिसके लिये केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर राज्य सरोगेसी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव किया गया है ।
  • प्रस्तावित विधान के माध्यम से सरोगेसी के नियमन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी, साथ ही वाणिज्यिक सरोगेसी को निषेध बनाकर नैतिक किराये की कोख की व्यवस्था की अनुमति दी जा सकेगी ।
  • इसके माध्यम से सरोगेसी में अनैतिक व्‍यवहारों का नियंत्रण, किराए की कोख के वाणिज्यिकीकरण पर रोक और सरोगेसी से मां बनने वाली महिलाओं और सरोगेसी से पैदा होने वाले बच्‍चों का संभावित शोषण रूकेगा। वाणिज्यिक सरोगेसी निषेध में मानव भ्रूण तथा युग्‍मक की खरीद और बिक्री शामिल हैं।
  • प्रजनन क्षमता से वंचित दंपत्ति की आवश्‍यकता को पूरा करने के लिए निश्चित शर्तों को पूरा करने पर और विशेष उद्देश्‍यों के लिए नैतिक सरोगेसी की अनुमति दी जाएगी। इससे नैतिक सरोगेसी सुविधा के इच्‍छुक और प्रजनन क्षमता से वंचित विवाहित दंपत्तियों को लाभ होगा।
  • सरोगेसी विधेयक दिसंबर 2018 में लोकसभा में पारित हुआ था लेकिन 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के कारण यह समाप्त हो गया ।

सुप्रीम कोर्ट देगी हिंदी समेत 6 भाषाओं में फैसले

  • सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत है और इसका फैसला अंतिम होता है। अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले अंग्रेजी में उपलब्ध होते हैं जिसके कारण अंग्रेजी न जानने वाले मुवक्किलों के लिए अपने मुकदमें का फैसला समझना मुश्किल होता है और वे इसके लिए वकीलों पर निर्भर होते हैं, लेकिन जल्दी ही ये दिन लदने वाले हैं।
  • लोग अपने मुकदमें का फैसला अपनी भाषा में पढ़ और समझ पाएंगे। इस महीने के अंत तक हिंदी सहित छह भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसले उपलब्ध होंगे। इस प्रोजेक्ट पर बहुत तेजी से काम चल रहा है।
  • जिन छह भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसले उपलब्ध होंगे वह हैं हिंदी, तेलगू, असमिया, कन्नड़, मराठी, और उडि़या। माना जा रहा है कि अंग्रेजी का फैसला आने के बाद हिंदी व अन्य भाषाओं में वही फैसला उपलब्ध होने में करीब एक सप्ताह का समय लगेगा। हालांकि ये फैसले भी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर ही उपलब्ध होंगे।
  • वैसे हिन्दी व अन्य प्रादेशिक भाषाओं में फैसले उपलब्ध कराना सिर्फ इन छह भाषाओं तक सीमित नहीं है धीरे धीरे करके सभी भाषाओं में फैसले की प्रति उपलब्ध कराने का प्रयास होगा, लेकिन अभी फिलहाल पहले चरण में छह भाषाओं में फैसले उपलब्ध होंगे। यह भी माना जा रहा है कि शुरूआत में जमीन जायदाद या लोगों के व्यक्तिगत मुकदमों से जुड़े फैसलों को इन भाषाओं में उपलब्ध कराने की प्राथमिकता होगी।

पीएमओ को देना होगा मंत्रियों के भ्रष्‍टाचार का ब्यौरा

  • केंद्र सरकार के मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की सूचना प्राप्त करने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय सूचना आयोग ने चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी की ओर से मांगी गई सूचना पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। हालांकि आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय की कालाधन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने से जांच में बाधा पडऩे की दलील पर सहमति जताई है। कालेधन की मुद्रा के विषय में सीआइसी का निर्णय मौन है।
  • उत्तराखंड के हल्द्वानी में तैनात चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी ने अगस्त 2017 में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पीएमओ से जून 2014 से अगस्त 2017 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के भ्रष्टïाचार से संबंधित शिकायतों की जानकारी मांगी थी। साथ ही उन मामलों पर हुई जांच रिपोर्ट की प्रति तथा प्रधानमंत्री द्वारा जांच रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी चाही थी। संजीव ने यह भी पूछा था कि विदेशों से कितना कालाधन लाया गया और इसकी कितनी धनराशि देश के लोगों में बांटी गई। कालाधन लाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए। अक्टूबर 2017 में पीएमओ द्वारा मंत्रियों के भ्रष्टाचार से संबंधित सूचना को अस्पष्ट बताकर खारिज कर दिया तथा कालेधन से संबंधित सूचना को आरटीआइ की परिभाषा के दायरे से बाहर बताया।
  • संजीव ने पीएमओ के जवाब के खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग में अपील दायर की तो केंद्रीय सूचना आयोग ने पीएमओ की दोनों दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि यह सूचनाएं पूर्णत: स्पष्टï हैं और आरटीआइ के दायरे में आती हैं। आयोग ने 15 दिन के भीतर सूचना देने का आदेश पारित किया। आयोग के निर्णय के जवाब में पीएमओ ने सूचित किया कि मंत्रियों के भ्रष्टïाचार से संबंधित शिकायतों का उचित कार्रवाई कर उन्हें संघारित किया जाता है, लेकिन यह अभिलेख इतने अधिक हैं कि इनकी सूचना देने से संसाधनों की आवश्यकता से अधिक अपव्यय होगा, अत: सूचना का अधिकार अधिनियम-2003 की धारा-सात(9) के अंतर्गत इन्हें नहीं दिया जा सकता। कालेधन को विदेश से लाने के प्रयासों के बारे में बताया कि इसके लिए एसआइटी का गठन किया गया है। यदि इसकी जानकारी दी गई तो जांच में बाधा पड़ेगी।

मजदूरी संहिता विधेयक

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मजदूरी संहिता विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। विधेयक में कर्मचारियों के पारिश्रमिक से जुड़े मौजूदा सभी कानूनों को एक साथ करने और केंद्र सरकार को पूरे देश के लिये एक न्यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
  • सरकार ने देश में कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिये श्रम क्षेत्र में चार संहिता का प्रस्ताव किया है जो मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा और कल्याण तथा औद्योगिक संबंधों से जुड़ी होंगी। मजदूरी संहिता उनमें से एक है।
  • सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने मजदूरी संहिता पर विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है।’’ सरकार का इसे संसद के मौजूदा सत्र में पारित कराने का इरादा है। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में 10 अगस्त 2017 को मजदूरी संहिता विधेयक को लोकसभा में पेश किया था।
  • इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजा गया। समिति ने 18 दिसंबर 2018 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। हालांकि, मई 2019 में 16वीं लोकसभा भंग होने के साथ विधेयक निरस्त हो गया। मजदूरी संहिता मजदूरी भुगतान कानून, 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून, 1948, बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक कानून 1976 का स्थान लेगा।
  • विधेयक में प्रावधान है कि केंद्र सरकार रेलवे और खान समेत कुछ क्षेत्रों के लिये न्यूनतम मजदूरी तय कर सकती है जबकि राज्य अन्य श्रेणी के कर्मचारियों के लिये न्यूनतम मजदूरी तय करने को स्वतंत्र हैं। संहिता में राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने का प्रावधान है।
  • केंद्र सरकार विभिन्न क्षेत्रों या राज्यों के लिये अलग से न्यूनतम वेतन निर्धारित कर सकती है। कानून के मसौदे में यह भी कहा गया है कि न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा हर पांच साल में की जाएगी।

मध्यस्थता एवं सुलह संशोधन विधेयक 2019

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मध्यस्थता एवं सुलह संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसके माध्यम से भारत को घरेलू एवं वैश्विक मध्यस्थता का केंद्र बनाने का मार्ग प्रशस्थ हो सकेगा । इस विधेयक में वाणिज्यिक विवादों को समयबद्ध तरीके से निपटाने और मध्यस्थों की जवाबदेही तय करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • इसी तरह का एक विधेयक अगस्त 2018 में लोकसभा में पारित हो चुका था लेकिन यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका । 16वीं लोकसभा की अवधि समाप्त होने के साथ ही यह विधेयक भी खत्म हो गया था । सूत्रों ने बताया कि देश में लगातार सरकारें भारत को अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू मध्यस्थता का केंद्र बनाने को प्रयासरत रही हैं।
  • यह नया विधेयक संस्थागत विवादों से निपटने के लिये एक ठोस तंत्र प्रदान करेगा । इसमें संशोधनों के माध्यम से संस्थागत मध्यस्थता को बेहतर बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकेगी । इसके तहत मानक तय करने, मध्यस्थता की प्रक्रिया को और सरल एवं सस्ता बनाने तथा समयबद्ध तरीके से मामलों का निपटारा सुनिश्चित करने के लिये स्वतंत्र निकाय की स्थापना करने की बात कही गई है ।
  • इसके तहत स्वतंत्र निकाय के रूप में भारतीय मध्यस्थता परिषद के गठन का प्रस्ताव किया गया है ।

:: आर्थिक समाचार ::

2019-20 सत्र के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी

  • किसानों की आमदनी को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2019-20 सत्र के लिए सभी खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।
  • इस कदम से निवेश में वृद्धि होगी और किसानों को निश्चित लाभ प्राप्त होने के माध्यम से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
  • 2018-19 के खरीफ मौसम में सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस प्रकार बढ़ाया गया हैः-
  1. सरकार ने 2019-20 के लिए खरीफ फसल के तौर पर सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 311 रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी में 262 रुपये प्रति क्विंटल और तिल में 236 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर दी है। किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
  2. सरकार ने तूर दाल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 125 रुपये और उड़द दाल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 100 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि की है। इससे दालों की आवश्यकता के तहत देश की आबादी के एक बड़े हिस्से की पोषण सुरक्षा और प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  3. सरकार ने ज्वार के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 120 रुपये प्रति क्विंटल और रागी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 253 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। यह कदम देश में पोषणयुक्त अनाज के उत्पादन और उपभोग की जरूरतों के तहत उठाया गया है। अंतर्राष्ट्रीय खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा 2023 को अंतर्राष्ट्रीय ज्वार दिवस के रूप में मनाए जाने के भारत के प्रस्ताव को स्वीकार करने तथा भारत द्वारा 2018 को राष्ट्रीय ज्वार दिवस के रूप में मनाए जाने के परिप्रेक्ष्य में इसे काफी अहम माना जा रहा है।
  4. मध्यम और लम्बे रेशे वाले कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में क्रमशः 105 रुपये प्रति क्विंटल और 100 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
  5. न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से किसानों को बाजरा, उड़द और तूर के उत्पादन लागत की तुलना में क्रमशः 85 प्रतिशत, 64 प्रतिशत और 60 प्रतिशत का रिटर्न मिलेगा।
  • इसमें सभी चुकता लागत शामिल हैं जैसे कि अनुबंधित मानव श्रम, बैल/मशीन श्रम पर किया गया खर्च, पट्टे पर दी गई भूमि पर अदा किया गया किराया, सामग्री संबंधी कच्‍चे माल जैसे कि बीज, उर्वरकों, खाद के उपयोग पर किया गया खर्च, सिंचाई प्रभार, उपकरणों एवं कृषि भवनों का मूल्‍यहृास, कार्यशील पूंजी पर ब्‍याज, पंप सेटों के परिचालन के लिए डीजल/बिजली इत्‍यादि, विविध खर्च और पारिवारिक श्रम का आकलित मूल्‍य।

इनहेरिटेंस टैक्स (पुश्तैनी संपत्ति कर)

  • केंद्र सरकार इस बार के बजट में एक बड़ा फैसला कर सकती है। इनहेरिटेंस टैक्स के माध्यम से जेवर, सावधि जमा (एफडी) या बैंक डिपॉजिट के रूप में मिली पुश्तैनी संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे टैक्स से हासिल आय बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि धन संचय की प्रवृत्ति खत्म करने और कालाधन पर लगाम लगाने की कोशिशों के तौर पर पेश कर सकती है।
  • वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार जनता की भलाई के लिए जानी जाती है। इस समय इनहेरिटेंस टैक्स लगाने का बेहतर मौका है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लोग सरकार-अनुमोदित संस्थाओं और ट्रस्ट को दान देकर इस टैक्स से मुक्ति पा सकते हैं। ऐसे में संस्थाओं और ट्रस्टों को दिए गए दान से आम जनता का ही भला होगा, क्योंकि यह रकम उनकी भलाई के कामों में लगाई जाएगी।
  • जीएसटी संग्रह के हालिया आंकड़े सरकार के लिए बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने राजस्व ब़़ढाने की कड़ी चुनौती है। इसी से निपटने के लिए नए तरह के टैक्स लगाने पर विचार किया जा रहा है।
  • यदि सरकार वाकई पैतृक संपत्ति पर टैक्स लगाती है तो हो सकता है कि कुछ लोग इससे बचने के लिए दूसरे देशों का रुख कर लें। इस लिहाज से इनहेरिटेंस टैक्स लागू करना बड़ी चुनौती साबित होगी।
  • कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत जैसे देश में जिनके पास पैतृक संपत्ति है, हो सकता है कि उनके पास टैक्स जमा करने के लिए पैसे ही न हों। ऐसे में टैक्स जमा करने के लिए संपत्ति बेचनी पड़ सकती है। हालांकि इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि अमीरों पर टैक्स लगाना मुश्किल है, लेकिन इसे लागू करना आसान है। यह भी संभव है कि लोग अपनी संपत्ति पर टैक्स भुगतान से बचने के लिए उसे ट्रस्टों के तहत ले आएं।
  • सरकार ने इनहेरिटेंस टैक्स पर पहले भी चर्चा की थी, लेकिन इसे लागू नहीं कर पाई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का टैक्स इस वक्त लाने से नकदी की कमी से जूझ रहे सेक्टरों को और तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
  • इनहेरिटेंस टैक्स का प्रावधान वर्ष 1985 में खत्म कर दिया गया था, लेकिन, अब सरकार बजट में इसकी घोषणा कर सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इसके लिए मसौदा तैयार कर लिया है। गिफ्ट या पैतृक संपत्ति पर लगने वाले टैक्स को इनहेरिटेंस टैक्स कहते हैं।

निर्यात फंड

  • वैश्विक कारोबार में बदल रहे हालात की मार झेल रहे निर्यातकों को इस बार बजट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। निर्यातकों के लिए न केवल सस्ते और आसान कर्ज के लिए विशेष उपायों का ऐलान हो सकता है बल्कि एमएसएमई निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद के लिए विशेष फंड की स्थापना का प्रस्ताव भी आ सकता है।
  • बीते एक साल से निर्यातक कर्ज की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं। खासतौर से बैंकों से मिलने वाले कर्ज की रफ्तार काफी धीमी है, जिसके चलते निर्यातकों के एक वर्ग को अपने ऑर्डर तक रद्द करने पड़े हैं। इसके बाद निर्यातकों ने इस मसले को कई बार विभिन्न मंचों से उठाया। निर्यातकों की फेडरेशन फियो के पूर्व प्रेसिडेंट गणेश कुमार गुप्ता इस मसले को लेकर काफी मुखर रहे और उन्होंने वाणिज्य और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के समक्ष निर्यातकों की इस दिक्कत को रखा।सरकार भी इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है।
  • केंद्र में राजग की नई सरकार बनने के बाद वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल निर्यातकों की दिक्कतों को लेकर बैठक भी कर चुके हैं। बैंकों से कर्ज की समस्या को लेकर सरकार ने निर्यातकों को आश्वस्त भी किया है। निर्यातक इस मसले पर निर्यात फंड बनाने का सुझाव भी दे चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि वाणिज्य मंत्रालय ने भी वित्त मंत्रालय के साथ बजट संबंधी चर्चाओं में इस प्रस्ताव को रखा है। इस बात की भी चर्चा है कि केंद्रीय बैंक के रिजर्व फंड से मिलने वाले राशि के एक हिस्से का इस्तेमाल निर्यातकों की मदद के लिए किया जा सकता है।
  • सूत्रों के मुताबिक लघु व मझोले निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कराने और उनकी मार्केटिंग में मदद के लिए भी सरकार एक फंड की स्थापना कर सकती है। फियो ने इस संबंध में कुल निर्यात के 0.5 फीसद के बराबर की राशि का कोष बनाने का सुझाव अपने बजट प्रस्तावों में दिया था। फियो के प्रेसिडेंट शरद कुमार सराफ का मानना है कि इसकी मदद से एमएसएमई निर्यातक विदेशों में होने वाली प्रदर्शनियों और व्यापार शो में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले पाएंगे और निर्यात क्षेत्र की समस्याओं का निदान हो सकेगा।

सर्विस सेक्टर में मई 2018 के बाद पहली बार गिरावट

  • घरेलू सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में जून के दौरान गिरावट दर्ज की गई। मई 2018 के बाद पहली बार ऐसे हालात बने। कमजोर बिक्री, प्रतिस्पर्धा का दबाव और टैक्स के प्रतिकूल प्रावधान इसकी बड़ी वजहें रहीं। बुधवार को जारी एक मासिक सर्वे की रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है।
  • आईएचएस मार्किट इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जून में गिरकर 49.6 पर आ गया, जो मई में 50.2 पर था। इस सूचकांक का 50 से ऊपर रहना विस्तार और इस स्तर से नीचे आना गिरावट का संकेत होता है।
  • आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पोलयाना डी. लीमा का कहना है कि भारत के हालिया पीएमआई नतीजे साल की शुरुआत में सर्विस सेक्टर में देखी गई मजबूत ग्रोथ के स्थायित्व और कंपनियों के रोजगार सृजन की क्षमता पर सवाल खड़े करते हैं।
  • सर्विस सेक्टर की व्यावसायिक गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई। यह स्थिति बिक्री में सुस्ती के चलते पैदा हुई है।
  • लीमा ने कहा कि जीएसटी लागू होने के दो साल बाद भी कुछ कंपनियां सुस्त मांग को टैक्स की ऊंची दरों से जोड़ रही हैं। यह चौंकाने वाला है।
  • दरअसल, जीएसटी की दरों में कई बार कटौती की जा चुकी है। ऐसे में मांग सुस्त रहने के लिए केवल टैक्स को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। वैसे रिपार्ट में उम्मीद जताई गई है कि आगामी महीनों में मांग बढ़ सकती है।
  • आईएचएस मार्किट कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जून में गिरकर 50.8 के स्तर पर आ गया, जो मई में 51.7 पर था। यह एक साल का सबसे निचला स्तर है। यह इंडेक्स मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर, दोनों की संयुक्त स्थिति का संकेत देता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

हाइड्रोजन सीएनजी बस

  • राजधानी में प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए डीटीसी और क्लस्टर बसें जल्द ही हाइड्रोजन सीएनजी (हाइड्रोजन कम्प्रैस्ड नेचुरल गैस) से भी दौड़ेंगी। वर्तमान में डीटीसी और क्लस्टर बसें सीएनजी से चलती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत दिल्ली में बसों में एचसीएनजी का प्रयोग पहली बार होगा।
  • बसों में हाइड्रोजन सीएनजी के प्रयोग के लिए सरकार द्वारा अन्य एजेंसियों के सहयोग से जल्द ही पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत एचसीएनजी के प्रयोग के पहले चरण में क्लस्टर की 50 बसों को 6 महीने तक दिल्ली की सड़कों पर चलाया जाएगा और इस प्रोजेक्ट की निगरानी ईपीसीए द्वारा की जाएगी। दिल्ली में पहला हाइड्रोजन सीएनजी स्टेशन भी बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह हाइड्रोजन सीएनजी स्टेशन राजघाट स्थित क्लस्टर डिपो में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा बनाया जाएगा।
  • क्लस्टर बसों में हाइड्रोजन सीएनजी का परीक्षण सफल रहने के बाद डीटीसी और क्लस्टर की अन्य बसों में भी हाइड्रोजन सीएनजी ईंधन का प्रयोग किया जा सकता है। इस नए वाहन ईंधन के प्रयोग से यह पता लगाया जाएगा कि प्रदूषण के स्तर को कम करने में कितनी मदद मिल सकती है और यह सीएनजी से कितना बेहतर साबित हो सकता है। ट्रायल के तौर पर बसों में 6 महीने तक प्रयोग की जाने वाली हाइड्रोजन सीएनजी की रिपोर्ट की सुप्रीम कोर्ट समीक्षा करेगा। यदि परिणाम बेहतर साबित हुए तो हाइड्रोजन सीएनजी का बतौर ईंधन अन्य वाहनों में प्रयोग शुरू हो सकता है।
  • सीएनजी का मुख्य स्रोत मीथेन गैस है, जबकि हाइड्रोजन सीएनजी का मुख्य स्रोत कई गैसों का मिश्रण है, जिसमें 4-9 प्रतिशत हाइड्रोजन होती है, जिसे ईंधन के रूप में प्रयोग करने के लिए कम्प्रैस्ड किया जाता है।

:: विविध ::

पटियाला के सुरजीत ने बनाया सबसे सुंदर शौचालय, केंद्र सरकार ने पुरस्कार देकर बढ़ाया हौसला

  • राजपुरा के गांव धर्मगढ़ के 32 वर्षीय सुरजीत सिंह को सबसे सुंदर शौचालय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सम्मानित किया है। उन्हें यह पुरस्कार केंद्रीय जल मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रस्तरीय स्वच्छ सुंदर शौचालय प्रतियोगिता की व्यक्तिगत श्रेणी में मिला है।

PPP के तहत 3 एयरपोर्ट पट्टे पर दिए जाएंगे

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के तीन हवाई अड्डों अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरू को लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत मैसर्स अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने बोली दस्तावेजों के नियमों और शर्तों के अनुसार इन हवाई अड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास के लिए 50 साल की लीज अवधि के लिए सबसे अधिक बोली लगाई.
  • ये परियोजनाएं सार्वजनिक क्षेत्र में आवश्यक निवेशों को काम में लाने के अलावा वितरण, विशेषज्ञता, उद्यम और व्यावसायिकता में दक्षता लायेंगी. इससे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के राजस्व में वृद्धि होगी, जिससे एएआई द्वारा टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश किया जा सकता है और रोजगार सृजन व संबंधित बुनियादी ढांचे की दृष्टि से इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास होगा. अडानी ग्रुप ने यह बोली पर-पैसेंजर्स फीस के आधार पर जीती है.

पासपोर्ट इंडेक्‍स-2019

  • हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स-2019 की ताजा रैंकिंग में दो एशियाई देशों जापान और सिंगापुर ने संयुक्तरूप से पहला स्थान हासिल किया है। भारत इस सूची में 86वें स्थान पर है। यह रैंकिंग देशों के पासपोर्ट की ताकत पर निर्भर करती है। जिस देश के पासपोर्ट के जरिए बगैर वीजा या वीजा ऑन अराइवल सबसे अधिक देशों में आने-जाने की छूट होती है, वह सबसे अधिक ताकतवर पासपोर्ट माना जाता है।
  • भारत जहां इस वर्ष के शुरुआत में 79वें स्थान पर था और 61 देशों में बगैर वीजा जाने की अनुमति थी, अब रैंक 86 हो गई है और भारत का स्कोर 58 हो गया है। इस इंडेक्स में स्कोर का मतलब है कि कितने देशों में उस पासपोर्ट के जरिए वीजा मुक्त या वीजा आन अराइवल प्रवेश मिल सकता है। पाकिस्तान की मौजूदा रैंकिंग 106 और स्कोर 30 है जबकि पिछली बार स्कोर 33 और रैंकिंग 102 थी।
  • यह इंडेक्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है। इसके लिए 199 पासपोर्ट और 227 गंतव्य स्थलों को शामिल किया गया। इंडेक्स की नवीनतम रैंकिंग से पता चलता है कि दुनियाभर के देश आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए वीजा के खुलेपन को महत्वपूर्ण रूप से देखते हैं।

टिहरी झील में सी-प्लेन के लिए एमओयू साइन

  • टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन के लिए वाटरड्रोम की स्थापना के लिए राज्य सरकार, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री व एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच एमओयू पर साइन हुए।
  • वाटर ड्रोम की स्थापना के लिए एमओयू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला स्टेट बना है।
  • वाटरड्रोम की स्थापना ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की तरह की जाएगी। इसी दौरान पिथौरागढ़ के नैनी-सैनी में हवाई सर्विसेस के लिए सफल संचालन के लिए भी सीएनएस-एटीएम एमओयू पर भी साइन हुए।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया (चिल्ड्रेन विद डिसेबिलिटी) 2019 रिपोर्ट को किस संगठन के द्वारा तैयार किया गया है? (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज )
  • गरीबी और कुपोषण से जूझ रहे लोगों को सरकार द्वारा किस प्रकार के चावल उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जा रही है? (फोर्टिफाइड राइस)
  • हाल ही में यूरोपीय संसद के अध्यक्ष के रूप में किसकी नियुक्ति की गई है? (डेविड सासोली)
  • यूरोपीय संघ के नेताओं के द्वारा यूरोपीय आयोग के प्रमुख हेतु किसका नाम नामित किया गया है? (उरसुला वोन डेन लेयन)
  • यूरोपीय संघ के नेताओं के द्वारा यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अध्यक्ष हेतु किसका नाम नामित किया गया है?  (क्रिस्टीन लेगार्द)
  • हाल ही में मालदीव और भारत के मध्य हुए समझौते से किन स्थानों को आपस में फेरी सेवाओं के माध्यम से जोड़ा जाएगा? (कोच्चि को मालदीव के माले और कुलहुधुफुसी से)
  • भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की कौन सी धारा राजद्रोह को राजद्रोह कानून कहा जाता है? (124-ए)
  • अंग्रेजी के अलावा कौन-कौन सी भाषाओं में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले उपलब्ध होंगे? (हिंदी, तेलगू, असमिया, कन्नड़, मराठी, और उडि़या)
  • किस विधेयक के तहत भारतीय मध्यस्थता परिषद का गठन किया जाएगा? (मध्यस्थता एवं सुलह संशोधन विधेयक 2019)
  • हाल ही में किस शहर में हाइड्रोजन सीएनजी पर आधारित बसों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की घोषणा की गई है? (दिल्ली)
  • राष्ट्रस्तरीय स्वच्छ सुंदर शौचालय प्रतियोगिता की व्यक्तिगत श्रेणी में किसे सुंदर शौचालय बनाने के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया है? (सुरजीत सिंह)
  • हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल के द्वारा कौन से हवाई अड्डों को सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत लीज पर देने का प्रस्ताव पारित किया गया है? (अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरू)
  • किस देश ने हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स-2019 की रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त किया है? (जापान और सिंगापुर संयुक्तरूप से)
  • हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स-2019 में भारत का कौन सा स्थान रहा है? (86)
  • हाल ही में किस राज्य ने सी प्लेन के संचालन हेतु वाटर ड्रोन की स्थापना के लिए एमओयू पर साइन किया है? (उत्तराखंड)
  • हाल ही में किस झील में सी प्लेन के संचालन हेतु एमओयू पर साइन किया गया है? (टिहरी झील उत्तराखंड)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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