(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 03 मार्च (3rd March) : विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day)


(Important Day महत्वपूर्ण दिवस) 03 मार्च (3rd March) : विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day)


  • प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day) मनाया जाता है। आपको बता दें संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसम्बर, 2013 के 68वें सत्र में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में घोषित किया था। 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस को मनाने की तिथि का इसलिए चयन किया गया क्योंकि इसी दिन ‘विलुप्तप्राय वन्यजीव व वनस्पति के व्यापार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ (CITES) को स्वीकृत किया गया था।

विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम एवं उससे जुड़े तथ्य

  • विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम 'फॉरेस्ट एंड लाइवलीहुड: सस्टेनिंग पीपल एंड प्लानेट: Forests and Livelihoods: Sustaining People and Planet' है। इस थीम को रखने का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से वनों और जंगल से सटे इलाकों में निवास करने वाले स्वदेशी और स्थानीय समुदायों के करोड़ों लोगों की आजीविका को बनाए रखने के लिए वनों, वन्यजीव प्रजातियों और पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं की केंद्रीय भूमिका को उजागर करना है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों 1, 12, 13 और 15 के साथ संरेखित है जोकि गरीबी को कम करने, संसाधनों का स्थायी उपयोग सुनिश्चित करने और भूमि के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है।
  • दुनिया भर में लगभग 200 से 350 मिलियन लोग वनाच्छादित क्षेत्रों के भीतर या आस-पास के क्षेत्रों में रहते हैं, जोकि अपनी आजीविका के लिए वन और वन्य प्रजातियों द्वारा प्रदान की गई विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं पर निर्भर हैं। इसके साथ ही भोजन, आश्रय, ऊर्जा और दवाओं सहित अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी वे वन और वन्य प्रजातियों द्वारा प्रदान की गई विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं पर आश्रित हैं।
  • वर्तमान में दुनिया की 28% भूमि की सतह का प्रबंधन देशज/स्थानीय लोगों द्वारा किया जाता है, जिसमें पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे अधिक पारिस्थितिक रूप से घने जंगल भी शामिल हैं। ये स्थान न केवल उनकी आर्थिक और व्यक्तिगत भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण उपागम है बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए भी एक केंद्रीय तत्व हैं।
  • वनों, वन्य संपदा की प्रजातियों और उन पर निर्भर रहने वाली लोगों की आजीविका वर्तमान में कई चुनौतियों से जूझ रही है जिसमें जलवायु परिवर्तन से लेकर जैव विविधता के नुकसान और COVID-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव इत्यादि भी शामिल है।
  • इस दिवस के माध्यम से वन आधारित आजीविका को समर्थन करते हुए उन वन और वन्य जीव प्रबंधन प्रथाओं को प्रोत्साहन देना है जो मानव कल्याण और जंगलों के दीर्घकालिक संरक्षण दोनों को समायोजित करते हो। इसके लिए उन सभी पारंपरिक प्रथाओं के मूल्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा जो इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रणाली में अत्यधिक स्थायी संबंध स्थापित करने में मददगार हैं।

वन्यजीव से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • पिछले वर्ष वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर’ द्वारा ‘लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट-2020’ जारी की गयी जिसके कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष निम्न है
  1. रिपोर्ट में साल 1970 से 2016 के बीच वैश्विक कशेरुकी प्रजातियों की आबादी में औसतन 68 फ़ीसदी की गिरावट की बात कही गई है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह गिरावट 45 फ़ीसदी है।
  2. अमेरिका के उष्णकटिबंधीय उप-भागों के लिये लिविंग प्लैनेट इंडेक्स में 94 फ़ीसदी की गिरावट दुनिया के किसी भी क्षेत्र में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट है।
  3. मीठे जल की प्रजातियों की आबादी में साल 1970 के बाद से औसतन 84 फ़ीसदी की कमी आई है।
  4. मीठे जल की प्रजातियों की आबादी स्थलीय या समुद्री प्रजातियों के मुकाबले ज्यादा तेज़ी से घट रही है।
  5. आकार के हिसाब से देखें तो मेगाफौना (Megafauna) या बड़ी प्रजातियाँ ज्यादा असुरक्षित हैं, क्योंकि वे मानवजनित खतरों और अंधाधुंध दोहन की शिकार हैं।
  6. साल 1970 के बाद से पारिस्थितिकी पदचिह्न यानी Ecological Footprint पृथ्वी के पुनरुत्पादन की दर से ज्यादा हो चुकी है। आसान शब्दों में कहें तो प्रकृति जितना जैव संसाधन पैदा कर रही है या फिर उसका पुनरुत्पादन कर रही है, उसके मुकाबले इन जैव संसाधनों की माननीय खपत ज्यादा है।
  7. मौजूदा वक्त में, मानव की मांग पृथ्वी की पारिस्थितिकी के पुनरुत्पादन की दर के मुकाबले 1.56 गुना ज्यादा है।
  • पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली IPBES संस्था की रिपोर्ट के अनुसार 1980 से 2000 के बीच दक्षिण-पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका में 10 करोड़ हैक्टेयर जंगल खत्म हो गए।
  • IPBES संस्था की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से घरेलू पक्षियों की संख्या में 3.5% तक की कमी आई है। लुप्त हो रहे 23% पक्षियों पर जलवायु परिवर्तन का असर दिख रहा है।

वन्यजीव के संरक्षण हेतु प्रयास

वैश्विक स्तर पर-

  • वन्य जीव और वनस्पति के लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन (CITES) का लक्ष्य है कि जंगली जानवरों और पौधों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उनके अस्तित्व को खतरा न पहुँचाया जाये।
  • वन्य पशु की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर सम्मेलन (CMS) का लक्ष्य है कि अपनी सीमा के दौरान स्थलीय, समुद्री और आकासीय प्रवासी प्रजातियों को संरक्षित रखा जाये।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) का घोषित लक्ष्य, विश्व की सबसे विकट पर्यावरण और विकास संबंधी चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने में सहायता करना है। संघ विश्व के विभिन्न संरक्षण संगठनों के नेटवर्क से प्राप्त जानकारी के आधार पर लाल सूची प्रकाशित करता है, जो विश्व में सबसे अधिक संकटग्रस्त प्रजातियों को दर्शाती है।
  • व्हेलिंग नियमन के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (IWC) का उद्देश्य अत्यधिक शिकार से सभी व्हेल प्रजातियों का संरक्षण करना एवं व्हेल मछली पालन के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमन की एक प्रणाली की स्थापना करना है, जिससे व्हेल भंडारणों का उचित संरक्षण और विकास सुनिश्चित हो सके और व्हेल की भविष्य की पीढि़यों को सुरक्षा प्रदान किया जा सके।
  • जैव-विविधता अभिसमय (CBD) को 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित हुए पृथ्वी दिवस में अपनाया गया। अब तक सीबीडी ने जैव विविधता से संबंधित कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल , नगोया प्रोटोकॉल और आईची लक्ष्य से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल एवं नियमो को मंजूरी दी गयी है।
  • एसडीजी के वैश्विक लक्ष्यों में पर्यावरण, सतत विकास एवं जैव विविधता को प्राथमिकता

भारत के स्तर पर-

  • केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर वन्य जीव की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए कई नियम तथा कानून पारित किए गए हैं। इनमें से महत्वपूर्ण हैं-
  1. मद्रास वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट, 1873
  2. ऑल इण्डिया एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट, 1879
  3. द वाइल्ड बर्ड एण्ड एनीमल्स प्रोहिबिशन एक्ट, 1912
  4. बंगाल राइनोसेरस प्रिजर्वेशन एक्ट, 1932
  5. असम राइनोसेरस प्रिजर्वेशन एक्ट, 1954
  6. इण्डियन बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (आइबीडब्ल्यूएल), 1952
  7. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972
  8. पहली वन्य जीवन कार्य योजना, 1983
  9. वन संरक्षण अधिनियम, 1980:
  10. राष्ट्रीय वन नीति, 1988
  11. नई वन्य जीवन कार्य योजना (2002-2016)
  12. जैव विविधता अधिनियम, 2002

वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भारत सरकार के कुछ महत्वपूर्ण पहल

  1. 1 अप्रैल, 1973 में प्रोजेक्टर टाइगर की शुरुआत
  2. 1992 में प्रोजेक्ट एलीफेंट
  3. गिद्ध परिरक्षण, गिद्ध संरक्षण कार्य योजना 2020-2025
  4. घड़ियाल संरक्षण
  5. 2009 में हिम तेंदुआ परियोजना (प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड)
  6. 2019 में ‘भारतीय एकसिंगी गैंडे के लिए राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति’
  7. 2019 से एशियाई शेर संरक्षण परियोजना

भारत द्वारा वन्यजीव संरक्षण संबंधी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का अपनाया जाना

  1. CITES समझौते को अपनाना
  2. 1983 में बान कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए।
  3. सीएमएस के साथ साइबेरियाई सारस के लिए 1998 में, समुद्री कछुओं के लिए 2007 में, डुगोंग्स के
  4. लिए 2008 में और रेप्टर्स के संरक्षण के लिए 2016 में कानूनी रूप से अबाध्यकारी समझौता ज्ञापनों पर
  5. हस्ताक्षर
  6. 2020 में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, एशियाई हाथी और बंगाल फ्लोरिकन को प्रवासी प्रजातियों के बारे में संयुक्त राष्ट्र
  7. समझौते के परिशिष्ट-I में शामिल करवाना