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Updated: 26 min 44 sec ago

Daily MCQs for UPSC/State PSC Exams: 10 December 2018

1 hour 54 sec ago


Daily MCQs for UPSC/State PSC Exams


Questions:10
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(Download) NCERT Books for UPSC & State PSC Exams: Class X (Economy)

1 hour 44 min ago


(Download) NCERT Books for UPSC & State PSC Exams: Class X (Economy)


Content:

Chapter 1

  • DEVELOPMENT

Chapter 2

  • SECTORS OF THE INDIAN ECONOMY

Chapter 3

  • MONEY AND CREDIT

Chapter 4

  • GLOBALISATION AND THE INDIAN ECONOMY

Chapter 5

  • CONSUMER RIGHTS

Appendix

Suggested Readings


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Courtesy: NCERT

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(Video) Rajya Sabha TV (RSTV) The Big Picture: Gender Equality vs Religious Practices

2 hours 16 min ago

(Video) Rajya Sabha TV (RSTV) The Big Picture: Gender Equality vs Religious Practices

Topic: Gender Equality vs Religious Practices

Guest:

  • Rahul Easwar, (Sabrimala Supreme Priest's Grandson)
  • Geeta Luthra, (Senior Advocate, Supreme Court)
  • Urvashi Butalia, (Co-founder of Kali for Women)
  • V Rajyalaxmi, (Sociologist, Janki Devi Memorial College)

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Courtesy: RSTV

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(Daily News Scan - DNS) NOTA - नापसंदगी का अधिकार (NOTA - Right to Reject)

2 hours 53 min ago


(Daily News Scan - DNS) NOTA - नापसंदगी का अधिकार (NOTA - Right to Reject)


मुख्य बिंदु:

हाल ही में हरियाणा चुनाव आयोग ने NOTA को लेकर एक महत्तवपूर्ण फैसला लिया है। इस फैसले के मुताबिक हरियाणा में होने वाले निकाय चुनावों में NOTA वोटों की संख्या ज़्यादा होने पर दोबारा चुनाव करने की बात कही गई है।

हरियाणा चुनाव आयोग के अनुसार यदि किसी भी इलाके में पड़े नोटा मतों की संख्या अन्य उम्मीदवारों से ज़्यदा हुई तो इस स्थिति में सभी प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित करते हुए दोबारा से मतदान कराये जायेंगे।

NOTA लागू होने के बाद ये पहला ऐसा मौका है जब नोटा के तहत पड़ने वाले वोटों को एक प्रत्याशी के तौर पर गिना जायेगा । जिसके द्वारा चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने वाले अधिकार राइट टू रिजेक्ट को और ज़्यदा मज़बूत मिलेगी।

नोटा भारतीय मतदाताओं को चुनाव के दौरान अपने पसंद का कैंडिडेट न होने पर वोट न देने का अधिकार देती है जिसका मतलब होता है - None of the Above भारत में नोटा की शुरुआत साल 2013 के आखिरी महीनों में हुई थी। जिसकी मांग वर्ष 2009 से ही की जा रहे थी। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी की जाने वाली मतदान सूची में शामिल सभी नागरिकों को नोटा का अधिकार प्राप्त है जोकि अपने पसंद के उमीदवार को चुनने या नहीं चुनने की आज़ादी देता है।

2015 से पूरे भारत भर में नोटा लागू हो जाने के बाद भारत दुनिया का 14 वा नोटा विकल्प उपलब्ध करने वाला देश बन गया था। इसके पहले अमेरिका, कोलंबिया, यूक्रेन, और ब्राज़ील जैसे देश में नोटा विकल्प लम्बे समय से नागरिकों को प्राप्त है।

2009 में पहली बार चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से नोटा अधिकार मांग की थी। जिस पर साल 2013 के अंत में सुनवाई हुई।

23 सितम्बर 2013 को तात्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया प. सदाशिवम की अगुवाई वाली पीठ ने इस मांग का स्वागत किया। उस दौरान के अपने ऐतिहासिक फैसले में इस पीठ ने कहा कि दरअसल लोकतंत्र चुनावों का ही नाम है इसलिए मतदाताओं को वोट न देने का भी अधिकार मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटा के विषय में कहा था कि जिस तरह से नागरिकों को वोट डालने का अधिकार है उसी तरह से वोट नहीं देने का अधिकार भी ज़रूरी है जिसका इस्तेमाल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों चुनावों में किया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नोटा के तहत पड़ने वाले वोटो को रद्द मतों की ही श्रेणी में रखने का आदेश दिया था जिसके कारण उसकी प्रसंगिगता पर सवाल खड़े होने लगे।

इसके बाद वर्ष 2013 में ही चुनाव आयोग ने जब अप्रत्यक्ष चुनावों यानी राजयसभा और विधानपरिषद् के चुनावों में नोटा इस्तेमाल की सूचना जारी की तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी । जिसके बाद 21 अगस्त 2018को आये अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटा का इस्तेमाल होने से अप्रत्यक्ष चुनावों में समाहित निष्पक्षता समाप्त हो जाएगी। जिससे भ्रष्टाचार और डिफेक्शन को बढ़ावा मिलेगा।

सुप्रीमकोर्ट ने अपने इस फैसले में नोटा को भी आधारहीन बताया और कहा कि इससे चुनावों में मतदाता की भूमिका को नज़र अंदाज किया जा रहा है जिससे लोकतान्त्रिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को सिर्फ प्रत्यक्ष चुनावों तक ही सीमित रखने की बात कही।

दरसल चुनाव सुधार का साधन माने जाने वाले नोटा के लागू होने के बाद भी इसका कोई असर हमारे चुनाव प्रक्रिया पर नहीं पड़ा है।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के आंकड़ों पर नज़र डालें हर राज्य में सैंकड़ों आपराधिक मामले वाले संसद और विधायक मौजूद हैं और यही उमीदवार हर बार पार्टी की ओर से चुनाव भी लड़ते हैं।

हरियाणा चुनाव आयोग की ओर से लिया गया हालिया फैसला चुनाव सुधार के नज़रिये से काफी महत्वपूर्ण है। जोकि निकाय चुनावों के ज़रिये ही सही इसे अन्य प्रत्यक्ष चुनावों में शामिल कराने में अहम् भूमिका निभाएगा।

दरसल ये फैसला इस नज़रिये से भी महत्तवपूर्ण होगा कि यदि किसी उमीदवार को दिए गए वोटों से उसकी हार जीत तय हो सकती है तो फिर नोटा की कोई वैल्यू क्यों नहीं ? नोटा मतों की संख्या ज़्यदा होने के बावजूद भी यदि कोई खारिज किया हुआ उमीदवार लोकतान्त्रिक शासन में बना रहता है तो भारतीय चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए ये बड़ा संकट भी है।

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(AIR Debate) Topic: “Discussion on Reach and Developments in Goods and Services Taxe” 10 December 2018

3 hours 22 min ago

All India Radio Daily Debate

Spotlight/News Analysis (10, December 2018):

  • Topic of Discussion: Discussion on Reach and Developments in Goods and Services Taxe
  • Expert Panel:  A. K. Bhattacharya (Economic Analyst), Shishir Sinha (Journalist)

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Courtesy: All India Radio

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(AIR Debate) Topic: “An interview with Prof. Ashutosh Sharma (Secretary, Department of Science & Technology)” 09 December 2018

4 hours 4 min ago

All India Radio Daily Debate

Spotlight/News Analysis (09, December 2018):

  • Topic of Discussion: An interview with Prof. Ashutosh Sharma (Secretary, Department of Science & Technology)
  • Interviewer:  Pallava Bagla (Journalist)

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Courtesy: All India Radio

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Online Test Series for UPPCS Mains Examination - 2018 - Test - 1: General Studies (Paper - I) - 08, December 2018

Sat, 12/08/2018 - 16:24


Online Test Series for UPPCS Mains Examination - 2018


Test - 1: General Studies (Paper - I)

UPPSC Syllabus:

  • Modern History, India after independence, World History, History of Uttar Pradesh

Q. Continental system was a wrong conception deliberated by Napoleon, which remained unsuccessful due to his own inherent faults. Discuss. (10 Marks)

 

Model Answer will be uploaded Tomorrow

 


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Daily MCQs for UPSC/State PSC Exams: 08 December 2018

Sat, 12/08/2018 - 16:24


Daily MCQs for UPSC/State PSC Exams


Questions:10
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(Download) NCERT Books for UPSC & State PSC Exams: Class X (Geography)

Sat, 12/08/2018 - 13:27


(Download) NCERT Books for UPSC & State PSC Exams: Class X (Geography)


Content:

1. Resources and Development

2. Forest and Wildlife Resources

3. Water Resources

4. Agriculture

5. Minerals and Energy Resources

6. Manufacturing Industries

7. Lifelines of National Economy

Appendix–I

Appendix–II

Appendix–III

Glossary


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Courtesy: NCERT

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(Video) Rajya Sabha TV (RSTV) The Big Picture: Transforming Indian Cities

Sat, 12/08/2018 - 12:37

(Video) Rajya Sabha TV (RSTV) The Big Picture: Transforming Indian Cities

Topic: Transforming Indian Cities

Guest:

  • Sudhir Krishna, (Former Union Secretary, Ministry of Urban Development)
  • Durga Shanker Mishra, (Secretary, Ministry of Housing and Urban Affairs)
  • K. T. Ravindran, (Head of Urban Design, School of Planning and Architecture)
  • Subhomoy Bhattacharjee, (Consulting Editor, Business Standard)

Topic Description:

Indian cities will make up most of the fastest-growing cities in the world between 2019 and 2035, considering the year-on-year Gross Domestic Product growth, said a report by Oxford Economics. Over 17 of the 20 top cities on the list will be Indian. The report said that Indian cities including Bengaluru, Hyderabad, and Chennai will be among the strongest performers across the globe. According to a Bloomberg report that cited Richard Holt, Oxford’s head of global cities research, India will dominate the top 10 cities in terms of economic growth over the span of 20 years. Surat, a commercial center for textiles in Gujarat, will witness the fastest GDP growth by an average exceeding 9%. While economic output in many of those Indian cities will remain rather small in comparison to the world’s biggest metropolises, aggregated gross domestic product of all Asian cities will exceed that of all North American and European urban centres combined in 2027. By 2035, it will be 17 percent higher, with the largest contribution coming from Chinese cities. Little will change at the top of the list of the world’s biggest cities between now and 2035.

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Courtesy: RSTV

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(AIR Debate) Topic: “Discussion on Armed Forces Flag Day” 08 December 2018

Sat, 12/08/2018 - 12:16

All India Radio Daily Debate

Spotlight/News Analysis (08, December 2018):

  • Topic of Discussion: Discussion on Armed Forces Flag Day
  • Expert Panel:  Brigadier Mrigendra Kumar (Secretary, Kendriya Sainik Board Secretariat), Vinay Kumar (Journalist)

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Courtesy: All India Radio

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(Daily News Scan - DNS) Exit Poll कितना सही, कितना गलत

Fri, 12/07/2018 - 19:25


(Daily News Scan - DNS) Exit Poll कितना सही, कितना गलत


मुख्य बिंदु:

  • आप देखते होंगे की किसी भी राज्य में सभी चरणों के मतदान खत्म होते ही अलग अलग टीवी चैनल्स पर एग्जिट पोल आने लगते हैं। इन एग्जिट पोल्स में मतदाताओं के रुझान पेश किए जाते हैं। जिसके माधयम से किसी पार्टी विशेष के जीतने की भाविष्यवाणी की जाती है।
  • लेकिन ये एग्जिट पोल हमेशा अपने आंकड़ों पर खरे नहीं उतरते हैं। कभी कभी तो इनके आंकड़े में जमीन आसमान तक का अंतर हो जाता है, जिसके कारण एग्जिट पोल की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
  • आज हम आपको इसी एग्जिट के सभी पहलुओं से रूबरू कराएँगे - जिनमें की एग्जिट पोल क्या होते हैं, ये कैसे कराये जाते हैं, एग्जिट पोल के लिए भारत में कानून क्या है और इसको लेकर क्या मत हैं।
  • दरअसल एग्जिट पोल मतदान देकर बहार निकल रहे लोगों से पूछे गए कुछ सवालों का एक सर्वेक्षण हैं। जिसके ज़रिये पार्टियों को मिले वोटो का अनुमान लगाया जाता है। एग्जिट पोल का मकसद आधिकारिक परिणाम घोषित होने से पहले ही चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी करना है, जिसका अधिकार भारतीय मीडिया को प्रेस की आज़ादी और अभिवयक्ति की स्वतंत्रता के तहत मिली हुई है ।
  • भारत में कुछ एजेंसियां जैसे - सी वोटर, टूडेज चाणक्य , टाइम्स नाउ, CNN और IBN के अलावा कई संस्थाएं एग्जिट पोल का सर्वेक्षण करती हैं।
  • ये संस्थाएं वोटिंग के दौरान ही अलग अलग उम्र, लिंग, जाति और समुदाय के लोगों से कुछ सवाल पूछ्ती हैं जैस कि आपने किस पार्टी को वोट दिया, और क्यू ये एजेंसियां लगभग हर तीसरे या चौथे मतदाता से सवाल करतीं हैं ताकि सभी वर्ग के मतदाताओं का प्रयाप्त भागीदारी सर्वेक्षण में बनी रहे।
  • बाद में इन्ही मतदाताओं के जवाबों के अनुसार एजेंसियां अपना एग्जिट पोल तैयार करते हैं। जिसका सभी चरणों के चुनाव समाप्त हो जाने के बाद टीवी चैनल्स प्रसारण करते हैं।
  • भारत में एग्जिट पोल को लेकर कुछ विवाद भी हुए हैं, इन विवादों में एग्जिट पोल के आकंड़े के अनुसार हार रही पार्टियों ने इसे हमेशा से ही आधारहीन बताते हुए समाप्त करने की मांग की है। इससे पहले चुनाव आयोग भी एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल पर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश करता आया है।
  • ओपेनियन पोल और एग्जिट पोल दोनों अलग अलग टर्म्स है। एग्जिट पोल का मतलब जहां चुनाव के बाद किया गया सर्वेक्षण है तो वही ओपेनियन पोल की प्रक्रिया चुनाव के पहले ही करा ली जाती है।
  • चुनाव आयोग की मांगों को लेकर साल 1999 में सर्वोच्च न्यायलय ने एक दिशा निर्देश जारी किया था। इस निर्देश में सुप्रीम कोर्ट कहा था कि बिना किसी वैधानिक प्रतिबन्ध के चुनाव आयोग ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल पर कोई रोक नहीं लगा सकता है। जिसके बाद से ये दोनों ही पोल भारत में जारी हैं।
  • हालांकि 2004 में चुनाव आयोग ने एक बार फिर एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल के नियमों में कुछ बदलाव बात रखी। चुनाव आयोग ने ये मांग कानून मंत्री के सामने रिप्रजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट में कुछ संशोधन कराने के लिहाज से रखी थी। जिसमें ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल को चुनाव के एक निर्धारित समय के दौरान बैन करने की मांग की गयी थी।
  • फरवरी 2010 में ये फैसला आया तो ज़रूर लेकिन ये पूरी तरह से चुनाव आयोग के पक्ष में नहीं था। कानून मंत्रालय ने रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट के सेक्शन 126 A को परिभाषित करते हुए सिर्फ एग्जिट पोल को ही एक समय विशेष के लिए प्रतिबंधित करने की बात कही। इस प्रतिबन्ध के अनुसार किसी भी राज्य में सभी चरणों के मतदान पूरा हो जाने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल के नतीजों को प्रसारित करने का आदेश है।
  • एग्जिट पोल और ओपेनियन पोल को लेकर अलग अलग देशों में अपने अपने कानून हैं। अमेरिका में ओपेनियन पोल को अभिव्यक्ति की आज़ादी का अभिन हिस्सा बताया गया हैं जहां इसे कभी भी प्रसारित किया जा सकता है। जबकि एग्जिट पोल को लेकर वहां भी भारत जैसे ही कानून हैं।
  • आइये अब जानते हैं कि एग्जिट पोल को लेकर लोगों के क्या मत हैं और आगे क्या होना चाहिए।
  • एग्जिट पोल को लेकर जो विवाद होते हैं उसमें कहा जाता है कि एग्जिट पोल के कारण दुसरे मतदाताओं के व्यव्हार और सोचने की दिशा प्रभावित होती है जिसके कारण वो खुद का तर्कसंगत विचार नहीं रख पाते हैं।
  • एग्जिट पोल के आने के बाद राजनैतिक पार्टियां पहले ही जश्न मनाने लगती हैं, जबकि कई बार एग्जिट पोल के आंकड़े गलत साबित होते हैं जिससे चुनावी अव्यस्था पैदा होने का खतरा रहता है।
  • एग्जिट पोल के दौरान ये भी सम्भावना रहती है कि राजनैतिक पार्टियों के साथ भेदभाव किया जा सकता है जिसका चुनाव प्रक्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
  • इसके अलावा किसी मतदाता के मतदान को सार्वर्जनिक करना भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफ है जिससे पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
  • जबकि एग्जिट पोल के पक्ष में लोगो का तर्क ये है कि एग्जिट पोल को बैन करने से लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ माने जाने वाले प्रेस की स्वतंत्रता के साथ साथ ये नागरिकों की भी अभिव्यक्ति पर पाबंधी लगाने जैसा है। इसके अलावा ये पोल इस बात का भी इशारा करते हैं की मतदान के बहुमत का झुकाव किस राजनीतिक दाल का ओर ज़्यादा है। जिससे उस पार्टी के चुनावी विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया जा सके।
  • हालाँकि एग्जिट पोल को तभी सही ठहराया जा सकता है जब तक कि उसके काम पर कोई सवाल न उठे। निर्वाचन आयोग को चाहिए कि एग्जिट पोल के लिए काम करने वाली एजेंसियों के लिए के लिए कुछ नियम तैयार किए जाय। जिससे की निष्पक्ष और सटीक आंकड़ों का पता लगाया जा सके।
  • एग्जिट पोल के लिए जितने ज़्यदा आयु वर्ग और जातिसमुदाय के लोगों पर सर्वेक्षण किया जायेगा नतीजे उतने ही बेहतर आएंगे।
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन की भावना को बनाये रखने के लिए नागरिकों और मीडिया संगठनों को भी चाहिए जिम्मेदारी पूर्ण व्यहार अपनाये।
  • इसके आलावा एग्जिट पोल के परिणामों को लेकर भी लोगों में जागरूकता फैलाई जाय। जोकि चुनाव प्रक्रिया के लिए एक बेहतर कदम साबित होगा।
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(Daily News Scan - DNS) पर्यावरण आजकल : COP24

Fri, 12/07/2018 - 19:17


(Daily News Scan - DNS) पर्यावरण आजकल : COP24


मुख्य बिंदु:

पोलैंड में होने वाले 24 वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है। ये सम्मलेन 2 दिसंबर से शुरू हुआ है जोकि अगली 14 तारीख तक जारी रहेगा।

इस सम्मलेन का मुख्य मकसद 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौतों को लेकर उभरे राजनैतिक मतभेदों को दूर करना तथा इस सहमति के नियमों को ज़्यादा मज़बूती प्रदान करना है।

ये सम्मेलन पोलैंड के शहर katowice में आयोजित किया जा रहा है जहां पूरी दुनिया के लगभग 200 देश हिस्सा ले रहे है। पोलैंड में हो रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मलेन 2018 की पोलैंड तीसरी बार मेजबानी कर रहा है। इससे आलावा भी पोलैंड 2008 और 2013 में हुए सम्मलेन की मेजबानी कर चुका है।

भारत की ओर से इस सम्मलेन का प्रतिनिधित्व पर्यावरण मंत्री द्वारा किया जायेगा। जहां जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटे के लिए विकसित देशों से आर्थिक सहयोग और ग्रीन हाउस गैसों को कम करने की बात की जाएगी। इसके साथ ही बदलते क्लाइमेट चेंज के कारण होने वाली समस्यांओ से निपटने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

जलवायु परिवर्तन को लेकर लम्बे वक़्त से पूरा विश्व परेशान है। तेज़ी से बदलते मौसम, अकाल बाढ़, सूखा, और बेमौसम बारिश जैसी हैरान करने वाली घटनाये जलवायु परिवर्तन के ही कारण होती है। दरअसल पिछले कुछ सालों में ग्रीन हॉउस गैसों का उत्सर्जन काफी तेज़ी से बढ़ा है जिसके कारण हमारा इको सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ग्रीन हाउस एक प्राकृतिक घटना है जोकि सूर्य से आने वाली ऊर्जा का कुछ भाग मिटटी पेड़ पौधों और ग्रीन हाउस के अन्य स्रोतों द्वारा ग्रहण करती है उसे ही ग्रीन हाउस इफ़ेक्ट कहते हैं। ये प्रक्रिया पृथ्वी के लिए बहुत ज़रूरी होती है, जिसके माधयम से ही पृथ्वी पर मानव जीवन संभव है। लेकिन कुछ वक़्त से ग्रीन हाउस गैसों में शामिल कार्बन डाईऑक्साइड, मेथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा में काफी इजाफा हुआ है। जिसके कारण पृथ्वी का तापमान तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।

2015 में हुए पेरिस समझते के दौरान इसी समस्या को लेकर बात हुई थी। जिसमें वैश्विक तापमान की वृद्धिदर को 2 डिग्री सेल्सियस से भी कम रखने

पर करीब 200 देशों ने सहमति जताई थी। इस सम्मलेन के दौरान ही सभी देशों ने बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कोयले का भी कम से कम प्रयोग कर 2030 तक इसे पूरी तरह से समाप्त कर देने का भरोसा जताया था।

लेकिन पिछले ही साल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेरिस संधि को अमेरिका के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे छोड़ दिया। जिसके बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिका की काफी आलोचना की गई। अमेरिका के इस फैसले के बाद कई और राष्ट्र भी इसे अपने हितों के खिलाफ बता रहे हैं। और वो भी इस संधि से खुद को बाहर कर सकते हैं।

पेरसि जलवायु समझौते का विवाद विकसित और विकाशील देशों में ज़्यदा है। जहां अमेरिका जैसे विकसित देश विकाशशील देशों को अधिक कार्बन उत्सर्जन की इज़ाज़त देने और आर्थिक रूप से मदद को लेकर नारज हैं।

हालांकि सालों पहले इन्ही विकसित देशों ने अनियमित तरीके से कोयला और पेट्रोलियम जैसे हानिकारक जीवाश्म ईंधनों का भरी मटर में इस्तेमाल किया था जिसके कारण जलवायु परिवर्तन की समस्या विकराल हुई है।

मौजूदा वक़्त में हमारे वातावरण को हानि पहुंचाने वाली गैसों मे CO2 - 77 से 80% , मेथेन - 14 और नाइट्रस ऑक्साइड की 8 फीसदी मौजूदगी है। पर्यावरण विदों का मानना है की यदि इन ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में कमी नहीं की गई तो आने वाले समय में पृथ्वी पर मौजूद विशाल ग्लेशियर तेज़ी से पिघल कर समुद्री जल स्तर को बढ़ा सकते हैं। जिससे मानव जीवन के संकट और गहरे हो जायेंगे।

इस समय सबसे ज़्यदा कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों में चीन 27 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है जबकि पेरिस जलवायु संधि से खुद को अलग करने वाला राष्ट्र अमेरिका 16% के साथ दूसरे नंबर पर बना हुआ है। भारत का कार्बन उत्सर्जन में कुल 6.6% योगदान हैं जिसे कम करने के लिए राष्ट्रीय सौर्य ऊर्जा मिशन, ग्रीन इंडिया मिशन और जल संरक्षण जैसे मिशनों पर भारत जोर दे रहा है।

दरअसल मौजूदा वक़्त में जलवायु परिवर्तन और उससे उत्पन्न संकट विश्व के सामने सबसे गंभीर समस्या है। जिससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और उन्हें लागू करने की सख्ती दिखानी चाहिए ताकि जलवायु परिवर्तन की नीतियों को प्रभावी बना कर इस संकट का हल निकाला जा सके।

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Free Online Test Series for UPPCS Mains Examination - 2018 - Test - 1: General Studies (Paper - I) - 07, December 2018

Fri, 12/07/2018 - 16:29


Free Online Test Series for UPPCS Mains Examination - 2018


Test - 1: General Studies (Paper - I)

UPPSC Syllabus:

  • Modern History, India after independence, World History, History of Uttar Pradesh

Q. To what extent the British policy of appeasement responsible in World War-II? Describe how World War-II affected international politics? (10 Marks)

 

Model Answer will be uploaded Tomorrow

 


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(Download) NCERT Books for UPSC & State PSC Exams: Class X (Science)

Fri, 12/07/2018 - 16:29


(Download) NCERT Books for UPSC & State PSC Exams: Class X (Science)


Content:

Chapter 1: Chemical Reactions and Equations

Chapter 2: Acids, Bases and Salts

Chapter 3: Metals and Non-metals

Chapter 4: Carbon and its Compounds

Chapter 5: Periodic Classification of Elements

Chapter 6: Life Processes

Chapter 7: Control and Coordination

Chapter 8: How do Organisms Reproduce?

Chapter 9: Heredity and Evolution

Chapter 10: Light – Reflection and Refraction

Chapter 11: The Human Eye and the Colourful World

Chapter 12: Electricity

Chapter 13: Magnetic Effects of Electric Current

Chapter 14: Sources of Energy

Chapter 15: Our Environment

Chapter 16: Sustainable Management of Natural Resources

Answers


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Courtesy: NCERT

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(Download) UPSC IAS Civil Services (Prelims) General Studies (Paper -1) Exam Paper - 2009 "Booklet Series: A"

Fri, 12/07/2018 - 16:28


(Download) UPSC IAS Civil Services (Prelims) General Studies (Paper -1) Exam Paper - 2009 "Booklet Series: A"


Exam Name: UPSC IAS Civil Services Prelims Exam Paper - 2009

Subject: General Studies (GS) Paper -1

Year: 2009

Medium: English

Test Booklet Series: A

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Courtesy: UPSC

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Daily MCQs for UPSC/State PSC Exams: 07 December 2018

Fri, 12/07/2018 - 16:28


Daily MCQs for UPSC/State PSC Exams


Questions:10
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Answer Writing Practice for UPSC IAS Mains Exam: Paper - III (General Studies – II) - 07 December 2018

Fri, 12/07/2018 - 15:57


Answer Writing Practice for UPSC IAS Mains Exam


UPSC Syllabus:

  • Paper-III: General Studies -II (Governance, Constitution, Polity, Social Justice and International relations)

Q. The much-needed witness protection scheme can help strengthen India’s tottering criminal justice system. Discuss. (250 words)

 

Model Answer will be uploaded Tomorrow

 

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